छतबीड़ चिड़ियाघर में अपनी परिवार के साथ शुतुरमुर्ग। संवाद
जीरकपुर। छतबीड़ चिड़ियाघर में पर्यटकों को अब अधिक रोमांच का अनुभव होगा। टफेंड ग्लास के पौंड में मगरमच्छ, कछुआ जैसे जलचर और उभयचर पर्यटकों को अधिक लुभाएंगे। पर्यटक जहां मगरमच्छ से आंखें मिला सकेंगे वहीं कछुए की अठखेलियों का भी आनंद ले सकेंगे। प्रबंधन चिड़ियाघर में कई बदलाव कर रहा है। पर्यटकों की सुविधा के लिए प्रबंधन चिड़ियाघर में टफेंड ग्लास की योजना पर काम कर रहा है।
चिड़ियाघर में पानी और जमीन पर चलने वाले उभयचरों के लिए विशेष किस्म का पौंड बनाया जा रहा है। इससे पर्यटक इन जीवों को अपने आसपास महसूस कर सकेंगे। अभी मगरमच्छ और कछुआ देखने के लिए पर्यटकों को काफी मशक्कत करनी पड़ती है। कई बार लोगों को मगरमच्छ नजर ही नहीं आता है, इससे बिना मगरमच्छ देखे ही लोगों को लौटना पड़ता है। इस पौंड के बनने से जीव और पर्यटक खूब मस्ती कर सकेंगे। एक तरफ मजबूत शीशा लगाया जा रहा है। उसके साथ ही बड़ा तालाब भी बनाया जा रहा है। शीशे के बाहर से पूरा का पूरा पौंड नजर आता है। ऐसे में अगर मगरमच्छ पानी के अंदर हो या बाहर दोनों स्थिति में साफ नजर आएगा। कछुए का आकार छोटा होने की वजह से वह नजर नहीं आता था, लेकिन अब शीशा लगने से कछुए की सारी गतिविधि नजर आएगी।
शुतुरमुर्ग का परिवार बड़ा, बच्चे पैदा हुए चार
छतबीड़ चिड़ियाघर में शुतुरमुर्ग के परिवार में बढ़ोतरी हुई है। शुतुरमुर्ग के शुक्रवार को अंडों से चार बच्चे निकले हैं। उनको देखने के लिए बाड़े के पास लोगों की भीड़ लगी रही। इन नए मेहमानों के आने से चिड़ियाघर में खुशी का माहौल नजर आया।
हम मगरमच्छ जैसे खतरनाक और कछुआ जैसे छोटे जानवरों के लिए जो पानी और धरती दोनों पर रहते हैं, उनके लिए विशेष प्रकार का तालाब बना रहे हैं। इसमें शीशे में अंदर तक दिखेगा और लोग ऐसे जानवरों की गतिविधियों को करीब से देख सकेंगे। - हरपाल सिंह, वन्य जीव शिक्षा अधिकारी, छतबीड़ चिड़ियाघर।