मोहाली। कोरोना महामारी के दो वर्ष बाद बच्चे ऑफलाइन कक्षा लगाने के लिए स्कूल पहुंचे। इस दौरान बच्चों का स्वभाव थोड़ा अलग देखने को मिला। कक्षा में बच्चे जरूर थे परन्तु वे अब स्कूल में घर जैसी आजादी ढूंढ रहे हैं। घर जैसा माहौल न मिल पाने से बच्चे पढ़ाई से दूर भागने की कोशिश में लग रहे हैं। बच्चों के ऐसे स्वभाव को देखते हुए स्कूल प्रबंधक स्कूलों में काउंसलिंग क्लास लगा रहे हैं।
दूसरी ओर बच्चे जब स्कूल पढ़ाई करने पहुंचे तो ज्यादातर बच्चों का वजन बढ़ा हुआ था और खाने-पीने की आदत ज्यादा थी। ऐसे में बच्चों को पहले खेल गतिविधियों में लगाकर व्यायाम करवाया जाता है ताकि उनका वजन कम हो सके।
45 मिनट की काउंसलिंग से जान रहे कैसे पढ़ना चाहता है बच्चा
स्कूल में ऑफलाइन क्लास लेने आने वाले बच्चों को पहले 45 मिनट काउंसलिंग क्लास में रखा जाता है। काउंसलिंग के दौरान बच्चे की जांच होती है कि उसे पढ़ाई सुनकर करना अच्छा लगती है या विजुअल देखकर। उदाहरण के रूप में सभी बच्चों को एक क्लास में बिठाकर कहानियां सुनाई जाती हैं और साथ ही मोटिवेशनल सत्र का आयोजन किया जाता है। दोनों सत्र में भाग लेने वाले बच्चों को पढ़ाई करने की आदत लगाने के लिए विभिन्न प्रकार की गतिविधियों को आयोजन किया जाता है।
क्या कहते हैं काउंसलर
दो साल बाद बच्चे स्कूल ऑफलाइन क्लास लगाने पहुंचे लेकिन इनका स्वभाव बिल्कुल अलग था। बच्चों को घर जैसा माहौल देने के लिए पढ़ाई छोड़कर इनके साथ बातें की गईं। समय-समय पर कहानियां सुनाकर इनके माहौल को बदलने का प्रयास किया ताकि बच्चे में पढ़ाई का माहौल बनाया जा सके। -डॉ. नीतू भल्ला, काउंसलर
ज्यादातर बच्चों का वजन काफी बढ़ गया है इसलिए काउंसलिंग से पहले इन्हें व्यायाम करवाया जाता है। इसके बाद मोटिवेशनल सत्र का आयोजन किया जाता है। मोटिवेशनल कहानियां और वीडियो के माध्यम से बताया जाता है कि वे खुद को कमजोर न समझें। -डॉ. राशि निरवानी जैन, काउंसलर