पीआरटीसी के ठेका मुलाजिमों ने अपनी मांगों के प्रति मैनेजमेंट के अड़ियल रवैये से नाराज होकर बुधवार को बसों का पहिया जाम कर दिया। ठेका मुलाजिमों (ड्राइवर व कंडक्टर) ने हड़ताल कर बस स्टैंड पर रैली की।
हड़ताल के कारण बड़ी संख्या में रूट प्रभावित होने से कारपोरेशन को 40 लाख का नुकसान हुआ है। पीआरटीसी वर्कर्स यूनियन आजाद के बैनर तले करीब 2000 ठेका मुलाजिमों की यह हड़ताल वीरवार को भी चलेगी।
बुधवार को हड़ताल के पहले दिन ठेका मुलाजिमों ने पेंशनरों के साथ मिलकर बस स्टैंड पर रोष रैली की। यूनियन के बब्बू शर्मा ने कहा कि मैनेजमेंट की ओर से पीआरटीसी को खत्म करने के लिए लगातार साजिशें की जा रही हैं। बड़ी संख्या में रूटों के परमिट ट्रांसपोर्ट महकमे के पास सरेंडर किए जा रहे हैं।
किमी स्कीम के तहत बसें किराए पर लेकर डाली जा रही हैं। यूनियन नेताओं परविंदर, जानपाल, गुरध्यान ने कहा कि ठेकेदारी सिस्टम का पूरी तरह खात्मा कर सारे कच्चे मुलाजिम रेगुलर किए जाएं। किमी स्कीम के तहत नई बसें किराए पर लेनी बंद की जाएं। मैनेजमेंट की ओर से अपनी बसें डाली जाएं।
पीआरटीसी के परमिट जमा कराने बंद किए जाएं। साथ ही रेगुलर व ठेका मुलाजिमों को तनख्वाहें और पेंशनरों को उनकी पेंशन दस तारीख से पहले दी जाए। पीआरटीसी के जनरल मैनेजर (आपरेशन) प्रदीप सचदेवा ने माना कि ठेका मुलाजिमों की हड़ताल से बड़ी संख्या में रूट प्रभावित हुए हैं।
बसें रूटों पर नहीं जा सकीं। इससे कारपोरेशन को करीब 40 लाख का नुकसान हुआ है। बसों से आमदनी वैसे ही कम हो रही है। हड़ताल से और नुकसान हो गया। ज्यादा नुकसान संगरूर, बरनाला, बुढलाडा डिपो का हुआ है क्योंकि ठेका मुलाजिमों की संख्या इन डिपों पर ज्यादा है।