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जिला सिविल अस्पताल में दवाइयों की कमी, मरीज उठा रहे हैं दिक्कत

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मोहाली। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि मरीजों को सरकारी अस्पतालों में फ्री में दवाइयां मुहैया करवाई जा रही हैं। वहीं अगर फेज-छह जिला सिविल अस्पताल की बात करें तो वहां पर कुछ दवाइयां ही फार्मेसी से मिलती हैं। शेष दवाइयों के लिए मरीजों को केमिस्ट शॉप पर जाने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इस बात का खुलासा सोमवार को अमर उजाला टीम के अस्पताल के दौरे के दौरान हुआ। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जो दवाइयां उनके पास मौजूद रहती है, वे मरीजों को देते हैं।
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सरकारी अस्पतालों में मरीजों को कुछ सामान्य बीमारियों की दवाओं मुफ्त में दी जाती हैं। जिला सिविल अस्पताल में 227 तरह की दवाइयां मुफ्त मुहैया करवाने की सुविधा है। इसके बावजूद सिर्फ 106 दवाएं ही मरीजों को मिल पा रही हैं। वहीं प्रधानमंत्री जन औषधि योजना में भी मरीजों को आधे भाव में आधी दवाएं ही मिल पाती हैं। इस कारण कुछ दवाएं मरीज को महंगे दाम में अस्पताल के बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं। हालांकि अस्पताल प्रबंधन की तरफ से दवाइयां मुहैया करवाने के लिए सरकार को पत्र भी लिखा जाता है लेकिन सात महीनों में गाड़ी ट्रैक पर नहीं आई है। डीसी से लेकर स्वास्थ्य मंत्री तक अस्पताल प्रबंधन को इस बारे में आगाह कर चुके हैं।
दवा कमी की समस्याएं सुनने को बनाई कमेटी भंग
जून में अमर उजाला ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने कमेटी बनाई थी। कमेटी का काम लोगों को दवाई संबंधी पेश आने वाली समस्याओं को सुनना था। पता चला है कि यह कमेटी अब भंग कर दी गई है। ऐसे में सिविल अस्पताल में आने वाले आम लोगों को धक्के खाने पड़ रहे हैं।
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दवाइयां संभालने के लिए उचित इंतजाम तक नहीं
जिला सिविल अस्पताल में मरीजों को दी जाने वाली दवाओं को उचित तरीके से नहीं रखा जा रहा है। एक शेड के नीचे दवाओं को रखा गया है। वहीं काफी दवाएं इसी बीच खराब भी हो रही हैं। जहां इन दवाओं को रखा गया है, वहां बारिश के पानी से बचाने के लिए तिरपाल लटकाई गई है। फिर भी बारिश का पानी इन दवाओं के डिब्बों तक पहुंच रहा हैं। दूसरी तरफ स्टोर में चूहों के होने की भी बात स्टाफ द्वारा कही गई है। दवाओं को लेकर अस्पताल की और से कोई सुरक्षा प्रबंध भी नहीं किए गए हैं।
दवाई बाहर से खरीदनी पड़ी
मेरी पत्नी गर्भवती हैं। रूटीन चेकअप के बाद डॉक्टर ने दवाएं लिखी। 100 नंबर कमरे में जहां मुफ्त दवाएं दी जाती हैं, वहां से सिर्फ एक ही मिली। वहीं जब जन औषधि में गए तो वहां भी तीन दवाओं में से दो ही मिली जो मेरे घर में पहले से थी। इसके अलावा एक दवा डॉक्टर ने नई लिखी है। उसे में अब बाहर से ही लूंगा। -अंशुल शर्मा, सेक्टर-57
अस्पताल में सिर्फ दो दवाइयां मिलीं
बेटी को तीन दिन से बुखार है। यहां लेकर आई तो डॉक्टर ने दवा लिखी। एक सरकारी फार्मेसी और दूसरी जन औषधि से मिली। वहीं एक दवा बाहर से लेकर आऊंगी। बेटी मेरे साथ है और उसे बुखार है। अगर एक जगह से ही दवाएं मिल जाएं तो कितना अच्छा हो। -बॉबी देवी, सेक्टर-56
केवल एक ही दवा मिली
मुझे स्किन की समस्या है। कई दिनों से शरीर पर जलन हो रही है। यहां डॉक्टर ने बिना टेस्ट ही मुझे दवाएं लिख दी हैं। सरकारी फार्मेसी और जन औषधि से तो एक ही दवा मिली। बाकी बचती दो दवाएं बाहर से लेने होंगी। पता नहीं, दवा कितनी महंगी होगी। -राज कुमारी, जुझार नगर
नहीं मिली दवाई, बाहर से खरीदनी पड़ी
मेरा वरिष्ठ नागरिक का कार्ड बना हुआ है और घुटनों की बीमारी से परेशान हूं। अब घुटनों में दर्द ज्यादा होने लगा है। घर से सिर्फ 150 रुपये ही लेकर आया था। मुझे एक भी मुफ्त दवा नहीं मिली। जन औषधि से जो दवा मिली, उसके लिए पूरे 150 रुपये लग गए। अब मेरे पास घर वापस जाने के पैसे तक नहीं है। आखिरकार बुजुर्गों के लिए मुफ्त दवा की सुविधा तो होनी चाहिए। -जगदीश सिंह, मलोया
कोट
मुफ्त दवाओं की सप्लाई के समस्या को लेकर जो कमेटी बनाई गई थी, वह भंग कर दी गई है। ऐसे में पंजाब स्वास्थ्य विभाग से जो दवाएं अस्पताल प्रशासन को मुहैया कराई जाएंगी, हमारा स्टाफ वही दे पाएगा। अगर कोई मरीज बाहर से दवा लेता है तो ऐसे मैं इस मसले में कुछ नहीं कह सकता हूं। -डॉ. परमिंदर सिंह, एमओ मेडिसिन कमेटी
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