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विदेशी संस्थाओं की मदद से सुधारेंगे विद्यार्थियों की अंग्रेजी

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मोहाली। राज्य के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों की अंग्रेजी अब विदेशी संस्थाओं की मदद से सुधारी जाएगी। इस काम में शिक्षा विभाग ने यूएस दूतावास के इंग्लिश लैंग्वेज ऑफिस की मदद ली है। पहले चरण में पूरे राज्य के लिए 50 मास्टर ट्रेनर तैयार किए गए हैं जो अब राज्य के अध्यापकों को अंग्रेजी व सामाजिक शिक्षा पढ़ाने के तरीके सिखाएंगे। इसके बाद विद्यार्थियों को सिखाने की प्रक्रिया होगी। एससीईआरटी के असिस्टेंट डायरेक्टर डॉ. मनिंदर सिंह ने इसकी पुष्टि की। उन्होंने कहा कि भविष्य में इसके सार्थक नतीजे सामने आएंगे। उन्होंने बताया कि इसके अलावा कई अन्य प्रयास किए जा रहे हैं।
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राज्य सरकार स्कूूलों में शिक्षा के स्तर को सुधारने को लेकर काफी गंभीर है। सरकार ने सबसे पहले शिक्षकों को ही ट्रेनिंग करवाकर अपडेट करने की कोशिश की है। विभाग का मानना है कि शिक्षकों की जब खुद भाषा पर पकड़ मजबूत होगी तो उसके स्कूूलों में भी सार्थक नतीजे आएंगे। अंग्रेजी का स्तर सुधारना सरकार के लिए भी चुनौती है। ऐसे में पहले चार दिन की ट्रेनिंग वर्कशॉप करवाई गई है। इसमें 23 जिलों के 50 मास्टर ट्रेनर शामिल हुए। इनमें मिडल, हाई व सीनियर सेकेंडरी के ट्रेनर थे। उन्हें अंग्रेजी व सामाजिक शिक्षा पढ़ाने के तरीके सिखाए गए।
ट्रेनिंग की कोशिश यह थी कि अंग्रेेजी की पढ़ाई सिरदर्द न बने, बल्कि खेल खेल में आसानी से सीख पाए। इस ट्रेनिंग का सीधा फायदा राज्य के स्कूलों में पढ़ रहे दस लाख विद्यार्थियों को होगी। ट्रेनिंग वर्कशॉप में भाषाओं को सिखाने की माहिर बनाने, अंग्रेजी भाषा को सीखने सिखाने की तकनीकें, संचार के लिए भाषा की भूमिका, पढ़ाई में भाषाई साहित्य की महारत की भूमिका के बारे में विस्तार से बताया गया।
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इसके अलावा शिक्षा विभाग ने एक मोबाइल एप तैयार किया हुआ है। इसमें विद्यार्थियों को रोजाना प्रयोग होने वाले वाक्यों के बारे में ट्रेनिंग दी जाएगी। कुछ ऐसे टिप्स दिए गए हैं जिससे कि वह कक्षा का माहौल खुशनुमा बना पाएंगे।
अंग्रेजी सीखने के चक्कर में हो जाते हैं बर्बाद
पंजाब के युवाओं का सबसे बड़ा शौक विदेश जाना होता है। इस चक्कर में 10वीं और 12वीं के बाद अंग्रेजी भाषा को सीखने पर ही लाखों रुपये खर्च कर देते हैं। राज्य के हर जिले में अंग्रेजी सिखाने के इंस्टीट्यूट तक चल रहे हैं। साथ ही कई जगह इंस्टीट्यूट युवाओं को गुमराह कर उनसे लाखों रुपये ठग लेते हैं। इतना ही नहीं हर जिले में हर माह 10-15 केस विदेश भेजने के नाम पर होने वाली ठगी के दर्ज होते हैं। ऐसे में सरकार की यह पहल अच्छी साबित होगी।
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