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लापरवाही: कोरोना पीड़िता का शव स्ट्रेचर पर रखकर परिवार से कहा- अब खुद ही ले जाओ लपेटकर

Tue, 18 Aug 2020 03:50 PM IST
मोहाली ब्‍यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, डेराबस्सी
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कोरोना संक्रमित का शव ले जाते परिजन - फोटो : अमर उजाला
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चंडीगढ़ के जीएमसीएच-32 में कोरोना पीड़ित महिला का शव चार दिन तक मोर्चरी में पड़ा रहा। शव का अंतिम संस्कार करने के लिए परिवार चंडीगढ़ व डेराबस्सी अस्पताल के चक्कर काटता रहा लेकिन किसी ने उनकी मदद नहीं की। हद तो यह हुई कि अस्पताल ने स्ट्रेचर पर शव को रखकर परिवार से कहा कि खुद ही लपेटकर ले जाओ। न तो उन्हें पीपीई किट दी गई, न दस्ताने या मास्क। बाद में खरड़ की समाजसेवी संस्था पटवारी यूनियन आगे आई। संस्था के प्रधान हरविंदर सिंह ने शव का अंतिम संस्कार कराया।
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मृतका के पति गुरमीत सिंह (जो खुद भी अधरंग की बीमारी से पीड़ित हैं) ने बताया कि कुछ दिन पहले उनकी पत्नी को कोरोना हो गया था। हालत बिगड़ने पर उसे सिविल अस्पताल डेराबस्सी में दाखिल करवाया था, जहां से उसे जीएमसीएच-32 में रेफर कर दिया। यहां उपचार के दौरान पत्नी की मौत हो गई। अस्पताल स्टाफ ने शव का अंतिम संस्कार कराने के लिए एसडीएम से लिखवा कर लाने के लिए कहा। किसी तरह वह एसडीएम से लिखवा कर लाए।

इसके बाद शव को ले जाने के लिए डेराबस्सी सिविल अस्पताल से एंबुलेंस लेने के लिए उनको जद्दोजहद करनी पड़ी। उधर, जीएमसीएच ने स्ट्रेचर पर शव रखकर दे दिया। वहां मौजूद स्टाफ ने शव को अपने आप लपेटकर ले जाने के लिए कहा। उन्होंने अस्पताल के स्टाफ से गुहार लगाई कि वह शव को कैसे हाथ लगा सकते हैं। लेकिन उन्होंने एक न सुनी।
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गुरमीत सिंह ने कहा कि उनके एक दोस्त और कुछ अन्य मददगारों ने खुद ही शव को लपेटकर गाड़ी में रखा। इस दौरान न तो अस्पताल की ओर से उनको कोई सुरक्षा किट, दस्ताने या मास्क आदि दिए गए और न ही अस्पताल का कोई डॉक्टर या कर्मचारी शव के नजदीक आया। अस्पताल वालों ने मलकीत कौर की मौत होने के बाद यह तो लिखकर दे दिया है कि उसकी मौत कोरोना से हुई है परंतु रिपोर्ट अभी तक नहीं दी है।

पटवारी यूनियन के प्रधान हरविंद्र सिंह ने बताया कि पीड़ित परिवार ने स्वास्थ्य विभाग से रिटायर्ड सिविल सर्जन डॉ. दलेर सिंह मुल्तानी को इस बारे में जानकारी दी। इसके बाद उन्होंने परिवार से संपर्क किया था।
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क्या कहते हैं नोडल अफसर

इस संबंधी सिविल अस्पताल के नोडल अफसर डॉ. विक्रांत ने बताया कि मलकीत कौर 11 अगस्त को सिविल अस्पताल में दाखिल हुई थी। 12 अगस्त को चंडीगढ़ रेफर किया गया था। जहां 13 अगस्त को रात को उनकी मौत हो गई। 14 अगस्त को अस्पताल की एंबुलेंस एक मरीज को पटियाला लेकर गई थी इस कारण उस दिन अंतिम संस्कार के लिए एंबुलेंस मुहैया नहीं कराई जा सकी।

अगले दिन सेक्टर-25 के विद्युत श्मशान घर में संस्कार के लिए समय मांगा गया था परंतु वहां से कहा गया कि संस्कार बलौंगी के विद्युत श्मशान घर में ही होगा। 16 अगस्त को सुबह पहले एक और मरीज का अंतिम संस्कार था, जिसके बाद मलकीत कौर के संस्कार के लिए बलौंगी में दोपहर बाद चार बजे का समय मिला था। इसके अनुसार एंबुलेंस भेजी गई थी और मलकीत कौर का अंतिम संस्कार किया गया।

अस्पताल प्रबंधन का पक्ष नहीं आया सामने
इस मामले में अस्पताल प्रबंधन का पक्ष जानने के लिए अमर उजाला ने जीएमसीएच-32 के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट रवि गुप्ता और कोरोना के नोडल अधिकारी डा. हरीश दसारी को फोन किया लेकिन फोन उठाया नहीं गया। इसके बाद उन्हें मैसेज भी किया गया लेकिन देर रात तक उनका कोई उत्तर नहीं मिला। जब भी उनका पक्ष आएगा उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।
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