मुख्यमंत्री के तकनीकी सलाहकार मेजर जनरल वीके कुमार भट्ट ने पंजाब में प्रदूषित होते पानी के बारे में चिंता प्रकट करते हुए कहा कि सरकार ने उच्च स्तर के ट्रीटमेंट प्लांटों का निर्माण किया है, लेकिन लोगों में जागरूकता लाने की जरूरत है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कोई भी सरकारी हुक्म वातावरण संबंधी मुद्दों को हल नहीं कर सकता है, जब तक हर नागरिक इसको अपनी नैतिक जिम्मेदारी नहीं समझता है। वह पटियाला के खालसा कालेज के बायोटेक विभाग की ओर से यूजीसी स्पांर्स्ड नेशनल कांफ्रेंस को संबोधित कर रहे थे।
इस कान्फ्रेंस में छह टेक्निकल सेशनों में पंजाब, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गोवा, आंध्रप्रदेश, नई दिल्ली, यूपी और अन्य राज्यों से आए 67 विद्वानों ने अपने शोध पत्र पेश किए और विचार चर्चा की। डा. बृज मोहन गांधी ने एडवांस्ड बायोटेक्नोलॉजी के बारे में और इसके विश्व स्तर पर वातावरण व सेहत संभाल पर होने वाले प्रभावों के बारे में विस्तार में बताया।उन्होंने बायो स्वच्छ योजना नामक प्रोजेक्ट व इससे जुड़ी डीबीटी फेलोशिप के बारे में बताया।
पंजाब बायोटेक इंकुबेटर के पूर्व कार्यकारी अफसर डा. एसएस मरवाहा ने वातावरण संबंधी वैज्ञानिक शोधों और उनमें बायोटेक इंकुबेटर के योगदान के बारे में बताया। उन्होंने जैविक तरीकों के साथ वातावरण की सफाई की महत्ता बारे भी अवगत कराया।
कालेज के प्रिंसिपल डा. धरमिंदर सिंह ऊभा ने आए मेहमानों का स्वागत किया। कांफ्रेंस में थापर यूनिवर्सिटी से डा. एनएस रेड्डी, डा. दिनेश गोयल, डा. अमित दत्ता, हैदराबाद से डा. मनप्रीत सिंह, गोवा कालेज आफ फार्मेसी से डा. रघबीर, पंजाबी यूनिवर्सिटी से डा. अरुणा भाटिया, डा. नीलम वर्मा, डा. परवीन पाल बलगीर ने पर्यावरण विषय पर वैज्ञानिक खोजों के संबंधी अपने विचार पेश किए।