चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी में हरियाणा की भागीदारी पर सोमवार को हुई दूसरी बैठक में कोई हल नहीं निकल पाया। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने हरियाणा को शेयर देने से साफ इन्कार कर दिया। वहीं हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर पीयू में राज्य के छात्रों को हक दिलवाने की बात पर अड़े रहे। बैठक पंजाब के राज्यपाल व चंडीगढ़ के प्रशासक बनवारीलाल पुरोहित की अध्यक्षता में हुई। इस दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं। बैठक में पीयू की वीसी प्रो. रेणु विज ने भी हिस्सा लिया। चंडीगढ़ प्रशासक बनवारीलाल पुरोहित ने कहा कि ज्ञान की गंगा हमेशा बहती रहती चाहिए। तक्षशिला, नालंदा के वक्त से हमारी संस्कृति ने यह ज्ञान दिया है। पंजाब सीएम ने बैठक में यूनिवर्सिटी में हॉस्टलोंं के निर्माण के लिए 48.5 करोड़ का फंड देने की भी घोषणा की है। इस मुद्दे पर फैसला नहीं हो पाने के कारण 3 जुलाई को दोबारा बैठक बुलाई गई है।
पंजाब के सीएम ने कहा- कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी को बनाए पीयू के जैसा बेहतर
बैठक के बाद पंजाब सीएम ने कहा कि हरियाणा कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी को पीयू के जैसा नहीं बना सका इसलिए अब छात्रोंं की पंजाब यूनिवर्सिटी से डिग्री की बात कह रहे हैं। 1970 के दशक में जब बंसीलाल सीएम थे तो उन्होंने अपनी मर्जी से पीयू से हिस्सा निकाला था और कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से कॉलेजोंं को संबद्ध किया गया। इसके बाद से पीयू में सिर्फ एक राज्य पंजाब की ओर से फंडिंग दी जा रही है। पंजाब की ओर से पीयू को 40 प्रतिशत फंड दिया जाता है। हिमाचल प्रदेश ने हरियाणा से पहले ही अपने कॉलेजों को अलग कर लिया था। इसके बाद पीयू को केंद्रीय यूनिवर्सिटी बनाने का खेल चलता रहा। सीएम ने 26 अगस्त 2008 की पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल की तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को लिखी चिट्ठी दिखाई, जिसमें उन्होंने पीयू को केंद्रीय यूनिवर्सिटी बनाने को लेकर किसी तरह की परेशानी नहीं होने की बात कही थी। उन्होंने कहा कि उनके द्वारा गृहमंत्री अमित शाह को चिट्ठी भी लिखी गई कि पीयू को केंद्रीय यूनिवर्सिटी नहीं बनाया जाए। पंजाब विधानसभा में 30 जून 2022 को प्रस्ताव भी पास किया, जिसमें कहा कि केंद्र पीयू को कब्जाने की कोशिश कर रहा है लेकिन इसका इंटरस्टेट बॉडी का हक कायम रखा जाए।
पीयू प्रतिनिधि बोले- पंजाब नहीं दे रहा पूरा फंड
बैठक में पीयू के प्रतिनिधियों ने बात रखते हुए कहा कि पंजाब अपना फंड पूरा नहीं देय करता है। केंद्र सरकार की तरफ से पिछले 10 सालों में 200-300 करोड़ औसत प्रति वर्ष की ग्रांट दी जा रही है, लेकिन पंजाब की तरफ से पिछले 10 सालों 40% की बजाय मुश्किल से लगभग 14 प्रतिशत बजट पीयू को देय कर रहा है।
