मोहाली की तर्ज पर हो खरड़ का विकास
सुबह अपने घर से अदालत जाते थे तो चन्नी के पिता से जरूर मुलाकात करते थे। वह चाहते हैं कि मोहाली की तर्ज पर खरड़ का विकास हो, ताकि लोगों का जीवन स्तर सुधरे।
-तारा चंद, सीनियर एडवोकेट
नगर काउंसिल की इमारत बनाई जाए
नगर काउंसिल की नई इमारत बनाने का जो काम अधर में लटका पड़ा है, उसे मुख्यमंत्री खुद रुचि दिखाते हुए पहल के आधार पर पूरा करवाएं।
-पंकज चड्ढा, समाज सेवी
खरड़ के साथ लगते गांवों की बदले सूरत
सीएम उनके पुराने मित्रों में से एक हैं। वह चाहते है कि सीएम अपने कार्यकाल में खरड़ के साथ लगते गांवों में भी विकास कार्य करवाएं। ताकि गांव के लोगों को शहर जैसी सुविधाएं मिल पाएं।
-सुरिंदर सिंह, चन्नी के मित्र
शहर में पानी की दिक्कत दूर हो
कजौली पाइपलाइन से खरड़ के लिए पीने के पानी की व्यवस्था करवाई जाए। इसके आदेश कैप्टन अमरिंदर सिंह की अगुवाई वाली सरकार पहले ही कर चुकी है। लेकिन इस पर काम शुरू नहीं हो पाया है।
-नरेश कुमार जैन
डंपिंग ग्राउंड की गंदगी से मिले राहत
खरड़ स्टेडियम के पास बने डंपिंग ग्राउंड को दूसरी जगह शिफ्ट किया जाए। ताकि शहर को बदबू से राहत मिल सके। इसके कारण लोगों को बहुत परेशानी होती है।
-मोहम्मद इकबाल, समाज सेवी
गौरवपूर्ण है इतिहास, भगवान राम से है नाता
खरड़ अब भले ही सीएम सिटी के रूप में जाना जा रहा है, लेकिन इसका इतिहास गौरवपूर्ण रहा है। भगवान राम के पूर्वजों से भी इसका नाता है। आज भी यहां अज सरोवर है। इसे भगवान श्रीराम के दादा महाराजा अज ने बनवाया था। आज यह बदहाल है। इसके संरक्षण की जरूरत है। अंग्रेजी हुकूमत के समय भी अंबाला के बाद दूसरा सबसे बड़ा शहर खरड़ ही था। उस समय चंडीगढ़ या मोहाली की पहचान तक नहीं थी। आजादी के बाद पंजाब का सबसे बड़ा विधानसभा हलका भी खरड़ ही बना। खरड़ को गेटवे ऑफ पंजाब भी कहा जाता था। कितने ही दिग्गज खरड़ के आंगन से निकलकर देश दुनिया में चमक रहे हैं। बीजेपी के सत्यपाल जैन और जगमोहन सिंह कंग ऐसे ही नाम हैं।
पुराना बाजार रहता है हमेशा गुजलार
खरड़ का पुराना बाजार हमेशा ग्राहकों से गुलजार रहता है। यहां सुई से लेकर हर तरह का बड़े से बड़ा सामान मिलता है। सोने, चांदी, लोहा, इस्पात, कपड़ा, मसाले इत्यादि की बहुत दुकाने हैं। पक्का दरवाजा पार करते ही बाजार शुरू हो जाता है। पुराने समय से ही अपनी पहचान है। पंजाब के अलावा हिमाचल प्रदेश और हरियाणा से भी लोग खरीदारी करने पहुंचते हैं। अनाज मंडी तो पूरे सूबे में प्रसिद्ध है। शिक्षा के लिहाज से भी खरड़ मुफीद है। 50 से अधिक देशों के विद्यार्थी निजी शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ते हैं।
लोहड़ी से लेकर क्रिसमस तक की धूम
खरड़ में अधिकतर लोग नौकरीपेशा और व्यापारी हैं। सभी त्योहारों को लोग मिल जुलकर मनाते हैं। 60 फीसदी आबादी सिखों की है। जबकि बाकी आबादी में हिंदू, क्रिश्चियन, मुस्लिम आदि हैं। लोहड़ी से लेकर क्रिसमस तक सब धूमधाम से मनाते हैं।
लखनवी कबाब ही नहीं, बिहार का लिट्टी चोखा भी
खाने के शौकीनों के लिए तो यहां किसी तरह की कमी नहीं है। लखनऊ के कबाब से लेकर हिमाचल का सिड्डू और धाम। बिहार का लिट्टी चोखा और बरेली की बर्फी सब आपको मिलेगा। इन दुकानों पर हर समय भीड़ लगी रहती है।
साक्षरता दर
अगर मोहाली जिले की बात करे तो जिले की साक्षरता दर 82 फीसदी है। जबकि खरड़ शहर की साक्षरता दर 72 फीसदी है। इसमें पुरुष और महिलाएं बिलकुल बराबर हैं। यहां के वाहन पीबी 027 नाम से जाने जाते हैं।
खरड़ की प्रमुख समस्याएं
1. ट्रैफिक जाम सबसे बड़ी दिक्कत है
2. लावारिस पशु और कुत्ते
3. सिटी बस सर्विस का कोई इंतजाम नहीं
4. शहर की सफाई और सौंदर्यीकरण की जरूरत
5. कई इलाकों में पानी का संकट
6. रियल एस्टेट माफिया
7. पुलिस के सुरक्षा इंतजाम नाकाफी
8. कोई बड़ा पार्क या लाइब्रेरी की सुविधा नहीं
चुनौतियां जिन्हें दूर करना है जरूरी
- खरड़ तेजी से विकसित होता शहर है। लगातार बढ़ रही आबादी के कारण मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती है। सीवरेज, जाम, पार्किंग की समस्या गंभीर है। सीवरेज लाइन बहुत पुरानी हो चुकी है। इसका गंदा पानी निकलकर सड़क पर बहने लगता है।
- खिलाड़ियों के लिए स्पोर्ट्स कांप्लेक्स की जरूरत है। इसके अभाव में युवाओं को खेलने के लिए चंडीगढ़ या पंचकूला जाना पड़ता है।
- कम्युनिटी सेंटर की सुविधा नहीं है। इसके बिना लोगों को अपने शादी समारोह या अन्य आयोजनों के लिए महंगे होटल और मैरिज पैलेस में जाना पड़ता है।
- नगर काउंसिल प्रधान रहते चन्नी ने खानपुर में कम्युनिटी सेंटर बनाया था। खरड़ फ्लाईओवर के दौरान नगर परिषद पुराना दफ्तर की जमीन अधिग्रहीत हो जाने की वजह से इसी नगर काउंसिल में शिफ्ट कर दिया।