मोहाली में पुलिस खुफिया मुख्यालय पर हुए आरपीजी आतंकी हमले की जांच में पहली बार पंजाब पुलिस अति आधुनिक तकनीक गेट एनालिसस टेस्ट (चाल परीक्षण) का प्रयोग भी अपनी जांच में करेगी। बुधवार को नाबालिग आरोपी का गेट एनालिसस टेस्ट करवाया गया। अब उसकी रिपोर्ट तैयार की जाएगी। साथ ही पुलिस एक प्वाइंट ऑफ मेमोरेंडम (पीओएम) भी तैयार कर रही है। इसके तहत आरोपी हमले से पहले और बाद में कहा गया था, उसका पूरा रिकॉर्ड जुटाया जा रहा है। सप्लीमेंट्री चार्जशीट में यह सब पुलिस अदालत में पेश करेगी।
पुलिस अधिकारियों ने कहा कि उन्हें पूरी उम्मीद है कि इससे अदालत में उनका रिकॉर्ड कमजोर नहीं पड़ेगा। पुलिस की टीम नाबालिग आरोपी को मोहाली के साथ लगते उस जगह पर लेकर गई थी, जहां वर वह सीसीटीवी कैमरे में कैद हुआ था। इस दौरान करीब एक घंटे तक उसका टेस्ट किया गया। इसमें विशेषज्ञ मौजूद रहे। साथ ही आरोपी को वहां पर चलाकर उसकी हर मूवमेंट को चार कैमरों में कैद किया गया।
अधिकारियों की मानें तो इस तरह के टेस्ट का प्रयोग विदेशी जांच एजेंसी, एनआईए और बड़े मामलों में किया जाता है। लेकिन पंजाब पुलिस के खुफिया मुख्यालय पर हमला पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की एक बड़ी गेम थी। ऐेसे में इस मामले में किसी भी स्तर पर ढील नहीं की जा सकती है।
दूसरी ओर प्वाइंट ऑफ मेमोरेंडम के लिए उन स्थानों की फोटोग्राफी की जा रही है, जहां पर वह हमले से पहले और बाद में गया था। इसके बाद इसके मोबाइल की उस समय की लोकेशन से इसका मिलान करके आगे की कार्रवाई की जाएगी।
आरोपियों को आखिर तक टारगेट में उलझाए रखा
पुलिस पूछताछ में नाबालिग आरोपी ने बताया कि पाकिस्तान में हरजिंदर सिंह रिंदा और कनाडा में बैठे लखविंदर सिंह रिंदा ने उन्हें कभी साफ नहीं कहा कि उन्हें पंजाब पुलिस के खुफिया मुख्यालय पर हमला करना है। उन्हें पहले बताया गया था कि पंजाब में एक व्यक्ति की हत्या करनी है। इसके लिए वह पंजाब के नामी शहर पहुंच गए थे। लेकिन ऐन मौके पर उन्हें आरपीजी हमले करने का काम सौंप दिया गया था। आरोपी ने पुलिस को यह भी बताया कि उसने बाइक से पुलिस खुफिया मुख्यालय की रेकी की थी।