हरियाणा की ग्रांट से पीयू को मिलेगी आर्थिक ताकत
पंजाब यूनिवर्सिटी को अगर हरियाणा सरकार की ओर से वित्तीय ग्रांट दी जाती है तो इससे पीयू को आर्थिक ताकत मिलेगी, लेकिन इसके साथ ही पीयू को लेकर राजनीति भी अधिक बढ़ जाएगी। पिछले लगभग तीन दशकों से पीयू को हरियाणा की तरफ से ग्रांट बंद है।
पीयू को देने हैं 200 करोड़ के एरियर्स, फंड के कारण लगी है रोक
पीयू को सत्र 2023-2024 के लिए यूजीसी ने 294 करोड़ का अनुदान दिया है जबकि पंजाब ने 38 करोड़ का अनुदान जारी किया है। हालांकि अभी भी पीयू के पास करीब 118 करोड़ रुपये बजट का घाटा है। इसके साथ ही पीयू को 200 करोड़ रुपये के एरियर्स भी देने हैं। गवर्नर के साथ बैठक में हरियाणा सरकार ने कहा था कि अगर उनके कुछ कॉलेज पीयू से संबद्ध किए जाते हैं तो वे पीयू को अनुदान देंगे, लेकिन पंजाब सरकार अपने रुख पर कायम है कि पीयू राज्य की विरासत है और इसमें बदलाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पंजाब नहीं देता है बजट में बनता हिस्सा
पीयू की ओर से पंजाब सरकार के बजट से पहले भी इस बार ग्रांट के लिए पत्र लिखा गया था। इसमें पीयू प्रशासन ने सरकार की ओर से वर्ष 2018 से लागू हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद समझौते के मुताबिक वर्ष 2022-23 के प्रस्तावित बजट में छह प्रतिशत की बढ़ोतरी नहीं करने की बात की थी। वहीं 2021-22 में पंजाब सरकार की ओर से छह प्रतिशत की बजाय 4.81 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ ही ग्रांट दी गई थी। इसलिए वर्ष 2021-22 के लिए 33 करोड़ 70 लाख की बजाय 34 करोड़ 8 लाख और वर्ष 2022-23 के लिए समझौते के अनुसार 33 करोड़ 70 लाख की बजाय 36 करोड़ 13 लाख रुपये की ग्रांट मांगी गई थी, लेकिन पंजाब की ओर से अपना बनता हिस्सा पीयू को कभी नहीं दिया जाता है।
पंजाब सरकार की पीयू के लिए 2017 से 2022 तक ग्रांट
वर्ष ग्रांट करोड़ में -प्रतिशत बढ़ोतरी
2017-18 - 27 - आधार वर्ष
2018-19 - 28.62 - 6 प्रतिशत
2019-20 - 30.33 - 6 प्रतिशत
2020-21 - 32.15 - 6 प्रतिशत
2021-22 - 33.70 - 4.81 प्रतिशत
शुरुआत में पीयू थी सेल्फ फाइनेंस यूनिवर्सिटी, कॉलेज एफिलिएशन और परीक्षाओं से होती थी वित्तीय पूर्ति
यूनिवर्सिटी के पूर्व प्रोफेसरों से मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 1882 में जब लाहौर में यूनिवर्सिटी बनाई गई तो उत्तर भारत के राजपूताना इलाके (हरियाणा, हिमाचल, पंजाब आदि) के कॉलेजों को पीयू के साथ संबद्ध किया गया था। इससे पहले पूरे उत्तर भारत के कॉलेज कलकत्ता यूनिवर्सिटी से संबद्ध थे। उस दौरान यूनिवर्सिटी सिर्फ परीक्षा आयोजित करवाती थी और कॉलेजों को एफिलिएशन देती थी, बदले में फीस लेती थी। यूनिवर्सिटियों में अपने विभाग नहीं होते थे, जिससे यूनिवर्सिटी का बजट अच्छा होता था। आजादी के बाद वर्ष 1958-60 के बीच पीयू चंडीगढ़ स्थित परिसर में स्थापित की गई। इस दौरान तक भी पीयू का अपना कोई विभाग नहीं था। इसके साथ ही पीयू पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के दसवीं बोर्ड की परीक्षाएं भी करवाती थी। इन फीसों से यूनिवर्सिटी को अच्छा बजट मिलता था। इसके बाद 22 जुलाई 1970 में हिमाचल प्रदेश में यूनिवर्सिटी बनने के बाद सरकार ने अपने कॉलेज एचपी यूनिवर्सिटी के साथ संबद्ध कर दिए। वहीं 30 जून, 1974 को हरियाणा में बंसीलाल की सरकार के समय कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी को चलाने के लिए हरियाणा ने भी पीयू से अपने कॉलेज अलग कर लिए। इसके साथ ही पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश ने अपने दसवीं के बोर्ड पहले ही अलग कर दिए थे। इन सबके कारण यूनिवर्सिटी को बड़ा वित्तीय घाटा लगा। बाद में पंजाब ने भी पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी अमृतसर के साथ इनके नजदीकी क्षेत्रों के कॉलेजों को जोड़ दिया गया। पीयू के पास पंजाब के सेंट्रल एरिया के कॉलेज ही बचे रहे। इसमें मालवा क्षेत्र के अलावा लुधियाना और होशियारपुर के कॉलेज भी आते हैं जिससे पीयू को लगातार वित्तीय घाटा लगता रहा और नए विभागों के बनने के कारण खर्च बढ़ता रहा। वर्ष 2005 में जब पांचवें पे कमीशन लगाना था तो पीयू के पास फंड नहीं था, उस दौरान तत्कालीन वीसी प्रो सोबती केंद्र सरकार से 150 करोड़ की ग्रांट लेकर आए थे। वर्ष 2008 में केंद्र में मनमोहन सिंह की सरकार के समय पंजाब यूनिवर्सिटी को केंद्र सरकार की ओर से भी बजट देने पर सहमति बनी।
पीयू और पड़ोसी यूनिवर्सिटियों का ये है प्रति वर्ष फीस स्ट्रक्चर
कोर्स - पीयू - जीएनडीयू - पंजाबी यूनिवर्सिटी - केयू - एचपीयू
बीटेक - 106855 - 138515 - 120991 - -
लॉ - 14115 - 37445 - 15750 - 16140 - 4980
एम (अंग्रेजी) - 16250 - 35255 - 15140 -10480 -
पीयू में फीस बढ़ोतरी का ये है हिसाब
पंजाब यूनिवर्सिटी में वर्ष 2011 के करीब छात्रों ने फीस वृद्धि के खिलाफ प्रदर्शन कर इसे हर साल ढाई प्रतिशत फीस बढ़ोतरी फिक्स करवाई थी। उस दौरान तीन साल ढाई प्रतिशत फीस बढ़ी। लेकिन बाद में तय फीस वृद्धि को ट्रेडिशनल कोर्सेज में 5 प्रतिशत पर तय किया और सेल्फ फाइनेंस कोर्स में पीयू में 7.5 प्रतिशत फीस वृद्धि हर साल की जाती है। बीच में कोरोना महामारी के कारण पीयू की ओर से दो साल फीस किसी भी कोर्स में फीस नहीं बढ़ाई गई थी। इस सत्र में तय सीमा के अनुसार ट्रेडिशनल कोर्स में 5 प्रतिशत और सेल्फ फाइनेंस कोर्स में 7.5 प्रतिशत की फीस बढ़ोतरी की जा रही है।
कोट....
पीयू की अगर हरियाणा के साथ सहमति बन जाती है तो यह तय करना जरूरी है कि कितने कॉलेजों को पीयू संबद्धता देता है और उन कॉलेजोंं के लिए हरियाणा सरकार कितनी वित्तीय सहायता के लिए तैयार होती है। पंजाब में पीयू से संबद्ध कॉलेजों की संख्या लगभग 180 है। वहीं पीयू सीनेट में भी हरियाणा की भागीदारी आएगी, ऐसे में राजनीति और बढ़ेगी। पीयू को हरियाणा के साथ आने का फायदा सरकार की ओर से बजट घोषणा पर करता है। - प्रो. अरुण ग्रोवर, पूर्व वीसी