यही हालात रहे तो आने वालेे सालों में पांच दरियाओं की धरती पंजाब में पानी ढूंढे नहीं मिलेगा। इसके लिए प्रदेश का हर व्यक्ति जिम्मेदार होगा। प्रदेश में हर साल भूजल स्तर 23 सेमी घट रहा है। गैर सरकारी संगठनों की मानें तो ये गिरावट 50 सेमी तक है।
सॉयल एवं वाटर कंजर्वेशन विभाग के अनुसार जोन तीन में पानी का तेजी से दोहन हो रहा है। इसमें अमृतसर, कपूरथला, जालंधर, लुधियाना, पटियाला, नवांशहर, संगरूर के कुछ हिस्से और होशियारपुर, रोपड़, गुरदासपुर शामिल हैं।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में 14.54 मिलियन एकड़ फीट (एमएएफ) पानी उपलब्ध है। उपभोग 39 एमएएफ तक हो रहा है। पंजाब के 138 ब्लॉकों में से 93 ब्लॉक डार्क जोन घोषित हो चुके हैं।
पिछले 40 साल में पंजाब में पानी के सबसे बड़े स्रोत बारिश ने भी मुंह मोड़ लिया। भाखड़ा ब्याज मैनेजमेंट बोर्ड के आंकड़े भी बताते हैं कि राज्य में पानी की लगातार कमी होने से बिजली उत्पादन प्रभावित हो रहा है। वही राज्य में ट्यूबवेलों की संख्या में लगातार बढ़ रही है।
धान की फसल की अधिकता भी भूजल स्तर के लिए घातक साबित हो रही है। प्रदेश में मौजूदा समय में 27 लाख हेक्टेयर जमीन पर धान की फसल की रोपाई हो रही है। खेती विरासत संगठन के डायरेक्टर सुरिंदर सिंह ने बताया कि पानी के गिरते स्तर के चलते पानी की गुणवत्ता भी बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
मुख्य खेतीबाड़ी अफसर इंद्रपाल सिंह सोहल ने बताया कि पटियाला जिले के कई गांव तो ऐसे हैं जहां पर पानी का स्तर 40 मीटर तक नीचे चला गया है। जिसमें पातड़ां और सनौर शामिल हैं। पटियाला डार्क जोन में आ रहा है।