29 साल पुराने पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी से जुड़े मामले में चंडीगढ़ के दो पूर्व पुलिस मुलाजिमों जागीर सिंह व अनोख सिंह को अदालत ने थोड़ी राहत दी है। अदालत ने पुलिस को आदेश दिए हैं कि जब भी इस मामले में आरोपियों के खिलाफ धारा-302 जोड़ी जाएगी, तो इस संबंध में तीन दिन पहले उन्हें सूचित करना होगा। इस मामले पर काफी समय से सुनवाई चल रही थी।
जानकारी के मुताबिक, 29 साल पहले एक सीनियर आईएएस के बेटे बलविंदर सिंह मुल्लानी के अहपरण मामले में इसी साल मटौर थाने में पंजाब पुलिस के पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी समेत सात लोगों पर केस दर्ज किया गया था। अन्य सारे आरोपी चंडीगढ़ पुलिस के उस समय के मुलाजिम थे। इनमें से दो पूर्व पुलिस कर्मियों जागीर सिंह व अनोख सिंह की तरफ से अदालत में एक याचिका दायर की गई थी। इसमें उन्होंने कहा था कि यदि केस में पुलिस धारा 302 लगाती है तो उन्हें अग्रिम जमानत दी जाए।
अदालत ने सुनीं दोनों पक्षों की दलीलें
अदालत ने इन सभी पहलुओं पर दोनों पक्षों की दलीलों को सुना। इसके बाद इस मामले में पुलिस को आदेश दिए कि जब भी इस मामले में धारा 302 लगाई जाए तो उससे तीन दिन पहले दोनों पुलिस कर्मियों को सूचित किया जाए। हालांकि इस मामले में पंजाब के पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी को जमानत मिल चुकी है। उन्होंने पंजाब पुलिस द्वारा गठित एसआईटी के समक्ष पेश होकर जांच ज्वाइन कर ली है। इतना ही नहीं उन्होंने भी केस में धारा 302 लगने पर अग्रिम जमानत के लिए याचिका लगाई थी। हालांकि अदालत ने पुलिस को उन्हें भी धारा 302 लगाने से पहले सूचित करने को कहा था।
ये है मामला
जिक्रयोग है कि यह मामला 1991 का हुआ है। जब सैनी चंडीगढ़ के एसएसपी के पद पर तैनात थे। उस समय उन पर आतंकी हमला हुआ था। इस दौरान उनके चार सुरक्षा कर्मियों की मौत हो गई थी जबकि उनका बचाव हो गया था। इसके बाद फेज-सात मोहाली से बलविदंर सिंह मुल्तानी को पुलिस उठाकर ले गई थी। इस पर पहले मामला सुप्रीम कोर्ट तक गया था। हालांकि कुछ समय पहले सैनी के साथ रहे पुलिस कर्मी ने एक पत्रिका को इंटरव्यू दिया था जिसमें उन्होंने मुल्तानी का जिक्र किया था। इसके बाद मुल्तानी के परिजनों ने केस दर्ज करवाया था।