मोहाली। जिले में लैंड और सैंड माफिया की तर्ज पर तेल माफिया सक्रिय हो चुका है। पड़ोसी राज्यों से सस्ता पेट्रोल और डीजल लाकर मोहाली में बेचा जा रहा है। यह गोरखधंधा मोहाली तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसकी जड़ें पूरे पंजाब में फैली हुई हैं। तेल माफिया की सक्रियता के चलते पेट्रोल पंपों का कारोबार 80 फीसदी तक गिर चुका है। पंजाब को मिलने वाला करीब 500 करोड़ रुपये का राजस्व भी पड़ोसी राज्यों के पास जा रहा है।
वीआईपी जिले मोहाली में पिछले कुछ समय से तेल माफिया की सक्रियता लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि पंजाब में पेट्रोल और डीजल के दाम चंडीगढ़ सहित पड़ोसी राज्यों से ज्यादा हैं। मोहाली जिले की सीमाएं चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश और हरियाणा के साथ लगती हैं। पंजाब में पेट्रोलियम उत्पादों के बढ़ते दाम तेल माफिया को अपना नेटवर्क कायम करने में मदद कर रहे हैं। पंजाब में डीजल के बढ़ते दाम तेल माफिया को बढ़ावा दे रहे हैं। पंजाब के मुकाबले हिमाचल प्रदेश में डीजल 5.50 रुपये सस्ता है, जबकि चंडीगढ़ में 3.17 रुपये और हरियाणा में 3 रुपये सस्ता है। ऑयल माफिया पड़ोसी राज्यों से छोटे टैंकरों में डीजल और पेट्रोल भरकर मोहाली लाते हैं और मोहाली के पेट्रोल पंपों के मुकाबले 3-4 रुपये सस्ते दामों पर होम डिलीवरी देते हैं। इस कारण मोहाली के पेट्रोल पंपों का कारोबार 80 फीसदी तक गिर चुका है। तेल माफिया के कारण कारोबार में हो रहे नुकसान के चलते तीन पेट्रोल पंपों के मालिक जीएस चावला ने पिछले साल आत्महत्या कर ली थी।
कोरोना काल में सरकारों ने बढ़ाया बोझ
कोरोना काल में जहां आम नागरिक केंद्र और राज्य सरकारों से राहत की उम्मीद लगाए हुए थे, वहीं सरकारों ने पेट्रोलियम पदार्थों पर एक्साइज और वैट में बढ़ोतरी करके लोगों की जेब ढीली की। कोरोना काल के दौरान पिछले साल केंद्र सरकार ने डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 18.33 रुपये से बढ़ाकर 31.83 रुपये कर दी। इसी तरह पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 22.98 रुपये से बढ़ाकर 32.98 रुपये कर दी गई। 2014 से अब तक केंद्र ने डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 824 प्रतिशत का इजाफा कर दिया है। वर्ष 2014 में डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 3.46 रुपये थी जो अब 31.83 रुपये है। केंद्र की एक्साइज ड्यूटी और राज्य का वैट मिलाकर डीजल प्रति लीटर 47 रुपये उपभोक्ता से वसूले जा रहे हैं। वर्ष 2019-20 में पेट्रोलियम उत्पादों की खपत 7113 हजार मीट्रिक टन थी। जो कि कोरोना काल के दौरान यानि वर्ष 2020-21 में घटकर 5933 हजार मीट्रिक टन रह गई। खपत में 20 फीसदी कमी आई, लेकिन टैक्स में बढ़ोतरी के कारण वैट संग्रह में 20 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।
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बाक्स
डीजल
टैक्स की दर पंजाब चंडीगढ़ हरियाणा हिमाचल
बेसिक वैट 15.94 प्रतिशत 14.02 प्रतिशत 16.40 प्रतिशत 14.00 प्रतिशत
एडिशनल वैट 10 प्रतिशत 00.00 प्रतिशत 05.00 प्रतिशत 00. 00 प्रतिशत
वैट व एडिशनल वैट 17.53 प्रतिशत 14.02 प्रतिशत 17.22 प्रतिशत 14.00 प्रतिशत
सैस रुपये प्रति लीटर 01.05 00.01 00. 00 00. 00
एडिशनल सैस प्रति लीटर 00.01 00. 00 00. 00 00. 00
इंफ्रा डेवलपमेंट फीस
रुपये प्रति लीटर 00.25 00. 00 00. 00 00. 00
वैट रुपये प्रति लीटर 15.17 10.94 13.13 10.68
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पेट्रोल
टैक्स की दर पंजाब चंडीगढ़ हरियाणा हिमाचल
बेसिक वैट 24.79 प्रतिशत 22.45 प्रतिशत 25 प्रतिशत 25.00 प्रतिशत
एडिशनल वैट 10.00 प्रतिशत 00. 00 05.00 प्रतिशत 00. 00
वैट व एडिशन वैट 27.26 प्रतिशत 22.45 प्रतिशत 26.25 प्रतिशत 25 प्रतिशत
सैस रुपये प्रति लीटर 02.05 00.01 00. 00 00. 00
एडिशनल सैस
रुपये प्रति लीटर 00.01 00. 00 00. 00 00. 00
इंफ्रा डेवलपमेंट फीस
रुपये प्रति लीटर 00.25 00. 00 00. 00 00. 00
वैट रुपये प्रति लीटर 24.22 े 17.60 19.31 18.51
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बाक्स
पेट्रोल पंप डीलर्स लंबे समय से ट्राइसिटी में पेट्रोलियम पदार्थों के एक समान रेट की मांग करते आ रहे हैं। हमारी मांग है कि कम से कम डीजल के रेट पड़ोसी राज्यों के समान किए जाएं। जिससे तेल माफिया पर लगाम लग सके। इसे लेकर एसोसिएशन जल्द ही राज्यपाल और मुख्य सचिव को एक प्रेजेंटेशन देने की तैयारी कर रही है। जिससे यह बताया जा सके कि पड़ोसी राज्यों के समान रेट करके कैसे वैट संग्रह को बढ़ाया जा सकता है। - इशविंदर सिंह मोंगिया, अध्यक्ष पैट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन, मोहाली