मोहाली। वीआईपी शहर में नगर निगम के अधीन आने वाले इलाकों में अब पीने वाले पानी की दिक्कत नहीं आएगी। इतना ही नहीं कई एरिया में बनी लो प्रेशर की दिक्कत भी दूर हो जाएगी। क्योंकि कजौली वाटर वर्क्स के नए फेज से बीस एमजीडी पानी शहर पहुंच गया। अब उक्त पानी को विभिन्न फेजों में पहुंचाया जा रहा है। इस पक्रिया के होने से जहां ट्यूबवेलों पर निर्भरता पूरी तरह से खत्म हो जाएगी। साथ ही गिरता हुआ जल स्तर पर भी रुकेगा।
जानकारी के मुुताबिक कजौली वाटर वर्क्स मोरिंडा जिले में स्थित है। वहीं से चंडीगढ़, मोहाली और चंडीमंदिर को पानी मुुहैया करवाया जाता है। कजौली वाटर वर्क्स के पहले दो फेज से 35 एमजीडी पानी का अतिरिक्त हिस्सा मिलना शुरू हो गया है, लेकिन मोहाली को अपने हिस्से का पानी नहीं मिल पा रहा था। इसके पीछे की वजह यह थी कि सिंहपुरा में बनाए जा रहे वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का काम अधर में था। पहले इस प्रोजेक्ट को पूरा करने का की समय अवधि दिसंबर 2020 तय की गई थी, लेकिन कोविड की वजह से इस प्रोजेक्ट की समय अवधि जुलाई 2021 कर दी गई थी। लेकिन अब इस प्रोजेक्ट का सारा काम पूूरा हो गया।
अब सिटी के अंदर पानी पहुंच गया। वहीं, अब नए कनेक्शन को जोड़ने की दिशा में काम शुरू हो गया है। यह काम चार और पांच मार्च को पूरा किया जाएगा। ऐसे में सेक्टर-70, 71 और गांव मटौर की सप्लाई प्रभावित होगी। 5 मार्च को इन इलाकों में कम प्रेशर से पानी की सप्लाई होगी। जबकि छह बजे सुबह कम प्रेशर, दोपहर में पानी की सप्लाई बंद और शाम को लो प्रेशर से पानी की सप्लाई होगी। जल सप्लाई और सेनिटेशन विभाग के कार्यकारी इंजीनियर सुनील कुमार ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने लोगों से सहयोग की अपील की है। उन्होंने कहा कि इलाके के लोगों को इससे काफी फायदा होगा। उन्होंने बताया कि कई एरिया में पहले ही नहरी पानी की सप्लाई चल रही है।
पहले इस तरह सप्लाई होता था पानी
पिछले कई साल से मोहाली शहर में पानी की किल्लत चली रही है। गर्मियों में तो मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर 12 एमजीडी तक बढ़ जाता है। वर्तमान में, 32 एमजीडी की मांग के मुकाबले इलाके को कजौली वाटर वर्क्स के पुराने चरणों से 10 एमजीडी पानी और 75 ट्यूबवेल से 10 एमजीडी पानी मिलता है। मई 2012 में गमाडा ने 200 करोड़ रुपये की लागत से कजौली वाटर वर्क्स से मोहाली और चंडीगढ़ को अतिरिक्त पानी की आपूर्ति के लिए पाइपलाइन बिछाना शुरू किया था। इसमें से आधा खर्च चंडीगढ़ ने वहन किया था। परियोजना के तहत आपूर्ति किया जाने वाला 20 एमजीडी अतिरिक्त पानी खरड़ और मोरिंडा की जरूरतों को भी पूरा करेगा।