ह्यमोहाली। लंबे समय से चला आ रहा नए सेक्टरों में पानी के ऊंचे रेटों का मामला आखिर शुक्रवार को अदालत में पहुंच ही गया। इस संबंधी इलाके के लोगों और पूर्व पार्षदों ने स्थाई लोक अदालत में याचिका दायर की थी। अदालत ने याचिका को मजूर करते हुए इस संबंध में नगर निगम के कमिश्नर कम प्रशासक, गमाडा के सीए और डायरेक्टर लोकल बॉडीज को नोटिस जारी किया है। इसके साथ ही 28 अगस्त तक जवाब दाखिल करने के लिए भी कहा है।
मिली जानकारी के मुताबिक यह केस पूर्व पार्षद शिंदर पाल, बॉबी कंबोज, सुरिंदर सिंह रोडा, परमिंदर सिंह तिसंबली, जसबीर कौर अतली, सतवीर सिंह धनोआ, राजिंदर कौर कुंभड़ा और रजनी गोयल की तरफ से लोक अदालत में दायर किया गया है।
उन्होंने अपनी याचिका में कहा है कि वे सभी सेक्टर-66 से लेकर 80 तक में रहते हैं। उनके मुताबिक 2014 में मोहाली नगर निगम वजूद में आई थी। जिसमें सेक्टर-66 से 80 तक को नगर निगम में शामिल किया गया था।
लेकिन गमाडा इन सेक्टरों के बुनियादी ढांचे के काम को नगर निगम के हवाले करने के बजाय खुद ही देख रहा था। इसके साथ ही एक एक करके उक्त कामों को नगर निगम को सौंपा है। इस दौरान सड़क, पार्क और अन्य विकास कार्य नगर निगम को सौंप दिए गए हैं। लेकिन पानी की सप्लाई और सीवरेज का काम गमाडा को नहीं सौंपा गया है।
एक ही शहर में पानी के दो तरह के रेट
अदालत में दी गई याचिका में कहा गया है कि 2017 में पंजाब में नई सरकार आई थी। इसके बाद गमाडा ने पानी के बिलों के रेट 5.5 गुणा बढ़ा दिए थे। इस तरह से शहर में पानी के दो तरह के रेट हो गए थे।
पुराने सेक्टरों में नगर निगम की तरफ से 1 रुपये 80 पैसे प्रति क्यूबिक लीटर के लिए जाते हैं। जबकि गमाडा अपने एरिया में 9 रुपये 90 पैसे प्रति क्यूबिक लीटर के हिसाब से पैसे वसूलता है। गमाडा की तरफ से बढ़ाए गए रेटों का शुरू से ही विरोध हुआ था। लोगों ने धरना, भूख हड़ताल और प्रदर्शन भी किया था।
प्रस्ताव पास कर भेजा, लेकिन अभी तक नहीं किया लागू
याचिका में कहा गया है कि पानी के ऊंचे रेटों के बारे में सभी पूर्व पार्षदों ने नगर निगम के मेयर कुलवंत सिंह तक अप्रोच की थी। इसके बाद मेयर ने पानी की सप्लाई का प्रस्ताव पास कर नगर निगम के हवाले किया था। वहीं, प्रस्ताव पास कर स्थानीय निकाय विभाग के डायरेक्टर को मंजूरी के लिए भेजा था। लेकिन अब तब इसे मंजूरी नहीं दी गई है। याचिका में कहा है कि यदि पानी की सप्लाई नगर निगम को सौंपी तो पानी के रेट पूरे शहर में एक समान हो जाएंगे।
याचिका में इन चीजों की रखी मांग
याचिका में मांग की गई है कि पानी की सप्लाई गमाडा से लेकर नगर निगम को सौंपी जाए। गमाडा ने 2017 से जो पानी के अतिरिक्त रेट वसूले हैं, उन्हें रिफंड के आदेश दिए जाएं। जिन अधिकारियों की वजह से इस काम के लेन-देन में देरी हुई है और लोगों को मानसिक-आर्थिक नुकसान हुआ है। उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। पूर्व पार्षदों के वकील विद्या सागर मामले में पैरवी कर रहे हैं।