1972 में म्यूनिख ओलंपिक में देश को कांस्य पदक जिताने वाले ओलंपियन वरिंदर सिंह का मंगलवार सुबह स्वर्गवास हो गया, जिससे हॉकी प्रेमियों में शोक की लहर दौड़ गई है। पंजाब के जालंधर जिले के धन्नोवाली गांव में रहने वाले ओलंपियन वरिंदर सिंह पिछले एक सप्ताह से बीमार चल रहे थे। उन्हें निजी अस्पताल में दाखिल करवाया गया था।
सुरजीत हॉकी सोसाइटी के महासचिव इकबाल सिंह संधू, सुरिंदर सिंह भापा व पद्मश्री परगट सिंह ने ओलंपियन वरिंदर सिंह के स्वर्गवास पर गहरा दुख प्रकट किया है। 75 वर्षीय वरिंदर सिंह अभी भी खिलाड़ियों को हॉकी के गुर सिखा रहे थे। इन दिनों लायलपुर खालसा कॉलेज फॉर वुमेन की हॉकी टीम व राउंड ग्लास हॉकी अकादमी के सीनियर कोच के रूप में सक्रिय थे।
सुरजीत हॉकी के राणा टुट ने बताया कि वरिंदर सिंह फील्ड हॉकी खिलाड़ी के रूप से जाने जाते थे। सन 2008 में पंजाब खेल विभाग में बतौर कोच भी तैनात रहे। वरिंदर सिंह का अंतिम संस्कार धन्नोवाली के श्मशान घाट में किया गया, जहां पर कई हॉकी प्रेमी व खिलाड़ी शरीक हुए।
ध्यानचंद पुरस्कार विजेता वरिंदर का जन्म 16 मई 1947 को हुआ था। 70 के दशक में भारत की कई यादगार जीत का हिस्सा रहे वरिंदर 75 साल के थे। म्यूनिख में 1972 में हुए ओलंपिक खेलों में भारत की हॉकी टीम ने कांस्य पदक जीता था। वरिंदर इस टीम में फॉरवर्ड के तौर पर खेले थे। उन्होंने भारतीय टीम को पदक तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई थी।
इसके बाद वरिंदर 1975 में कुआलालंपुर में पुरुष हॉकी विश्व कप में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा थे। इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में भारत का अब तक का एकमात्र स्वर्ण पदक है। भारत ने तब फाइनल में पाकिस्तान को 2-1 से हराया था। वरिंदर की मौजूदगी वाली टीम ने 1974 और 1978 एशियाई खेलों में भी रजत पदक जीता था।