मोहाली। जंगलात विभाग में फैले भ्रष्टाचार के मामले में एक बड़ा मोड़ आया है। विजिलेंस ने पूर्व वनमंत्री संगत सिंह गिलजियां को प्रारंभिक जांच में निर्दोष करार देकर अपनी रिपोर्ट अदालत में जमा कर दी है। विजिलेंस का कहना है कि जांच के दौरान गिलजियां की किसी भी प्रकार की सीधी भूमिका सामने नहीं आई। उनके भतीजे दलजीत सिंह गिलजियां और अन्य आरोपियों के खिलाफ केस पहले की तरह जारी रहेगा।
जानकारी के अनुसार, जब पूर्व मंत्री ने दर्ज एफआईआर को रद्द करवाने के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, तब विजिलेंस और सरकारी पक्ष ने अदालत को बताया कि उन्हें क्लीन चिट दी जा चुकी है। उधर, दलजीत सिंह गिलजियां समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट पहले ही अदालत में दायर की जा चुकी है। मोहाली की अदालत में केस इस समय विचाराधीन है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि भले ही विजिलेंस ने संगत सिंह गिलजियां को प्रारंभिक जांच में निर्दोष बताकर ‘खाना नंबर-2’ में रख दिया है, लेकिन अगर ट्रायल के दौरान उनके खिलाफ कोई नया सबूत सामने आता है, तो अदालत उन्हें फिर से बतौर आरोपी तलब कर सकती है।
डीएफओ की कोठी से मिले थे नए तैयार हो रहे ट्री-गार्ड
सूत्रों के मुताबिक, विजिलेंस की टीम ने बठिंडा स्थित एक डीएफओ की कोठी पर छापे के दाैरान बड़ी मात्रा में नए बने सीमेंट और बांस के ट्री-गार्ड बरामद किए। इन ट्री-गार्डों को पुराने रिकॉर्ड में खरीदा हुआ दिखाने की कोशिश की जा रही थी। छापे में लगभग 854 सीमेंट के और करीब 500 बांस के ट्री-गार्ड बरामद हुए, जिन्हें कब्जे में लेकर जांच आगे बढ़ाई गई कि ये किसके आदेश पर तैयार किए जा रहे थे और किन अधिकारियों या कर्मचारियों की इसमें भूमिका रही।
विजिलेंस सूत्रों का दावा है कि गिरफ्तार प्राइवेट व्यक्ति बिंदर सिंह से पूछताछ में बड़ा खुलासा हुआ। उसने बताया कि बिना किसी वास्तविक खरीद-फरोख्त के 1400 रुपये वाले ट्री-गार्ड को कागजों में 2400 रुपये में खरीदा दिखाया और इसी तरीके से विभाग से लाखों रुपये हासिल किए। बाद में कमीशन काटकर उसने करीब 10 लाख रुपये दलजीत सिंह गिलजियां और एक व्यक्ति को लौटा दिए। यह रकम दो किस्तों में मोहाली और डबवाली में दी गई। जांच में यह भी सामने आया कि इन ट्री-गार्डों के फर्जी बिल भी तैयार किए गए थे।