मोहाली/मुल्लांपुर। गमाडा ने 11 साल में पांच नए हाउसिंग प्रोजेक्ट और सेक्टर तो बसा दिए, लेकिन इनमें न डिस्पेंसरी और न ही सरकारी डॉक्टर दिए हैं। इनमें एयरोसिटी से लेकर मुल्लांपुर तक में बसी मेडिसिटी शामिल है। लेकिन हालत यह है कि यहां पर अगर किसी को दांत में दर्द भी हो जाए तो इलाज के लिए चंडीगढ़ जाना पड़ता है। क्योंकि यहां सरकारी डिस्पेंसरी तक नहीं है। लोगों का कहना है कि वह लाखों रुपये खर्च कर यहां अपने मकान बनाकर पिछले 10 साल से सजा भुगत रहे हैं, लेकिन इस बार जब नेता जी वोट मांगने आएंगे तो उनसे जवाब मांगेंगे और मतदान न करके गुस्सा उतारेंगे।
जानकारी के मुताबिक गमाडा की ओर से 2011 मे 836 रिहायशी प्लाटों के साथ इको सिटी-1 स्कीम को लॉन्च किया गया था। 2014 तक विकास कार्य पूरा करने का वादा किया गया था। गमाडा द्वारा 400 एकड़ जमीन में करीब 151 करोड़ की लागत से यह रिहायशी एरिया विकसित किया गया है, लेकिन हकीकत यह है कि यहां पर लोगों को स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर सिर्फ एक मेडिसिटी बसा दी गई है। जिसमें अभी तक एक क्लीनिक तक नहीं है। लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए 350 एकड़ जमीन मे मेडिसिटी बनाया गया था। जहां पर पिछले 10 सालों से एक कैंसर अस्पताल निर्माणाधीन है। 2013 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह द्वारा इसका नींव पत्थर रखा गया था। अगर हाल की बात करें तो इकोसिटी-1 में करीब 550 से 600 परिवार रहते हैं। जिनको स्वास्थ्य सेवाओं के लिए चंडीगढ़ पर ही निर्भर रहना पड़ता है। इसी तरह एयरोसिटी के लोगों को दिक्कत उठानी पड़ रही है। क्योंकि वहां से मोहाली सिविल अस्पताल 15, चंडीगढ़ 15 और जीरकपुर 10 किलोमीटर है।
क्या कहते हैं नियम
नियमों के अनुसार स्वास्थ्य सुविधाएं हर इंसान के लिए बुनियादी जरूरत है। नया इलाका बसाने से पहले सरकार द्वारा इलाके को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भारत मे 3000 से 5000 की जनसंख्या पर उप स्वास्थ्य केंद्र होना जरूरी है। 5000 से 25000 की जनसंख्या के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एवं 25000 से करीब 80 हजार तक की जनसंख्या के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र होना जरूरी है। लेकिन, सरकार द्वारा इन नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है।
क्या कहते हैं लोग
एरोसिटी के लोग भी स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित
पंजाब सरकार ने 2010 मे सिंगापुर की तर्ज पर एरोसिटी को बसाने के सपने देखे थे। इंटरनेशनल एयरपोर्ट के सामने बसाये गए एरोसिटी में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर जैसी चर्चित बिल्डिंग स्थित है। यही नहीं यहां पर कई नामी नेता एवं अभिनेताओं ने अपने प्लाट खरीद रखे हैं। लेकिन सरकार इतना सबकुछ करने के बाद यहां के लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना ही भूल गई। इलाके में अब तक एक स्वास्थ्य केंद्र भी विकसित नहीं किया गया है। लोगों को इलाज के लिए कई किलोमीटर दूर जाना पड़ता है।
मकान बनाकर पछता रहे है
जिंदगी की पूरी कमाई लगाकर यहां पर मकान बनाया था। सोचा था कि अच्छी सुविधाएं मिलेंगी। लेकिन, सरकार की तरफ से इलाके को बसा कर पूरी तरह से भुला दिया है। लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान हो रहे हैं।
संतोष कुमार, स्थानीय निवासी इकोसिटी
छोटी सी बीमारी के लिए चंडीगढ़ जाना पड़ता है
छोटी से छोटी बीमारी के लिए चंडीगढ़ भागना पड़ता है। इलाके में कोई भी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं है। कई बार चंडीगढ़ तक पहुंचते-पहुंचते मरीज की हालत और भी गंभीर हो जाती है ।
तरुण शारदा स्थानीय निवासी
इलाके में स्वास्थ्य केंद्र की जरूरत
इलाके में कोई न कोई स्वास्थ्य केंद्र होना चाहिए। एक सिर दर्द की गोली के लिए भी कई किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। मरीज को गंभीर हालत में प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध कराने के लिए व्यवस्था होनी चाहिए।
डॉक्टर हितेंद्र, स्थानीय निवासी
दस साल में अस्पताल तक नहीं खुल पाया
इकोसिटी के सामने मेडिसिटी बना दिया है। लेकिन मेडिसिटी सिर्फ नाम का है। यहां पर पिछले 10 सालों में अब तक एक भी अस्पताल शुरू नहीं हो पाया है। हो सकता है आगे आने वाले समय में इसका फायदा मिले। लेकिन अभी इलाके में कोई स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध नहीं है।
अमनदीप सैनी, स्थानीय निवासी
क्या कहते है अधिकारी
शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए 30 नए हेल्थ एवं वेलनेस सेंटर खोले जाने हैं। जिसके लिए सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है। जो भी नए इलाके बसे हैं यह स्वास्थ्य केंद्र उन्हीं इलाकों में खोले जाएंगे। जैसे ही प्रस्ताव पर सरकार की मुहर लगती है तुरंत स्वास्थ्य केंद्र स्थापित कर दिए जाएंगे।
आदर्श पाल कौर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, मोहाली