पापा जल्दी घर आओ न, कितने दिन ऑफिस में रहोगे। पापा मुझे किसी ने चॉकलेट नहीं दिया। मां भी नहीं बताती कि तुम कब आओगे। पापा देख लेना जब तुम आओगे, तब मैं बात नहीं करूंगा। भगवान जी कोरोना को भगा दो न अब। ये बातें राजीव का पांच साल का बेटा कहता है। सेक्टर 32 स्थित जीएमसीएच में पेशेंट अटेंडेंट के रूप में कार्यरत राजीव आठ दिन से घर नहीं गए हैं।
उनकी ड्यूटी अस्पताल में भर्ती कोरोना के पॉजिटिव मरीजों की देखभाल में लगाई गई है। उनके 5 साल के बेटे का उन्हें याद करके हाल बुरा है। वह मोबाइल पर बात करते हुए लगातार रोता है और हर बार बस यही कहता है कि पापा जल्दी आ जाओ। राजीव के जिम्मे कोरोना पॉजिटिव मरीज को खाना-पानी देना, उनके बेड की चादर बदलना, उनके आसपास साफ-सफाई रखना और उनकी देखभाल करना है। राजीव लगातार 6 घंटे तक उन मरीजों के आसपास रहते हैं। इस दौरान वे खुद के बचाव को लेकर पूरी तरह सजग रहते हैं।
उनका कहना है कि ड्यूटी से न कहकर मैं अपने फर्ज से पीछे नहीं हट सकता। इसलिए अपनी सुरक्षा का ध्यान रखते हुए काम कर रहा हूं। घर पर माता-पिता के साथ ही पत्नी और पांच साल का एक बेटा है। जब कभी उन्हें देखने का मन होता है तो वीडियो कॉल भी नहीं कर पाता हूं क्योंकि घर पर जो मोबाइल है, उसमें वीडियो कॉल की सुविधा नहीं है। घर से थोड़ी दूरी पर एक रिश्तेदार हैं उन्हें कभी-कभार घर भेजकर उनके मोबाइल पर वीडियो कॉल करके सबको देख लेता हूं।
कमजोर न पड़ जाए कोरोना की लड़ाई..इसलिए परिवार से दूरी बनाई
काम में सबसे अहम भूमिका निभाने वाली होती सैंपलिंग टीम। इसका काम देखने में जितना आसान लगता है, उसमें चुनौतियां भी उतनी ही ज्यादा हैं। टीम के संक्रमित होने का खतरा भी रहता है। यहां तक जब शाम को ड्यूटी खत्म कर टीम के सदस्य घर पहुंचते हैं तो खुशी जरूर होती है।
वैसे तो वे लाख सावधानियां बरतते हैं लेकिन उनकी वजह से पारिवारिक सदस्य वायरस की चपेट में न आ जाएं इसके लिए उनसे दूरी बनाकर रखते हैं। टीम के सदस्यों का कहना है कि उनके लिए अपना फर्ज सबसे अहम है। ये सब कुछ वह कोरोना से जीतने को कर रहे हैं।
संदिग्धों के नाक, गले व पॉजिटिव ब्लड सैंपल लेते हैं
सैंपलिंग टीमों की अगुवाई जिला अस्पताल के ईएनटी स्पेशलिस्ट डॉ. संदीप सिंह कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि जब भी उन्हें जिला हेड क्वार्टर से निर्देश मिलते हैं तो उनकी टीम तुरंत सैंपल लेने के लिए निकल जाती हैं। सैंपल लेना आसान काम नहीं है। संदिग्ध मरीजों के नाक व गले के अलावा पॉजिटिव मरीजों के खून के सैंपल लिए जाते हैं।
अब तक 158 सैंपल लिए जा चुके हैं जिनमें से छह पॉजिटिव आए हैं। जबकि बाकी निगेटिव हैं। इसके अलावा पूरे जिले में अब तक 320 सैंपल लिए जा चुके हैं। इनमें से 10 सैंपलों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है जबकि कुछ की रिपोर्ट आना अभी बाकी है। सैंपल पीजीआई चंडीगढ़ भेजे जा रहे हैं।
घर पहुंचने पर पहले नहाते हैं फिर करते हैं दूसरा काम
डॉ. संदीप सिंह ने बताया कि संदिग्ध या पुष्टि के नजदीक होने वाले मरीजों के सबसे पास पहुंचने वाली सैंपलिंग टीम होती है। इस कारण टीम में वायरस की चपेट में आने का डर पैदा होना आम है। टीम के सदस्य अपना, दोस्तों व परिवार वालों का पूरा ख्याल रखते हैं। डॉ. संदीप ने बताया कि घर पहुंचने पर सबसे पहले सबसे पहला काम नहाना होता है उसके बाद बाकी चीजें।
वह और उनकी टीम जब भी घर पहुंचती है तो परिवार व बच्चों से मिलना सबकी प्राथमिकता होती है। लेकिन परिवार की सुरक्षा भी उनके लिए अहम है। ऐसे में वह खुद एक अलग कमरे में रहते हैं। घर वालों से दूरी बनाकर रखी जाती है। हालांकि सैंपल लेते हुए निजी सुरक्षा किट पहनकर जाते हैं।
रोजाना 15 से 20 सैंपल लेती हैं टीमें
डॉ. संदीप सिंह की टीम में माइक्रोबायोलॉजिस्ट दीपिका व लैब टेक्नीशियन शामिल हैं। कई बार टीम के साथ मेडिकल स्पेशलिस्ट भी होता है। जो कि पीड़ित से बीमारी के साथ ही अन्य सारी जानकारी लेता है। जिले में तीन टीमें काम कर रही हैं। जो कि रोजाना औसतन 15-20 सैंपल ले रही हैं। गत दिवस नया गांव व जगतपुरा में कोरोना केस सामने आने पर टीम ने करीब 70 सैंपल लिए थे।
ऐसे काम करती हैं टीमें
जिला नोडल अधिकारी डॉ. हरमनदीप कौर ने बताया कि जिले में तीन सैंपलिंग टीमें हैं। इनमे से एक टीम जिला अस्पताल मोहाली, डेराबस्सी व खरड़ अस्पताल में टीम बनाई है। यह टीमें अपने इलाकों में सैंपल इकट्ठे करने में जुटी हुईं हैं।