भले ही मोहाली जिले को सिंगापुर और दुबई की तर्ज पर बसाने के दावे किए जाते हैं लेकिन जिला बनने के 17 साल बीत जाने के बाद भी कई इलाकों में थानों और चौकियों को अपनी इमारत तब नसीब नहीं हो पाई है। किराए की इमारतों या सामुदायिक क्रेंदों में बैठकर पुलिस लोगों की सेवा कर रही है। जबकि कई जो नए बसे एरिया हैं, वहां पर तो अभी तक थाने और चौकी तक नहीं बन पाई है। यह हालात मुख्यमंत्री आवास के नजदीक नयागांव से लेकर जीरकपुर तक में है।
बलटाना की पुलिस चौकी भी साल 2006 से एक सामुदायिक केंद्र में चल रही है। अभी तक इसे अपनी इमारत नहीं मिल पाई है। जब यह चौकी बनाई गई थी उस समय इलाके की आबादी 25 हजार थी, जो अब एक लाख हो गई है। लेकिन यहां पर मात्र 13 मुलाजिम हैं और इन्हीं पर पूरे इलाके का भार है। हालांकि कई बार इस संबंध में पुलिस विभाग को भी पत्र लिखे गए हैं। लेकिन अभी तक इस दिशा में उचित कार्रवाई नहीं हो पाई। इसके अलावा खरड़ में दोनों थाने पुरानी इमारतों में चल रहे हैं। तेज बारिश होने पर उनकी छत टपकती है।
शहर के नए बसे इलाकों में अभी तक पुलिस चौकी नहीं बन पाई है। इसके अलावा पुलिस की गश्त भी न के बराबर ही होती है। इस चीज का भी शरारती तत्व फायदा उठाते हैं। यह समस्या एरोसिटी से लेकर आई सिटी और न्यू चंडीगढ़ मुल्लांपुर तक आती है। वहां पर पुलिस की गश्त काफी कम है। जबकि उक्त इलाके में आपराधिक वारदातें काफी बढ़ गई हैं। लोग कई बार इस संबंध में अधिकारियों को बता चुके हैं, लेकिन उम्मीद है कि अब नई सरकार के आने के बाद इस दिशा में कार्रवाई होगी।
जिला पुलिस की ओर से लोगों की सुरक्षा को लेकर सभी प्रबंध किए जा रहे हैं। करीब 2300 मुलाजिम जिले की सुरक्षा में तैनात हैं। कुछ नए थाने बन गए हैं, जबकि कुछ का काम चल रहा है। हमारी कोशिश यहीं है कि हर व्यक्ति को पुलिस की मदद मिले। इसके अलावा पुलिस के वाहन से लेकर अन्य सभी चीजें अति आधुनिक हैं। -हरजीत सिंह, एसएसपी मोहाली।