पटियाला। पंजाब के थर्मल प्लांटों खास तौर से प्राइवेट में कोयले का स्टाक खत्म होने की कगार पर है। उधर सरकारी में रोपड़ व लहरा मुहब्बत प्लांटों के आधे यूनिट अभी भी बंद पड़े हैं। ऐसे बिजली की सप्लाई प्रभावित होने से पॉवरकॉम को बाहर से महंगे दामों पर बिजली खरीद कर मांग को पूरा करना पड़ रहा है।
प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक तलवंडी साबो थर्मल प्लांट में डेढ़ से कम दिनों का और गोइंदवाल साहिब में मात्र आधे दिन का कोयला बचा है। वहीं राजपुरा प्लांट में कोयले के स्टाक की स्थिति फिलहाल कुछ ठीक है। रोपड़ व लहरा मुहब्बत की तरह राजपुरा प्लांट में भी 12 दिनों का कोयला पड़ा है। कोयले के इस भारी संकट के बीच तलवंडी साबो व गोइंदवाल साहिब के इस समय चलाए जा रहे यूनिट भी जल्द बंद पडने की आशंका जताई जा रहा है। दोनों प्लांटों के इस समय पांच में से चार यूनिट बिजली उत्पादन कर रहे रहे हैं। सरकारी थर्मल प्लांटों रोपड और लहरा मुहब्बत के आठ में से चार यूनिट अभी भी बंद पड़े हैं। पॉवरकॉम अधिकारी इन यूनिटों के बंद पडने के पीछे तकनीकी खराबी व रिपेयर का काम चलने को बता रहे हैं।
बताया जा रहा है कि कोयले की कमी के चलते यह यूनिट बंद पड़े हैं। जिस कारण इन प्लांटों से मिलने वाली कम बिजली सप्लाई हो पा रही है। सोमवार को रोपड़ व लहरा से कुल 793 मेगावाट बिजली ही मिल सकी। इन प्लांटों की कुल क्षमता 1760 मेगावाट है। राजपुरा प्लांट से 1340 मेगावाट, तलवंडी साबो से 1559 और गोइंदवाल साहिब से 255 मेगावाट बिजली मिली। गोइंदवाल साहिब का एक यूनिट भी कोयले की कमी के चलते बंद पड़ा है। राजपुरा व तलवंडी साबो के सभी पांच यूनिट चल रहे हैं। प्राइवेट प्लांटों से पॉवरकॉम को 3154 मेगावाट बिजली की सप्लाई हुई। सोमवार को पंजाब में बिजली की मांग करीब 6500 मेगावाट दर्ज की गई, जिसे पूरा करने के लिए पॉवरकॉम को बाहर से 2200 मेगावाट के करीब बिजली खरीदनी पड़ी। बताया जा रहा है कि यह बिजली पॉवरकॉम को 8 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से मिली।