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जहां नहीं पहुंच पाए ऑनलाइन गुरु, अब वहां कैसे पहुंचेंगे नेता

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नयागांव। चंडीगढ़ के साथ सटे पंजाब के सबसे बड़े विधानसभा हलका खरड़ के कई गांव ऐसे हैै, जहां कोरोना काल में बच्चों को पढ़ाने के लिए ऑनलाइन गुरु यानि (ऑनलाइन क्लास) तक नहीं पहुंच पाए। वहां इस बार विधानसभा चुुनाव में नेता वर्चुअल तरीके से कैसे पहुंचेंगे। यह सवाल इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। इसकी वजह है कि उक्त इलाकों में मोबाइल नेटवर्क न के बराबर है। जैसे ही यह लोग अपने घरों में आते हैं तो वर्चुअल तरीके से पूरी दुनिया से कट जाते हैं। इलाके के लोगों का कहना है कि अगर समय पर इस समस्या का हल किया होता तो अब यह दिक्कत नेताओं को न आती।
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14 फरवरी को पंजाब में विधानसभा चुनाव होने हैं और साथ ही पूरे देश मे ओमिक्रॉन का खतरा बढ़ता जा रहा है। इस कारण निर्वाचन आयोग की ओर से चुनाव प्रचार पर कुछ पाबंदियां लगाई गई हैं। नेता कोई बड़ी जनसभा नहीं कर सकते। जबकि यह हलका खरड़ के गांव पहाड़ी एरिया में है। यहां पर लोगों के घर नजदीक-नजदीक होने के बजाय दूर-दूर हैं। अगर नेता जी एक दिन में इस इलाके में डोर-टू-डोर प्रचार के लिए चले जाएं तो करीब 50 घरों में ही जा पाएंगे। ऐसे में नेताओं के पास ऑनलाइन ही प्रचार करने का विकल्प है। नेता ऑनलाइन मीटिंग, व्हाट्सएप ग्रुप और अन्य सोशल मीडिया के जरिए जनता तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।
जबकि ग्रामीणों का कहना है कि इन नेताओं ने हमारे गांवों में विकास कार्यों पर कोई ध्यान ही नहीं दिया। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान एक बार सभा करने के बाद नेता दोबारा पांच साल तक उनके गांव में नहीं दिखते। पांच साल बाद चुनाव आते ही नेता प्रकट हो जाते हैं। पिछले दो साल से कोरोना महामारी के कारण बच्चों की पढ़ाई बर्बाद हो गई है। गांव में मोबाइल नेटवर्क नहीं आने के कारण बच्चे पढ़ नहीं पा रहे हैं। अब नेताओं को हमारी परेशानियों का पता चलेगा।
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किसी भी कंपनी का नहीं नेटवर्क
हमारे गांव में किसी भी कंपनी का मोबाइल नेटवर्क नहीं है। गांव में आने के बाद हम पूरी दुनिया से कट जाते हैं। कभी आपातकालीन स्थिति में भी हम हमारे किसी रिश्तेदार से मोबाइल पर बात नहीं कर सकते। - संदीप कौर, निवासी गांव मसोल।
बिना नेटवर्क के प्रभावित हुई बच्चों की पढ़ाई
पिछले दो साल से कोरोना के कारण ऑनलाइन पढ़ाई चल रही है। लेकिन गांव में मोबाइल नेटवर्क न होने के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। कुछ को तो शहर में जानकारों के यहां जाना पड़ता है। -शिंदर सिंह, निवासी मिर्जापुर।
नेताओं को पहले सोचना चाहिए था
जब हमारे बच्चे ऑनलाइन नहीं पढ़ पाए तो, अब नेता हमें किस तरह से ऑनलाइन भाषण दे पाएंगे। यह नेताओं को उस समय सोचना चाहिए था, जिस समय हमारे बच्चों की पढ़ाई बर्बाद हो रही थी। -गंगा सिंह, निवासी गांव मिर्जापुर।
कोई नेता लगवाए मोबाइल टावर तो हो भला
अगर कोई नेता अपने चुनाव प्रचार के लिए हमारे गांव में कोई मोबाइल टावर लगवा दे तो इससे हमारे गांव का भी भला हो जाएगा। लोगों को कम से कम अपनी किसी मजबूरी के समय रिश्तेदार से बात करने के लिए मोबाइल नेटवर्क तो मिल जाएगा। -कश्मीर सिंह, निवासी गांव भंगिंडी।
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