रिटायरमेंट के बाद कहां रहेंगे लेफ्टिनेंट जनरल, इंटरव्यू में खोले राज
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लेफ्टिनेंट जनरल केजे सिंह रिटायरमेंट के बाद कहां रहना चाहेंगे, इस बारे में उन्होंने एक इंटरव्यू के दौरान खुलकर बातचीत की।दो साल पहले चंडी मंदिर में पोस्टिंग पर आया था। राजस्थान मेरी जन्मभूमि है। पर मेरी ज्यादा पोस्टिंग पंजाब के पटियाला और हरियाणा के अंबाला में रही है। सेना की पश्चिमी कमांड चंडी मंदिर में इससे पहले कभी किसी पोस्ट पर नहीं रहा, एक दो बार विजिट पर जरूर आया था। मेरा प्लान गुड़गांव (अब गुरु ग्राम) में सैटल होने का था, लेकिन चंडीगढ़, पंचकूला और मोहाली के लोगों ने जो प्यार और इज्जत दी, जिसे जीवन भर नहीं भूल पाऊंगा। यहां का प्यार, वातावरण और सहूलियतें देखकर मेरा मन बदल गया है। अब रिटायरमेंट के बाद चंडीगढ़ या पंचकूला ही मेरा शहर होगा। मैं यहां के लोगों को बहुत धन्यवाद देता हूं कि, आपके प्यार ने मेरा घर बदल दिया। पश्चिमी कमांड चंडीमंदिर के जीओसी इन सी (जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ) लेफ्टिनेंट जनरल केजे सिंह ने यह बात अमर उजाला से साझा की।
इस दौरान उन्होंने कहा कि आप भले कुछ मत लिखना यहां के लोगों के प्रति मेरा यह लगाव का संदेश जरूर पहुंचा देना। केजे सिंह मोहाली में बनाए गए केंद्रीय सैनिक सदन का उद्घाटन करने पहुंचे थे। इस मौके पर पंजाबी में चुटकी लेते हुए उन्होंने कहा कि जांदे-जांदे बहुत रिबन कटने पड़दे ने... उन्हें खुशी है कि देश के रक्षामंत्री ने लंबे समय से लटके केंद्रीय सैनिक सदन के प्रोजेक्ट को पूरा कराने में हर संभव मदद दी है। अत्याधिक सुविधाओं से लैस इस केंद्रीय सैनिक सदन का सैनिक भाइयों को पूरा सहयोग मिलेगा। जिक्रयोग है कि भारतीय सेना में लंबी सेवा देने के बाद केजे सिंह कुछ दिनों बाद सेवानिवृत्त हो जाएंगे।
वीरांगना ने यूं दर्द और खुशी साझा की
ये दर्द और खुशी सिख रेजीमेंट के वीर चक्र विजेता लांस हवलदार जोगिंदर सिंह की वीरांगना गुरमीत कौर ने अमर उजाला से बातचीत के दौरान साझा की। लेफ्टिनेंट जनरल केजे सिंह ने सैनिक सदन का उद्घाटन वीर चक्र विजेता जोगिंदर सिंह की वीरांगना गुरमीत कौर के हाथों से कराया। इस कार्यक्रम के बाद विशेष बातचीत में गुरमीत कौर ने बताया कि वीर चक्र मिलने के बाद सरदार जी को भी कभी इतना सम्मान नहीं दिया गया।
जुनून के आगे भाइयों की जिद हार गई
मोहाली के शाहीमाजरा निवासी सरदार जोगिंदर और उनके बड़े भाई बख्शीश सिंह वर्ष 1933 में रायल इंडिया ब्रिटिश आर्मी में भर्ती हुए थे। वीरचक्र विजेता अतीत को याद करते हुए बताया कि यह भर्ती कुराली में हुई थी। दोनों भाइयों में सेना में भर्ती होने का जुनून था। इस दौरान तय हुआ कि उनमें से एक घर में रहेगा। लेकिन दोनों की यह जिद सेना में भर्ती होने के जुनून के आगे हार गई। इसके बाद दोनों सेना में भर्ती हो गए। बख्शीश सिंह सूबेदार के पद से सेवानिवृत्त हुए, जबकि वीर चक्र मिलने के बाद सरदार जोगिंदर सिंह ने 1951 में भारतीय सेना से रिटायरमेंट ली।
1951 में कबाइलियों को दिया था मुंह तोड़ जवाब
एक नवंबर 1947 को लांस नायक सरदार जोगिंदर सिंह के प्लाटून श्रीनगर-बारामूला रोड पर गश्त के लिए भेजा गया था। इस दौरान कबाइलियों ने दोनों ओर से फायरिंग शुरू कर दी। जोगिंदर सिंह साथियों के साथ आगे बढ़े और उनके ऊपर आक्रमण कर दिया। इस दौरान चार कबाइलियों को ढेर कर दिया। इसके बाद कबाइली मोर्चा छोड़कर भाग गए। उनकी इस वीरता के लिए देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने उन्हें वीर चक्र से नवाजा था।