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कोरोना के केस घटते ही टीकाकरण से लोगों ने बनाई दूरी

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मोहाली। भले ही जिले में कोरोना के मामले कम हो गए हैं। फिर भी कोरोना का खतरा बरकरार है। पंजाब भर से जारी होने वाली रिपोर्ट में जिले में पहली डोज का टीकाकरण का लक्ष्य 102 प्रतिशत पूरी हो चुका है लेकिन अब भी जिले में कुछ ऐसे लोग हैं जिन्होंने दोनों वैक्सीन नहीं ली है। 15 जुलाई से शुरू फ्री बूस्टर डोज 75 दिन बाद 30 सितंबर को खत्म हो रही है। अब तक 67,800 लोगों ने ही बूस्टर डोज लगवाई है। 30 सितंबर के बाद इसके लिए पैसे देने होंगे।
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जानकारी के मुताबिक जिले में पंजाब के अन्य शहरों के मुकाबले पहले और दूसरी डोज का लक्ष्य तकरीबन पूरा हो चुका है। इसके पीछे का एक सच यह है कि लॉकडाउन के दौरान दूसरे राज्य से आए लोगों ने शहर में आकर टीकाकरण करवाया। इस कारण डाटा में यह तो दर्ज हो गया है कि जिले में टीकाकरण पूरा हो चुका है लेकिन हकीकत में जिले में सभी लोगों का टीकाकरण नहीं हुआ है। इसका साक्ष्य यह है कि रोज जिला सेहत विभाग द्वारा जारी की जाती रिपोर्ट में पहली डोज अब तक लग रही है।
जिले में अब तक 21,08,152 लोगों का टीकाकरण हो चुका है। पहली डोज की बात करें तो जिले में अभी तक 11,58,394 लोगों का टीकाकरण हो चुका है। वहीं 8,81,958 ने दूसरी और 67,800 ने ही बूस्टर डोज लगवाई है।
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12 से 14 साल के बच्चों का टीकाकरण सबसे कम
जिले में अगर सबसे कम टीकाकरण हुआ है तो वह 12 से 14 साल के बच्चों का है। जिले में 12 से 14 साल 31,011 बच्चे हैं। उनमें से सिर्फ 23,281 ने पहली और 12,805 बच्चों ने दूसरी डोज ली है। वहीं अभी भी 7730 बच्चों ने कोई भी डोज नहीं ली है। सेहत विभाग की टीमों को स्कूल के प्रिंसिपल के द्वारा रोज यह कहा जाता है कि जब तक अभिभावक लिखकर नहीं देंगे तब तक वे टीकाकरण टीम को स्कूलों में नहीं बुला सकते।
घर-घर वैक्सीन योजना का ग्रामीण इलाकों में रहा विरोध
पंजाब सरकार द्वारा घर-घर वैक्सीन लगाने की योजना भी अधर में ही रही। 80 प्रतिशत घरों का कवर किया गया। लेकिन पांच प्रतिशत लोग ऐसे रहे, जो घर पहुंचे स्वास्थ्यकर्मियों से लड़ने को तैयार है। यहां तक की हाथापाई तक की नौबत आ गई। लोगों ने स्वास्थ्यकर्मियों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश बताए जिसमें टीकाकरण जबरदस्ती न करने के आदेश हैं। सबसे बुरा व्यवहार स्वास्थ्यकर्मियों के साथ ग्रामीण इलाकों के लोगों ने किया।
क्या कहते हैं अफसर
विभाग की टीम ने टीकाकरण को शहर के हर कोने में पहुंचाने का काम किया। अभिभावकों से खास मुलाकात भी की। इसके बावजूद 70 से 80 प्रतिशत बच्चों ने ही टीका लगवाया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक टीकाकरण के लिए जबरदस्ती नहीं कर सकते। जिले के हर स्कूल, कॉलेज व सार्वजनिक स्थानों पर विभाग के नंबर दे रखे हैं। कोवोवैक्स को डब्ल्यूएचओ से मंजूरी न मिलने के कारण अभिभावकों में इसे लेकर आशंका है। जिन्हें भी कोवोवैक्स लगाई है, उन्हें कोई समस्या नहीं आई है। लोगों से अपील है कि कोरोना भले ही कम हुआ है लेकिन खतरा बना हुआ है इसलिए जल्द टीकाकरण करवाएं। -डॉ. गिरीश डोगरा, जिला टीकाकरण अफसर
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