आरोपी बीसीए फाइनल का स्टूडेंट, इंग्लिश बोलने में माहिर, ठगी के अलग-अलग तरीके करता था इस्तेमाल
यू-ट्यूब पर पुराने सिक्के खरीदने, बेचने के नाम पर फंसाता था लोगों को
संवाद न्यूज एजेंसी
मोहाली। स्पेशल सेल व क्रिमिनल इंटेलिजेंस की टीम ने वीआईपी व आईपीएस अफसर का फर्जी फेसबुक अकाउंट बनाकर साइबर ठगी मारने वाले एक शातिर को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान 23 वर्षीय मोहम्मद कैफ उर्फ कैफ निवासी चिन्नावडा थाना गोपालगढ़ जिला डींग राजस्थान के रूप में हुई है।
आरोपी ने एसएसपी मोहाली डॉ. संदीप गर्ग, लुधियाना के कमिश्नर रह चुके मंदीप सिद्धू , डीआईजी जालंधर स्वप्न शर्मा के नाम से फर्जी फेसबुक आईडी बनाई थी। इस तरह वह कई सीनियर अफसरों व वीवीआईपी अधिकारियों की फेसबुक आईडी से फोटो सहित अन्य जानकारी कॉपी कर मिलता जुलता फर्जी फेसबुक अकाउंट बनाता और भोले भाले लोगों से यह कहकर ठगी करता कि उसकी या उसके दोस्तों की बदली एक जिले से दूसरी जगह हो गई है, वह घर का फर्नीचर व अन्य कीमती सामान सस्ते दाम पर बेचना चाहता है। लोग सस्ते सामान के लालच में आकर फंस जाते थे। जिसे वह कोरियर डिलीवरी चार्ज के नाम पर एडवांस में अपने फर्जी अकाउंट में पैसे ट्रांसफर करवाकर उन्हें ठगी का शिकार बनाता था।
पूछताछ में यह बात सामने आई है कि आरोपी बीसीए फाइनल का स्टूडेंट है और फर्राटा इंग्लिश बोलता है। वह बोले भाले लोगों के साथ इंग्लिश में बात करके उन्हें झांसे में लेता था। आरोपी कैफ के खिलाफ थाना मटौर थाने में आईपीसी की धारा 420, 120बी व आईटी एक्ट की धारा- 66 के तहत मामला दर्ज किया गया है। अब तक की जांच में 30 से 35 ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जिन्हें वह आईपीएस अधिकारियों के फर्जी अकाउंट बनाकर ठग चुका है। पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है। आशंका है कि आंकड़ा 100 से अधिक जा सकता है।
ठगी के अलग-अलग तरीके करता था इस्तेमाल
आरोपी मोहम्मद कैफ अलग-अलग मोबाइल नंबरों से पंजाब-हरियाणा दिल्ली सहित अन्य राज्यों में अलग-अलग मोबाइल नंबरों से कॉल करके अंग्रेजी में बातचीत करता और कम ब्याज पर लोन देने के बारे में पूरा प्रोसेस बताता। लोगों को अपने झांसे में लेकर वह लोन को प्रक्रिया या उसे पास करने के लिए पांच हजार से 10 हजार तक की रकम फेक बैंक अकाउंट में ट्रांसफर करवा लेता था।
ठगी का दूसरा तरीका फेसबुक पर फेक विज्ञापन
आरोपी कैफ अपने गांव के जंगलों में बैठकर अपने मोबाइल फोन से फेसबुक आईडी बनाता था, फिर फेसबुक आईडी पर मार्केट प्लेस पर बेचने वाले सामान जैसे मोटरसाइकिल, फर्नीचर इत्यादि का विज्ञापन डाल देता था। जब कोई व्यक्ति सामान खरीदने संबंधी उसे मैसेज करता था तो वह लोगों को अपना नंबर भेज देता था। वह इंटरनेट से कोई भी डिवाइस, वीआईपी व आईपीएस अफसर का आईडी कार्ड डाउनलोड करके भोले भाले लोगों को भेजकर उनसे एक अफसर बनकर बात करता। लोगों को झांसे में लेकर सामान डिलीवर करने के लिए जो पेमेंट बनती वह लोगों से अपने फेक अकाउंट में ट्रांसफर करवा लेता।
यू-ट्यूब पर पुराने सिक्के खरीदने-बेचने का देता था झांसा
आरोपी अपने मोबाइल फोन पर इंटरनेट के माध्यम से पुराने सिक्कों की एक वीडियो डाउनलोड कर अपने एक यू-ट्यूब चैनल पर अपलोड कर देता था। वीडियो को एडवरटाइजमेंट के जरिये बूस्ट कर देता। जिसके बाद जो भी व्यक्ति पुराने सिक्के खरीदने के लिए दिए गए मोबाइल नंबर पर बात करता तो उनसे पुराने सिक्के की अमाउंट के हिसाब के साथ 10 फीसदी एडवांस टोकन मनी ले लेता था। यह राशि भी वह अपने फेक अकाउंट में ट्रांसफर करवाता था।
ओएलएक्स पर फेक विज्ञापन डालता था
आरोपी ने ओएलएक्स पर अपनी फेक आईडी बनाई थी। वह ओएलएक्स पर मोटरसाइकिल, फर्नीचर सहित अन्य महंगी गाड़ियों का विज्ञापन डाल देता था फिर जो भी व्यक्ति सामान खरीदने संबंधी उसे मैसेज करता है तो लोगों को अपना नंबर भेज देता था। वह अपनी आईडी पर ऐसे ही किसी आईपीएस अधिकारी की डीपी लगाकर उनसे बातचीत करता था। उन पर अपना प्रभाव बनाकर सामान की डिलीवरी करने के लिए जो पेमेंट बनती, उसे अपने फेक अकाउंट में ट्रांसफर करवा लेता था। इस तरह आरोपी अलग-अलग तरीकों से लोगों को ठगी का शिकार बना रहा था।