फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अब मोहाली के प्रवेश द्वारों पर टूटी सड़कों से नहीं होगा स्वागत, 98 लाख से बदलेगी सूरत

विज्ञापन
विज्ञापन
नयागांव। मुख्यमंत्री के गृह जिले और उनके घर के नजदीक स्थित नयागांव कहने को तो राज्य की राजधानी चंडीगढ़ के साथ सटा हुआ है। लेकिन अभी तक भी इलाके को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। ऐसा भी नहीं है कि लोगों को सुविधाएं देने के लिए योजनाएं न बनी हों। इसके लिए योजना भी बनी और पैसा भी पास हो गया। लेकिन जमीन नहीं होने की दिक्कत से सभी प्रोजेक्ट अधर में लटके हैं। जबकि इन सब चीजों का खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। यहां पर मूलभूत सुविधाएं नहीं होन के कारण लोग तंगी में जीवन जीने के लिए मजबूर हैं।
विज्ञापन

जानकारी के मुताबिक 2006 में नयागांव में नगर काउंसिल बनी थी। ऐसे में जो सरकारी जमीन नगर काउंसिल को मिलनी थी, वह नेताओं या रसूख वाले लोगों के हाथ में चली गई। नगर काउंसिल बनने के 15 साल बाद भी लोग पार्क, सामुदायिक केंद्र, पॉवरग्रिड, डिस्पेंसरी और सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट जैसी कई सुविधाओं को तरस रहे हैं। वहीं, चुनाव नगर काउंसिल का हो या विधानसभा का, इस दौरान लोगों से वोट मांगने के लिए नेता सुविधाएं देने के लिए जमकर राजनीति करते हैं। लेकिन कुर्सी मिलने के बाद सब इन चीजों की सुध तक नहीं लेते। वहीं, मास्टर प्लान के मुताबिक जहां पर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगना था, वहां पर अब घनी आबादी है। सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए सरकार की ओर से कई बार पैसा पास कर नगर काउंसिल को भेजा गया है। लेकिन जमीन न होने के कारण सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट अभी तक नहीं लग सका। वहीं, पार्क बनाने के लिए सरकार की ओर से 19 लाख रुपये भेजे गए थे। लेकिन पार्क भी राजनीति की भेंट चढ़ गया। वोट बैंक की राजनीति के कारण जहां पर पार्क बनना था। वहां एक पक्ष गढ़वाल भवन बनाना चाहता है, जबकि दूसरा पक्ष यहीं पर पार्क बनाना चाहता है। इस कारण अब तक वहां न तो गढ़वाल भवन बना है और न ही पार्क बन सका है।
सामुदायिक केंद्र के लिए रखा नींव पत्थर गायब
इसी तरह सामुदायिक केंद्र का नींव पत्थर सांसद मनीष तिवारी की ओर से 13 अक्तूबर, 2020 को रखा गया था। यह सामुदायिक केंद्र 1 करोड़ 40 लाख रुपये की लागत से बनकर तैयार होना था। लेकिन एक साल बाद भी यहां सामुदायिक केंद्र तो बनाया ही नहीं गया, बल्कि सांसद तिवारी की ओर से रखा गया नींव पत्थर भी गायब है। कुछ समय पहले नगर काउंसिल की पहली ही बैठक में इलाके में पावर ग्रिड लगाने का एक प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन जमीन न होने के कारण यह प्रस्ताव भी रद्द करना पड़ा।
विज्ञापन

किराए के मकानों या गेस्ट हाउस में चल रहे सरकारी दफ्तर
जानकारी के मुताबिक सरकारी जमीन न होने के कारण एक ओर जहां आम जनता को सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं, वहीं दूसरी ओर सरकारी दफ्तर भी किराए के भवनों में चल रहे हैं। यहां तक कि खुद यह काम देखने वाली नगर काउंसिल के पास भी अपना भवन नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें