चंडीगढ़ के जीएमसीएच-32 में कोरोना पीड़ित महिला का शव चार दिन तक मोर्चरी में पड़ा रहा। शव का अंतिम संस्कार करने के लिए परिवार चंडीगढ़ व डेराबस्सी अस्पताल के चक्कर काटता रहा लेकिन किसी ने उनकी मदद नहीं की। हद तो यह हुई कि अस्पताल ने स्ट्रेचर पर शव को रखकर परिवार से कहा कि खुद ही लपेटकर ले जाओ। न तो उन्हें पीपीई किट दी गई, न दस्ताने या मास्क। बाद में खरड़ की समाजसेवी संस्था पटवारी यूनियन आगे आई। संस्था के प्रधान हरविंदर सिंह ने शव का अंतिम संस्कार कराया।
मृतका के पति गुरमीत सिंह (जो खुद भी अधरंग की बीमारी से पीड़ित हैं) ने बताया कि कुछ दिन पहले उनकी पत्नी को कोरोना हो गया था। हालत बिगड़ने पर उसे सिविल अस्पताल डेराबस्सी में दाखिल करवाया था, जहां से उसे जीएमसीएच-32 में रेफर कर दिया। यहां उपचार के दौरान पत्नी की मौत हो गई। अस्पताल स्टाफ ने शव का अंतिम संस्कार कराने के लिए एसडीएम से लिखवा कर लाने के लिए कहा। किसी तरह वह एसडीएम से लिखवा कर लाए।
इसके बाद शव को ले जाने के लिए डेराबस्सी सिविल अस्पताल से एंबुलेंस लेने के लिए उनको जद्दोजहद करनी पड़ी। उधर, जीएमसीएच ने स्ट्रेचर पर शव रखकर दे दिया। वहां मौजूद स्टाफ ने शव को अपने आप लपेटकर ले जाने के लिए कहा। उन्होंने अस्पताल के स्टाफ से गुहार लगाई कि वह शव को कैसे हाथ लगा सकते हैं। लेकिन उन्होंने एक न सुनी।
गुरमीत सिंह ने कहा कि उनके एक दोस्त और कुछ अन्य मददगारों ने खुद ही शव को लपेटकर गाड़ी में रखा। इस दौरान न तो अस्पताल की ओर से उनको कोई सुरक्षा किट, दस्ताने या मास्क आदि दिए गए और न ही अस्पताल का कोई डॉक्टर या कर्मचारी शव के नजदीक आया। अस्पताल वालों ने मलकीत कौर की मौत होने के बाद यह तो लिखकर दे दिया है कि उसकी मौत कोरोना से हुई है परंतु रिपोर्ट अभी तक नहीं दी है।
पटवारी यूनियन के प्रधान हरविंद्र सिंह ने बताया कि पीड़ित परिवार ने स्वास्थ्य विभाग से रिटायर्ड सिविल सर्जन डॉ. दलेर सिंह मुल्तानी को इस बारे में जानकारी दी। इसके बाद उन्होंने परिवार से संपर्क किया था।