कई प्रोजेक्ट पर खुल रही इंक्वयारी, आखिर समय पर क्यों पूरे नहीं हुए प्रोजेक्ट
गमाडा नहीं बना सका एरोसिटी मार्केट, इकोसिटी एक्सटेंशन का प्रोजेक्ट वर्षों से अधूरा, डेवलप हो गया पूरा मुल्लांपुर
माई सिटी रिपोर्टर/संवाद
मोहाली। ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी की लेटलतीफी का जिले के कई बिल्डरों काफी फायदा हुआ है। गमाडा के उच्च अधिकारियों के संज्ञान में जब यह बात आई तो उन प्रोजेक्टों की जांच शुरू की गई है, जिनके लिए घोषणा तो काफी समय पहले की जा चुकी है लेकिन काम अब तक नहीं शुरू किया जा सका है।
गमाडा के प्रोजेक्ट इकोसिटी एक्सटेंशन की शुरुआत 2013 में हुई थी। इसके लिए जमीन का अधिग्रहण उसी वक्त किया गया था लेकिन साल गुजरते गए और इकोसिटी एक्सटेंशन के लिए एक भी कदम आगे नहीं बढ़ा।
गमाडा ने एरोसिटी बसाई लेकिन एरोसिटी की मार्केट नहीं बनाई। ऐसी स्थिति में यहां प्राइवेट बिल्डरों ने अपनी ऊंची ऊंची काॅमर्शियल साइटें तैयार करके महंगे दामों में बेच डालीं और जमकर मुनाफा कमाया। निजी बिल्डरों ने यहां अपने मॉल, शोरूम, रेजिडेंशियल और इंडस्ट्रियल प्लॉट तक काट डाले हैं।
गमाडा के प्रोजेक्ट एरोट्रोपोलिस की शुरुआत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास होनी थी। इसमें कॉमर्शियल और आवासीय हब बनाने की योजना थी, जिसको पूरा भी जल्द होना था। इसमें किसानों से भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी शुरू की गई लेकिन अब तक सिर्फ ए से डी ब्लॉक तक ही एलओआई (लेटर्स ऑफ इंटेंट) जारी की गई। ई से लेकर एच ब्लॉक तक के किसानों को अभी एलओआई का इंतजार है। मुल्लांपुर में गमाडा ने कई किसानों की जमीनों को अधिग्रहीत किया था लेकिन उनको अब तक प्रोजेक्ट तैयार न होने के कारण भटकना पड़ रहा है।
किसानों को हुआ ज्यादा नुकसान
गमाडा के कई प्रोजेक्ट में देरी की वजह से किसानों का काफी नुकसान हो रहा है। भूमि अधिग्रहण के बाद कई किसानों को न तो उचित मुआवजा मिला और न उनके द्वारा दी गई भूमि पर कोई विकास कार्य शुरू हो पाया है।
किसानों से जमीन ली और कर दिया निर्माण
चाहे मुल्लांपुर हो या फिर मोहाली और एरोसिटी, सभी स्थानों पर बिल्डरों ने किसानों से ही जमीनें ली हैं। इन बिल्डरों ने अपने नामी प्रोजेक्ट उन स्थानों पर तैयार कर डाले हैं जहां गमाडा ने अपने प्रोजेक्ट की घोषणा करता रहा। नामी बिल्डरों ने प्लाट काटे, कामर्शियल स्पेस तैयार किए और गमाडा की एरिया की प्लानिंग को सामने रखकर बेच डाला। इन बिल्डरों ने किसानों से जमीन लेकर बड़ी तेजी से काम किया। उन्होंने जमीन बेचते समय लोगों के सामने गमाडा के मास्टर प्लान की सड़कों का जिक्र करके अपनी प्रॉपर्टी महंगे दामों पर बेची।
कई बिल्डरों का काम है जमीन बेचना
कई बिल्डरों ने तो किसानों की जमीनों को अधिग्रहीत करने का फार्मूला अख्तियार किया और गमाडा के प्रोजेक्ट को दिखा दिखाकर लोगों को जमीनों की ओर आकर्षित किया। इलाके के वह अब नामी बिल्डर कहलाते हैं। एरोसिटी के पास बने एक प्रोजेक्ट को गमाडा की एरोसिटी की योजना और नेशनल हाईवे की ओर से निकाले जाने वाले हाईवे को दिखाकर बेचा गया।
कोट्स
पहले क्या हुआ है इस बारे में तो कमेंट नहीं करूंगा। यह जरूर है कि अब गमाडा तेजी से काम कर रहा है। जिन प्रोजेक्टों में देरी हुई है, उनके बारे में भी जांच की जा रही है। हमने इकोसिटी एक्सटेंशन-2 के लिए इंजीनियरिंग वर्क शुरू करवा दिया है। इकोसिटी 3 के लिए भी तेजी से काम किया जा रहा है।
मोनीश कुमार, चीफ एडमिनिस्ट्रेटर, गमाडा