गांव मिर्जापुर में अंग्रेजों के जमाने में बना विश्राम गृह किसी पांच सितार होटल से कम नहीं है। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रताप सिंह कैरों से लेकर पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह यहां एक रुपये किराया देकर ठहर चुके हैं। पंजाब सरकार अब इसे नए सिरे से संवार रही है। हालांकि यह आम जनता के लिए उपलब्ध नहीं है।
देश आजाद होने के बाद से इसकी कमान पंजाब सरकार के पास है। पंजाब का विभाजन होने से पहले अंबाला जिला अधिकारी द्वारा इसका रखरखाव किया जाता था। पंजाब के विभाजन के बाद यह हिस्सा मोहाली जिले में आ गया था। इसलिए अब इसका रखरखाव वन विभाग करता है। सरकार का कोई भी अधिकारी इलाके में जाता है और अचानक मौसम खराब हो जाए तो वह वहां पर रुक सकता है। विश्राम गृह में दो बेडरूम, एक डाइनिंग रूम एवं एक मीटिंग रूम बना है। चारों तरफ से शिवालिक की पहाड़ियों से घिरा है।
108 साल पुराने विश्राम गृह में भले ही आम जनता को जाने की अनुमति नहीं है लेकिन लोग यहां दिन में आकर प्रकृति का आनंद ले सकते हैं। फोटोग्राफी, वीडियो शूट के लिए आ सकते हैं। इसके लिए कोई शुल्क भी नहीं है। इस इलाके में कई पंजाबी फिल्मों और गानों की शूटिंग हुई है। वन विभाग से अनुमति लेकर काफी संख्या में लोग यहां प्री वेडिंग शूट के लिए भी आते हैं। लोगों का कहना है कि यहां की लोकेशन श्रीलंका जैसी है। यहां पहुंचने के लिए पहले चंडीगढ़ से सिसवां टी प्वाइंट पर जाना होगा। इसके बाद सुखविला रिजॉर्ट वाली सड़क से गांव मिर्जापुर जाना होगा। यह चंडीगढ़ से मात्र 20 किलोमीटर की दूरी पर है। इसके बाद लोग सिसवां नेचर अवेयरनेस पार्क में आ सकते हैं।
हमारे बुजुर्गों ने जमीन दी थी, तब यह विश्राम गृह बना था। अंग्रेजों के जमाने में अधिकारी यहां रुकते थे। अब जंगल एवं नहर की देखरेख करने वाले अधिकारी अक्सर यहां ठहरते हैं। दो-तीन साल पहले मरम्मत कर सुसज्जित किया गया है। यहां पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व राष्ट्रपति भी रुक चुके हैं। यह चीज हमारे लिए बडे़ गर्व की बात है। दिलाराम, सदस्य जंगल कमेटी, गांव मिर्जापुर
यह विश्राम गृह पंजाब सरकार के अधीन है। इसकी देखरेख का काम फॉरेस्ट विभाग द्वारा किया जा रहा है। सरकार का कोई भी अधिकारी आपातकाल में यहां पर रुक सकता है। -अमित चौहान, जिला वन अधिकारी, मोहाली