मोहाली। जुझार नगर में 58 घरों पर प्रस्तावित कार्रवाई के खिलाफ स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। भारी विरोध के चलते गमाडा की टीम को बिना किसी कार्रवाई के लौटना पड़ा। गमाडा के अधिकारी पुलिस प्रशासन के साथ जब इलाके में पहुंचे तो माहौल तनावपूर्ण हो गया और बड़ी संख्या में लोग मौके पर एकत्र हो गए। यह कार्रवाई हाईकोर्ट में चल रहे एक मामले के संबंध में की जानी थी, लेकिन स्थानीय निवासियों के तीखे विरोध को देखते हुए अधिकारियों को कदम पीछे खींचने पड़े। लोगों का कहना है कि वे 12 से 15 वर्षों से अपने परिवारों के साथ इन घरों में रह रहे हैं और अचानक उन्हें उजाड़ना अमानवीय होगा।
स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से अपील करते हुए कहा कि इनमें अधिकांश परिवार गरीब और मजदूर वर्ग से हैं, जिन्होंने जीवन भर की मेहनत की कमाई से छोटे-छोटे मकान बनाए या खरीदे हैं। कई परिवारों पर आज भी बैंकों का कर्ज चल रहा है। लोगों ने बताया कि इलाके में मुस्लिम समुदाय के लोग भी बड़ी संख्या में रहते हैं और इस समय पवित्र रमजान का महीना चल रहा है, ऐसे में घरों को तोड़ना उनके लिए गंभीर संकट खड़ा कर देगा। कुछ स्थानों पर लोगों ने दुआ कर प्रशासन से रहम की गुहार लगाई। इस दौरान एक दिव्यांग महिला ने अपने घर को न तोड़ने की मार्मिक अपील करते हुए कहा कि यही उनके परिवार का एकमात्र सहारा है और अगर यह छिन गया तो वे पूरी तरह बेसहारा हो जाएंगे।
गांव के सरपंच इकबाल सिंह ने कहा कि अगर ये मकान अवैध थे तो निर्माण या बिक्री के समय ही कार्रवाई क्यों नहीं की गई। उन्होंने कहा कि कानून के अनुसार किसी भी इलाके में रहने वाले लोगों को बुनियादी सुविधाओं से वंचित नहीं किया जा सकता। पानी, बिजली, सड़क और सीवरेज जैसी सुविधाएं देना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस मुद्दे को वह सरकार के उच्च स्तर तक उठाएंगे और मुख्यमंत्री भगवंत मान से भी इन गरीब परिवारों को राहत देने की अपील करेंगे। वहीं गमाडा की रेगुलेटरी ब्रांच के एसडीओ हरप्रीत सिंह ने कहा कि 58 घरों का मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में विचाराधीन है और टीम अदालत के आदेशों के तहत ही कार्रवाई के लिए पहुंची थी। उन्होंने बताया कि संबंधित परिवारों को पहले भी नोटिस दिए जा चुके हैं और आगे भी नियमानुसार नोटिस जारी किए जाएंगे।