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Mohali News: एसआईटी की रिपोर्ट में एक और मामले में पूर्व डीजीपी सुमेध सैनी को क्लीन चिट, अदालत में सौंपी गई जांच रिपोर्ट

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मोहाली। कॉलोनी काटने के नाम पर पंजाब सरकार को करोड़ों रुपये का चूना लगाने के मामले में गठित विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) सुमेध सैनी को एक और केस में बेगुनाह करार दिया है। एसआईटी ने अपनी क्लीन चिट रिपोर्ट अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में सौंप दी है। इसके साथ ही पंजाब सरकार ने नगर निगम पटियाला के सेवानिवृत्त अधिकारी शक्ति सागर भाटिया के खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति देने की जानकारी भी अदालत को दी है। यह मामला कॉलोनी विकसित करने के लिए खरीदी गई जमीन की कंपोजीशन फीस और अन्य सरकारी शुल्क जमा न करवाकर सरकार को भारी वित्तीय नुकसान पहुंचाने से जुड़ा है।
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इस केस में पहले से ही कई आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चल रहा है। इनमें कंपनी डायरेक्टर देविंदर सिंह संधू, पीसीएस सेवानिवृत्त अधिकारी अशोक कुमार सिक्का, शक्ति सागर भाटिया, सुरिंदरजीत सिंह जसपाल, निमरतदीप सिंह, मोहित पुरी और तरनजीत सिंह बावा शामिल हैं। अब शक्ति सागर भाटिया के खिलाफ भी इसी मुकदमे के साथ सुनवाई शुरू होगी। विजिलेंस ब्यूरो के अनुसार कुराली-सिसवां रोड पर स्थित 17.5 एकड़ और ड्रीम मीडोज-2 की 9 एकड़ जमीन पर कॉलोनी काटी गई। आरोप है कि कॉलोनियों के नक्शे पास कराकर प्लॉटों की रजिस्ट्रियां कर दी गईं, जबकि कई प्लॉट वास्तव में अस्तित्व में ही नहीं थे और कुछ बरसाती पानी के कारण नदी में बह गए थे।
नियमों के अनुसार कॉलोनी मालिकों से 3 करोड़ 45 लाख 71 हजार 825 रुपये कंपोजीशन फीस और 25 प्रतिशत पेनल्टी के साथ कुल राशि वसूल की जानी थी, लेकिन आरोप है कि तत्कालीन अधिकारी अशोक कुमार सिक्का ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए सिर्फ दो प्रतिशत फीस जमा करवाई, जिससे सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ। इसके अलावा रजिस्ट्रियों के दौरान जमीन को चाही और बरानी दर्शाकर कम स्टांप ड्यूटी अदा की गई। जमीन की वास्तविक खरीद-फरोख्त राशि 8 करोड़ 17 लाख रुपये से अधिक थी। बाद में इसी अतिरिक्त राशि का उपयोग सेक्टर-20 चंडीगढ़ स्थित कोठी नंबर 3048 की खरीद में किया गया। इसी आधार पर पूर्व डीजीपी सुमेध सैनी को भी नामजद किया गया था, लेकिन अब एसआईटी ने उन्हें इस मामले में बेदाग करार दिया है।
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