फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Patiala News: आंदोलनरत किसान जत्थेबंदियों ने केंद्र के फैसले को सिरे से किया रद्द

विज्ञापन
विज्ञापन
कहा, पांच फसलों पर नहीं, मांग के मुताबिक 23 फसलों पर मिले एमएसपी की कानूनी गारंटी
विज्ञापन

सात लाख किसान कर चुके हैं आत्महत्याएं, फिर भी केंद्र एमएसपी न देकर अपनी जिम्मेदारी से भाग रहा : डल्लेवाल
अमर उजाला ब्यूरो
पटियाला। शंभू व खन्नौरी बाॅर्डरों पर आंदोलनरत संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक) और भारतीय किसान मजदूर संघर्ष कमेटी ने केंद्र सरकार की ओर से पांच फसलों कपास, मक्का के अलावा अरहर, मसूर व उड़द की दालों पर पांच सालों के लिए एमएसपी की कानूनी गारंटी देने के फैसले को सिरे से रद्द कर दिया है।
किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा है कि केंद्र सरकार का फैसला किसान संगठनों को मंजूर नहीं है। संगठनों की मांग के मुताबिक केंद्र की ओर से 23 फसलों पर एमएसपी की कानूनी गारंटी दी जाए। डल्लेवाल ने कहा कि सात लाख के करीब किसान आत्महत्याएं कर चुके हैं, फिर भी केंद्र सरकार केवल पांच फसलों पर पांच सालों के लिए एमएसपी की कानूनी गारंटी देकर अपनी जिम्मेदारी से भाग रही है। डल्लेवाल ने कहा कि सरकार कहती है कि इससे खजाने पर अतिरिक्त बोझ पड़ जाएगा, लेकिन यहां एक बड़ी बात यह है कि केंद्र 1 लाख 38 हजार करोड़ का पाम ऑयल बाहर से मंगवा सकती है, पर किसानों को फसलों पर एमएसपी देने पर पौने दो लाख करोड़ रुपये खर्च नहीं कर सकती। जबकि पाम ऑयल एक तरह का जहर है, जो मानव सेहत के लिए बहुत खतरनाक है। ऐसे में लोगों को भी किसानों के साथ इस मामले में आगे आकर केंद्र सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद करनी चाहिए, क्योंकि जानकारी के मुताबिक सरकार इस साल पाम ऑयल के आयात में 29 फीसदी का इजाफा करने जा रही है। यही नहीं दालें भी बाहर से मंगवाई जा रही हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

इस मौके पर डल्लेवाल ने बताया कि रेल रोको आंदोलन के लिए पूरी तैयारियां हो चुकी हैं। पंजाब के सभी जिलों में कई जगहों पर रेलें रोकी जानी हैं। किसानों के समर्थन में ट्रक यूनियन भी आगे आया है। पंजाब के अलावा देश के अन्य कई राज्यों में किसानों की ओर से रविवार को रेलें रोकी जाएंगी। उन्होंने केंद्र से किसानों की सभी जायज मांगों को जल्द पूरा करने की मांग की, जिसमें खास तौर से एमएसपी की कानूनी गारंटी समेत कर्जा मुक्ति व भूमि अधिग्रहण कानून को लागू करने की मांग की। डल्लेवाल ने कहा कि केंद्र ने चार दौर की बैठकों में किसानों की इन मांगों को पूरा नहीं किया। इसके चलते मजबूरीवश किसानों को संघर्ष का रास्ता अपनाना पड़ रहा है। उन्होंने साफ किया कि जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी, आंदोलन जारी रहेगा, फिर चाहे इसमें कितना ही लंबा समय क्यों न लग जाए।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें