32 साल बाद परिवार को न्याय, तीन पुलिसकर्मियों को पांच-पांच साल की सजा
तरनतारन के एक व्यक्ति को अवैध रूप से हिरासत में रखकर कर दिया था गायब
7 अगस्त, 1991 के इसी मामले में चौथा आरोपी पुलिसकर्मी अदालत से भगोड़ा घोषित किया हुआ है
संवाद न्यूज एजेंसी
मोहाली। बुधवार को सीबीआई की विशेष अदालत ने 32 साल पुराने एक व्यक्ति को महिला से झपटमारी के आरोप लगाकर अवैध रूप से हिरासत में रखकर गायब करने के एक मामले में दोषी तीन पुलिसकर्मियों के खिलाफ फैसला सुनाया है। फैसले में अदालत ने तीनों पुलिसकर्मियों को दोषी मानते हुए इनको पांच-पांच साल कैद की सजा का एलान किया है। तीनों दोषियों की पहचान सूबा सिंह तत्कालीन थाना प्रभारी एसएचओ, निवासी अमृतसर, दलबीर सिंह तत्कालीन सब इंस्पेक्टर निवासी गुरदासपुर और तत्कालीन एएसआई रवेल सिंह निवासी अमृतसर के रूप में हुई है। वहीं, इसी मामले में चौथे पुलिसकर्मी एसएसआई कश्मीर सिंह को अदालत ने भगोड़ा घोषित कर दिया था।
जानकारी के मुताबिक 7 अगस्त, 1991 को झबाल पुलिस स्टेशन के उक्त पुलिस मुलाजिमों ने गांव मालोवाल निवासी बलजीत सिंह को अवैध रूप से गिरफ्तार किया था। इसके 10 दिन के बाद बलजीत सिंह थाने से गायब हो गया था। इसके बाद उक्त तीनों आरोपी पुलिसकर्मी बलजीत सिंह को हिरासत में लेने से से भी मुकर गए थे। हाईकोर्ट के आदेश के बाद मामले की जांच सीबीआई ने की थी। सीबीआई ने आरोपियों के खिलाफ विशेष अदालत में चार्जशीट दायर की थी। इस पर सुनवाई करते हुए बुधवार को अदालत में तीनों को दोषी ठहराया है। इन तीनों को पांच-पांच साल की सजा और अलग-अलग धाराओं में कुल दस-दस हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
घर का सामान खरीदने गया था बाजार
बलजीत सिंह की पत्नी ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में शिकायत दी थी कि उसका पति अपने भाई परमजीत सिंह के साथ 7 अगस्त, 1991 को नजदीक के कस्बे झबाल से सामान लेने गया था। सुबह करीब 10 बजे जब वह बस स्टैंड पर उतरा तो पुलिसकर्मी उसको अपनी जिप्सी में डालकर ले गए थे। इसके बाद अदालत ने जनवरी, 2006 में इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी।
बलवीर पर लगाए थे महिला से झपटमारी के आरोप
आरोपियों ने पीड़ित बलजीत सिंह को 10 दिन तक अवैध हिरासत में रखा था। आरोपियों ने उसके परिवार वालों को बताया था कि उसने एक महिला के कानों की बालियां झपटी हैं7 इसलिए उससे पूछताछ की जा रही है। इसके बाद वह थाने से गायब हो गया था। बलजीत का परिवार 16 अगस्त, 1991 को उससे थाने मिलने गया था, तब तक वह थाने में ही मौजूद था। 17 अगस्त को जब उसका भाई परमजीत सिंह थाने गया तो आरोपियों ने उसे हिरासत में लिए जाने से ही मना कर दिया था।
भाई को भी हिरासत में रखकर परिवार को धमकाया था
इस मामले में दोषी पुलिसकर्मियों ने कई बार बलजीत सिंह के परिवार को धमकाने की भी कोशिश की थी। इसके लिए दोषियों ने पीड़ित के भाई परमजीत सिंह को भी तीन बार अवैध हिरासत में रखा था। उसका एक भाई फौज में नौकरी करता है, इसलिए आर्मी अधिकारियों के दखल के बाद परमजीत सिंह को पुलिस ने छोड़ा था।