पटियाला के अर्बन फारेस्ट पार्क में चेकिंग करती विजिलेंस ब्यूरो की टीम।
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जिले में वन एवं जंगली जीव सुरक्षा विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों की ओर से मिलीभगत करके सरकार को लाखों रुपये का चूना लगाने का मामला सामने आया है। विजिलेंस ब्यूरो ने गुप्त सूचना के आधार पर मंगलवार को नाभा रोड पर थापर यूनिवर्सिटी के पास अर्बन फारेस्ट पार्क में अचानक चेकिंग की। इस दौरान सामने आया कि वन विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों ने बिना मंजूरी के पार्क में पांच से सात फुट तक मिट्टी खोदकर इसे बेच दिया। यह पार्क करीब पांच से आठ एकड़ तक फैला है।
डीएसपी विजिलेंस जसवंत सिंह ने बताया कि उन्होंने अपनी टीम के साथ जब पार्क में अचानक चेकिंग की तो पाया कि वन विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों ने मिलकर माइनिंग विभाग से मंजूरी लिए बगैर नाभा रोड स्थित अर्बन फारेस्ट पार्क से करीब 35 लाख रुपये की मिट्टी खोदकर इसे आगे बेच दिया। इससे इस जंगलनुमा पार्क का जमीनी स्तर काफी नीचा हो गया।
यहीं नहीं विभाग के अधिकारियों ने पार्क में पेड़-पौधों को पानी देने के लिए भाखड़ा मेन लाइन से आ रहे एक रजवाहे के साथ-साथ लगे खजूर के 50 पेड़ भी मैरिज पैलेस वालों को बेच दिए। एक खजूर की मार्केट कीमत 1500 रुपये से 3500 रुपये तक है। विजिलेंस ब्यूरो ने विभाग से इस सारे घोटाले संबंधी रिकार्ड को कब्जे में ले लिया है। फिलहाल मामले में कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।
डीएसपी ने बताया कि मामले में जांच जारी है। जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ केस दर्ज करके बनती कार्रवाई की जाएगी। चेकिंग करने गई टीम में माइनिंग विभाग से इंस्पेक्टर धर्मवीर सिंह, दो सरकारी गवाह जूपिंदर सिंह खेतीबाड़ी अफसर ब्लाक घन्नौर, जपिंदर सिंह खेतीबाड़ी अफसर ब्लाक नाभा, अमरीक सिंह फॉरेस्ट अफसर, रविंदर सिंह जंगलात कर्मचारी, विजय शारदा शामिल थे।