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पंजाब: 10वें दिन भी रेल ट्रैक पर डटे किसान, बोले- न मानी सरकार तो दशहरा-दिवाली यहीं मनाएंगे

Sun, 04 Oct 2020 12:12 PM IST
पंजाब ब्‍यूरो अमर उजाला नेटवर्क, पंजाब
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राजपुरा के नजदीक शंभू में किसानों का रेल रोको आंदोलन जारी। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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पंजाब में किसान-मजदूर 10वें दिन रेल ट्रैक पर डटे रहे। अमृतसर और फिरोजपुर में रेल ट्रैक पर धरना दे रहे किसान-मजदूरों ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर के पुतले फूंके। उन्होंने कहा कि अगर सरकार न मानी तो वे दशहरा और दीपावली भी रेल की पटरियों पर मनाएंगे। 

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इस बीच, पटियाला में राजपुरा के नजदीक गांव शंभू के रेलवे स्टेशन को तीन दिन से घेरकर बैठीं 31 किसान जत्थेबंदियों को समर्थन देने पहुंचे पंजाबी गायकों कंवल ग्रेवाल, हर्फ चीमा, जस बाजवा, हरभजन मान और रणजीत बावा ने कहा कि वे खेती-किसानी को बचाने के लिए किसी भी हद तक जाएंगे। जरूरत पड़ी तो वे अपने परिवारों के साथ रोष प्रदर्शन में शामिल होकर किसानों के संघर्ष में जोश भरेंगे। यहां भी किसानों ने मोदी सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। वहीं, भारतीय किसान यूनियन क्रांतिकारी ने धरेड़ी जटां टोल प्लाजा पर धरना देकर केंद्र सरकार के विरुद्ध प्रदर्शन किया।

पटियाला में ही गांव धबलान में भी रेलवे ट्रैक जाम किया हुआ है तो पातड़ां के न्याल में पेट्रोल पंप पर किसान धरना लगाए बैठे हैं। अमृतसर में किसान-मजदूर संघर्ष कमेटी की अगुवाई में किसानों ने सांसद श्वेत मलिक के घर के बाहर तीसरे दिन भी धरना दिया और उनसे इस काले कानून के विरुद्ध धरने में शामिल होने की अपील की। 

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फिरोजपुर में रेल पटरी पर पक्का धरना लगाकर बैठे किसान जत्थेबंदी के नेता सतनाम सिंह पन्नू, सरवन सिंह पंधेर और इंद्रजीत सिंह ने कहा कि 6 अक्तूबर को हरियाणा में किसानों की बहुत बड़ी रैली होने जा रही है। हम भी इस रैली का समर्थन कर रहे हैं। उधर, कांग्रेसियों ने विधायक सतनाम कौर गहरी की अगुवाई में सारागढ़ी गुरुद्वारे के पास से ट्रैक्टर रैली निकाली। ये रैली भाजपा के पूर्व विधायक सुखपाल सिंह नन्नू के निवास पर पहुंची और वहां पर धरना दिया। संगरूर के गांव छाजली में भी कारपोरेट घराने के एक बडे़ गोदाम के सामने भारतीय किसान यूनियन एकता (उगराहां) का आंदोलन लगातार तीसरे दिन जारी रहा। 

गुरदासपुर में भी किसान संगठनों की ओर से रेलवे स्टेशन पर तीन दिन से धरना जारी है। यहां कृषि कानूनों का विरोध करने वाले किसान संगठनों ने एक संयुक्त प्रतिनिधिमंडल बनाया है, इसमें किसान नेता सुखदेव सिंह काहलों, अजीत सिंह ठक्कर संधू, पलविंदर सिंह, अवतार सिंह संधू, लखविंदर सिंह, जागीर सिंह जैनपुर को शामिल किया गया है। 

बरनाला में भी शनिवार को किसान संगठनों ने रेलवे ट्रैक जाम किया। जबकि बटाला में भारतीय किसान यूनियन क्रांतिकारी पंजाब ने जालंधर रोड स्थित पेट्रोल पंप के आगे धरना लगाकर रोष प्रदर्शन किया। अबोहर में भी किसान संगठनों का भाजपा विधायक अरुण नारंग के निवास के बाहर अनिश्चितकालीन धरना जारी है तो रोपड़ में शिरोमणि अकाली दल (डेमोक्रेटिक) अध्यक्ष व राज्यसभा सदस्य सुखदेव सिंह ढींढसा ने कहा कि पार्टी किसानों के संघर्ष में उनका साथ देगी। अगर किसान कहेंगे तो वे सांसद पद भी छोड़ देंगे। 
 
कृषि कानूनों से अर्थव्यवस्था को होगा बड़ा नुकसान : सिद्धू 
स्वास्थ्य मंत्री बलवीर सिंह सिद्धू ने कृषि कानूनों को किसान, मजदूर और खेती विरोधी करार देते हुए कहा कि इन कानूनों के कारण देश की अर्थव्यवस्था को बड़ा नुकसान होगा। सबसे अधिक आर्थिक नुकसान खेती प्रधान राज्यों को होगा। सिद्धू शनिवार को खेती कानूनों के खिलाफ लोगों को लामबंद करने संगरूर आए थे। 

उधर, पठानकोट में लोक इंसाफ पार्टी (लिप) के प्रमुख एवं विधायक सिमरजीत सिंह बैंस ने कहा कि अकाली दल और भाजपा ने गठबंधन तोड़कर आत्महत्या की है। 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा का खाता नहीं खुलेगा और अकालियों का हाल अभय चौटाला जैसा होगा। बैंस कृषि कानूनों के खिलाफ भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अश्वनी शर्मा की कोठी का घेराव करने पहुंचे थे।  
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