मोहाली। कोविड-19 के दौरान उधार दिए रुपये की वापसी को लेकर दायर चेक बाउंस मामले में अदालत ने महिला आरोपी को बरी कर दिया। न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि शिकायतकर्ता महिला को दिया गया कर्ज साबित करने में असफल रहा, जबकि आरोपी ने प्रभावी जिरह के माध्यम से अपना बचाव सफलतापूर्वक सिद्ध कर दिया। मामला पंकज कुमार बनाम रचना से जुड़ा है। शिकायतकर्ता पंकज कुमार ने आरोप लगाया था कि आरोपी रचना से उसके दोस्ताना संबंध थे। कोविड काल में आर्थिक तंगी के चलते आरोपी ने उससे 5.25 लाख रुपये उधार लिए थे।
शिकायतकर्ता के अनुसार यह राशि अलग-अलग किश्तों में दी गई और बाद में आरोपी ने रकम लौटाने के लिए दो चेक जारी किए, जो बैंक में हस्ताक्षर मेल न खाने के कारण बाउंस हो गए। इसके बाद आरोपी को कानूनी नोटिस भेजा गया, लेकिन जवाब न मिलने पर धारा 138 निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के तहत शिकायत दर्ज कराई गई। वहीं आरोपी ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उसने शिकायतकर्ता से केवल 1,19,500 रुपये ही लिए थे, जिसे वह पहले ही वापस कर चुकी है। अदालत में हुई जिरह के दौरान शिकायतकर्ता ने भी स्वीकार किया कि 1,19,500 रुपये के अलावा किसी अन्य भुगतान का कोई लिखित या दस्तावेजी सबूत उसके पास नहीं है। साथ ही कथित नकद भुगतान, सोना छुड़ाने और मुथूट फाइनेंस से जुड़े दावों को भी वह प्रमाणित नहीं कर सका।
न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी ने कहा कि आरोपी ने धारा 139 के तहत बने अनुमान को सफलतापूर्वक खंडित कर दिया है। अदालत ने यह भी माना कि बिना किसी रसीद या सुरक्षा दस्तावेज के इतनी बड़ी राशि देने की कहानी संदेहास्पद है। अदालत ने शिकायत खारिज करते हुए आरोपी रचना को बरी कर दिया। साथ ही जमानत और जमानती बांड समाप्त करने के आदेश दिए गए।