ठेका कर्मियों की हड़ताल के कारण डिपो में खड़ी बसें।
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पंजाब में आउटसोर्स व ठेका मुलाजिमों की हड़ताल से पेप्सू रोड ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन (पीआरटीसी) पर बड़ी मार पड़ी है। आंकड़ों के अनुसार, रेगुलर मुलाजिमों के दम पर कॉरपोरेशन अपने बेड़े में शामिल करीब 20 फीसदी बसों को ही रूटों पर चला सका, जबकि बड़ी गिनती बसें डिपुओं में ही खड़ी रहीं। कॉरपोरेशन को मंगलवार को हड़ताल के पहले दिन ही लाखों रुपये का नुकसान झेलना पड़ा। इससे कॉरपोरेशन की वित्तीय स्थिति फिर से बिगड़ने की आशंका बन गई है, जो हाल ही में सुधरी थी।
आंकड़ों के अनुसार पीआरटीसी के बेड़े में इस समय तकरीबन 1100 बसें हैं। रेगुलर करने की मांग को लेकर मंगलवार से ठेका व आउटसोर्स मुलाजिमों के हड़ताल पर जाने से इन 1100 बसों में से ही सिर्फ 20 फीसदी यानी 220 बसें ही चलाई जा सकीं। बाकी 880 बसें स्टाफ के न होने के चलते प्रदेश के कई डिपुओं में खड़ी रहीं। पीआरटीसी को रोजाना एक करोड़ 80 लाख रुपये की आमदनी हो रही थी पर हड़ताल के कारण मंगलवार को कॉरपोरेशन सिर्फ 40 लाख के करीब ही कमाई कर सका। जिससे एक ही दिन में कॉरपोरेशन को बसों का पूरा फ्लीट न चल पाने कारण एक करोड़ 40 लाख का नुकसान हो गया। वहीं हड़ताल के दौरान पंजाब के किसी भी बस अड्डे में कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। नुकसान ज्यादा होने से पीआरटीसी मैनेजमेंट इस समय काफी चिंता में है।
कोरोना काल में 150 करोड़ के नुकसान की भरपाई नहीं हुई, तो अब क्या होगी
कॉरपोरेशन इस नुकसान की भरपाई के लिए पंजाब सरकार को बदले में ग्रांट के लिए लिखने के मूड में नहीं है। अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि सरकार ने कोरोना काल में हुए नुकसान के बदले में कोई ग्रांट नहीं दी, तो अब क्या देंगे। कोरोना काल में पहले लॉकडाउन व फिर पाबंदियों के चलते पीआरटीसी को 150 करोड़ का नुकसान हो गया था।
काम न करने वाले मुलाजिमों की कटेंगी सैलरी-एमडी
पीआरटीसी की मैनेजिंग डायरेक्टर परनीत शेरगिल ने कहा कि आउटसोर्स और ठेका मुलाजिमों को नोटिस निकाला जा चुका है कि वह जल्द से जल्द काम पर लौटें। अभी तक मुलाजिमों की तरफ से कोई रिस्पांस नहीं मिला है। काम न करने पर उनकी तनख्वाहें काटी जाएंगी। एमडी ने नुकसान की भरपाई के लिए सरकार को लिखने से इनकार किया।