मोहाली। फेज-6 में स्थित डॉ. बीआर आंबेडकर स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस कॉलेज में नर्सिंग स्टाफ और अन्य विभागों के मुलाजिमों की हड़ताल से मरीजों और तीमारदारों को काफी दिक्कत उठानी पड़ रही है। हालात यह हैं कि अस्पताल में भर्ती किए गए मरीजों को डॉक्टरों की ओर से जबरदस्ती घर भेज दिया गया है। मंगलवार को जनरल वार्ड से लेकर कोविड वार्ड तक सब खाली रहे। दूसरी ओर इमरजेंसी सेवा जारी रखी गई है। इमरजेंसी में आने वाले गंभीर मरीजों को पीजीआई इमरजेंसी में रैफर किया जा रहा है।
जानकारी के मुताबिक पिछले एक महीने से मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में काम करने वाले कच्चे मुलाजिमों की ओर से उन्हें विभाग में स्थायी करने की मांग के साथ ग्रेड बढ़ाने और नर्सिंग ऑफिसर का दर्जा देने के लिए अस्पताल के ही बाहर बैठकर रोष प्रदर्शन किया जा रहा है। वहीं, डीएचएस और डीआरएमई के नर्सिंग स्टाफ के हड़ताल पर चले जाने से अस्पताल के सभी वार्ड मंगलवार को खाली करवा दिए गए हैं। इनमें जनरल वार्ड से लेकर, इंटेंसिव रूम जहां ऑक्सीजन की कमी वाले मरीज भर्ती होते हैं उन्हें ताला लगा दिया गया है। नर्स के हड़ताल पर चले जाने से मरीजों की देखभाल करने की जिम्मेदारी डॉक्टरों पर आ गई थी। इस पर डॉक्टरों की ओर से मरीजों को इमरजेंसी वार्ड में शिफ्ट होने को कहा गया, वहीं दूसरी ओर इमरजेंसी में बेड न होने के कारण हताश होकर मरीजों को अपने घरों को लौटना पड़ा, जिनमें कुछ मरीजों को ताजा जख्मों के ठीक होने से पहले ही घर जाना पड़ा।
फतेहगढ़ साहिब से आई, लेकिन नहीं बन पाई बात
घुटनों के दर्द से पिछले छह महीनों से जूझ रही हूं। 15 दिसंबर को मेरे एक घुटने की सर्जरी हुई थी। वहीं मंगलवार को मेरे दूसरे घुटने की भी सर्जरी होनी थी, लेकिन डॉक्टरों ने कहा कि नर्स हड़ताल पर हैं ऐसे में उनके घुटने की सर्जरी नहीं की जा सकती। साथ ही डॉक्टरों ने कहा कि या तो वह इमरजेंसी में भर्ती हो जाएं या फिर घर लौट जाओ। सरकार को मरीजों के बारे में कुछ सोचना चाहिए, क्योंकि बीमारी की हालात में इलाज हर कोई चाहता है। वहीं दूसरे घुटने के ऑपरेशन की तारीख दो हफ्ते बाद दी गई है ऐसे में ठंड में फतेहगढ़ साहिब से आना-जाना मुश्किल है। -मनिंदर कौर, फतेहगढ़ साहिब।
कई दिनों से टल रही सर्जरी
19 दिसंबर को मेरे दूसरे घुटने की सर्जरी होनी थी, लेकिन नर्सों की हड़ताल के कारण डॉक्टर ने मेरे दूसरे घुटने का ऑपरेशन टाल दिया। कुराली से मैं अपने बेटे के साथ यहां आई थी। चार दिन से अस्पताल स्टाफ हमें अच्छे से नहीं देख रहा था। कभी कोई आता है, तो कभी कोई। ऐसे में जिस वार्ड में मुझे रखा गया था, वहां से एक सफाई कर्मचारी ने सभी को सामान बांधकर इमरजेंसी में भर्ती होने के लिए कहा है। बेटे को इमरजेंसी में बेड नहीं मिला, ऐसे में अब हम घर लौट रहे हैं। अच्छा होता अगर दूसरे घुटने की भी सर्जरी हो जाती।
- बलविंदर कौर, कुराली।