मोहाली। जिले में चल रही ट्रक ऑपरेटरों की हड़ताल ने औद्योगिक घरानों के बाद करियाना और फल-सब्जी आदि विक्रेताओं की चिंता बढ़ा दी है। हालात यह हैं कि बस ऑपरेटरों की हड़ताल के चलते माल की ढुलाई अभी छोटे ऑपरेटरों से हो रही है, लेकिन हड़ताल ऐसे ही चलती रही तो इसका सीधा असर रोजाना इस्तेमाल होने वाली चीजों पर पड़ सकता है।
जानकारी के मुताबिक, एक राज्य से दूसरे राज्य तक माल की ढुलाई ट्रक ऑपरेटर द्वारा की जाती है और हजारों की संख्या में ट्रकों की मदद से सामान का आदान-प्रदान होता है। साथ ही सबसे ज्यादा इस्तेमाल फल-सब्जी और करियाना आदि सामान का होता है। मोहाली जैसे वीआईपी जिले में सब्जी और फल विक्रेताओं का अधिकतर सामान अंबाला और चंडीगढ़ से सप्लाई होता है। इसी तरह, मल्टीनेशनल कंपनियों को स्टोर्स को छोड़कर छोटी करियाना के दुकानदारों को माल की सप्लाई ट्रकों के माध्यम से ही होती है। दूसरी ओर, ट्रक ऑपरेटर्स की हड़ताल का सीधा असर करियाना और सब्जी-फल विक्रेताओं पर पड़ता है। ऐसे लोगों का कहना है कि तीन-चार दिन तक तो इसका पता ही नहीं चलता। लेकिन हड़ताल अगर ज्यादा दिनों तक चलती है तो निश्चित रूप से इसका असर जरूर ग्रॉसरी की चीजों पर पड़ता है।
ये कहना है लोगों का
फल और सब्जियां हो जाती हैं महंगी
ट्रकों से माल की ढुलाई बंद होने का सीधा असर राशन की चीजोें, सब्जियों और फलों की सप्लाई पर पड़ता है। आमतौर पर स्टोर मालिकों की ओर से दो-तीन दिन का स्टॉक ही रखा जाता है। इसके बाद फल और सब्जियां महंगी हो जाती हैं। वहीं, अगर ट्रकों की हड़ताल ज्यादा दिन तक चली तो निश्चित रूप से आने वाले दिनों में फलों और सब्जियों के दामों पर असर पड़ेगा। - संजय यादव, फल विक्रेता।
ट्रकों से ही आता है करियाना का सामान
करियाना के सामान की ढुलाई ज्यादातर ट्रकों पर ही निर्भर होती है और अभी छोटी गाड़ियों से ही काम चलाया जा रहा है। अगर आगे भी हड़ताल जारी रही तो आने वाले दिनों में इसका असर ग्रॉसरी के सामान की ढुलाई पर पड़ेगा। -देसराज बांसल, शिव शक्ति ट्रेडर्स।