मोहाली। स्कूल खुल गए हैं, लेकिन आपके बच्चे कोरोना महामारी से कितने सुरक्षित हैं, इसकी जानकारी जरूर रखिए। सेहत विभाग जांच कर रहा है और प्रशासन प्रयास कर रहा है। बस जरूरत है अभिभावकों को सतर्क रहने की। सेहत विभाग का यहीं कहना है कि कोरोना से बचने के लिए सभी अपनी जिम्मेदारी निभाएं और खुद को और दूसरों को तीसरी लहर से बचाएं। बुधवार को सेहत विभाग की टीम ने जिले में पांच स्कूलों में औचक निरीक्षण करके कोरोना गाइडलाइन का उल्लंघन पाए जाने पर चार स्कूलों को बंद करवा दिया है। इनमें से कइयों में ज्यादा बच्चे पाए गए और कुछ में स्कूल स्टाफ ने दोनों टीके नहीं लगवाए हुए थे। सरकार 2 अगस्त से प्री-प्राइमरी को छोड़कर सभी कक्षाओं के लिए स्कूल खोलने का आदेश दे चुकी है। इस आदेश के साथ कुछ शर्तें भी जुड़ी हुई हैं। जिनका पालन न कर बच्चों के जीवन को खतरे में डालने वाले स्कूलों पर गाज गिरनी शुरू हो गई है।
मोहाली शहर, कुराली और जीरकपुर में चार स्कूलों को अगले आदेशों तक बंद कर दिया गया। इन स्कूलों में स्टाफ का 100 फीसदी टीकाकरण नहीं हुआ था। मोहाली के एक स्कूल की प्रिंसिपल ने टीकाकरण की एक खुराक भी नहीं ली थी। वहीं, कुराली के एक स्कूल में बच्चों की उपस्थिति 80 फीसदी से भी ज्यादा थी। कोरोना काल में पहले लॉकडाउन के बाद स्कूल खोले गए थे, लेकिन तब स्कूलों को लेकर सरकार की तरफ से स्पष्ट दिशा निर्देश जारी नहीं हुए थे। अब महामारी की दूसरी लहर के बाद जब स्कूल खोले गए हैं, तो सरकार ने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा के मद्देनजर कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करनवाने पर जोर दिया हुआ है। स्कूल स्टाफ का 100 फीसदी टीकाकरण भी इन्हीं शर्तों में शामिल है। इसके साथ ही स्कूल में 50 फीसदी उपस्थिति की ही अनुमति है। जिसमें एक डेस्क पर एक विद्यार्थी को बैठाने और एक कक्ष में 30-35 विद्यार्थियों की सीमित संख्या ही रखने जैसी शर्त भी शामिल है। बुधवार को मोहाली, खरड़ और डेराबस्सी के एसडीएम ने स्कूलों की औचक जांच की। जिसके बाद जिले की इन तीनों सब-डिवीजन में चार स्कूलों को बंद करने का आदेश जारी कर दिया गया। तीनों सब-डिवीजन के एसडीएम ने शिक्षा विभाग की टीमों के साथ स्कूलों की औचक जांच की।
एसडीएम मोहाली हरबंस सिंह सेक्टर-71 के जितेंद्र वीर सर्वहितकारी मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल और स्मार्ट वंडर स्कूल में जांच के लिए पहुंचे। इन स्कूलों में जब स्टाफ के टीकाकरण रिकार्ड की जांच की गई तो पता चला कि सर्वहितकारी स्कूल की प्रिंसिपल कविता अत्री ने खुद ही टीकाकरण नहीं करवाया है। इसी स्कूल के सात अन्य अध्यापकों ने वैक्सीन की सिर्फ एक ही डोज ली थी। जबकि छोटे बच्चों को संभालने वाली आया व सफाई कर्मचारियों का टीकाकरण हुआ ही नहीं था। जिसके चलते एसडीएम मोहाली ने सर्वहितकारी स्कूल को अगले आदेशों तक बंद करने के निर्देश जारी कर दिए। वहीं, जांच में स्मार्ट वंडर स्कूल का रिकार्ड ठीक पाया गया।
कोरोना प्रोटोकॉल को लेकर एसडीएम खरड़ आकाश बांसल ने कुराली के डीएवी मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल की जांच की। इस स्कूल में भी स्टाफ का 100 फीसदी टीकाकरण नहीं हुआ था। स्टाफ के 18 कर्मचारियों ने वैक्सीन की सिर्फ एक ही डोज ली थी। इस स्कूल में विद्यार्थियों की उपस्थिति भी 80 फीसदी से ज्यादा थी। जबकि सरकारी निर्देशों के अनुसार स्कूल में 50 फीसदी बच्चों की उपस्थिति का ही नियम है।
बुधवार को ही एसडीएम डेराबस्सी कुलदीप बावा और नोडल अधिकारी ऋषभ गर्ग ने जीरकपुर के दिल्ली वर्ल्ड पब्लिक स्कूल और एक अन्य निजी स्कूल की जांच की। इन दोनों स्कूलों में भी स्टाफ का 100 फीसदी टीकाकरण नहीं हुआ था। निजी स्कूल के 52 कर्मचारियों ने वैक्सीन की सिर्फ एक ही डोज ली थी। वहीं, दिल्ली वर्ल्ड पब्लिक स्कूल स्टाफ के 27 कर्मचारियों ने वैक्सीन की दूसरी डोज नहीं ली थी। एसडीएम डेराबस्सी ने भी अगले आदेशों तक तत्काल प्रभाव से दोनों स्कूलों को बंद करने के निर्देश जारी कर दिए।
प्रिंसिपल ने ही नहीं ली थी वैक्सीन की एक भी डोज
स्टाफ तो स्टाफ सेक्टर-71 के जितेंद्रवीर सर्वहितकारी स्कूल की प्रिंसिपल ने ही वैक्सीन की एक भी डोज नहीं ली थी। जो नियमों का बड़ा उल्लंघन है। वहीं, जीरकपुर के एक निजी स्कूल के 52 कर्मचारी ऐसे मिले जिन्होंने वैक्सीन की एक ही डोज ली थी। उधर, कुराली के डीएवी स्कूल में बच्चों की उपस्थिति 80 फीसदी से भी ज्यादा थी। इन नामचीन निजी स्कूलों में कोरोना नियमों की इस घोर लापरवाही से बच्चों की सेहत खतरे में आई।
कोट्स
सेहत विभाग की ओर से बंद करवाए गए चारों स्कूलों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के लिए जिला पुलिस को कहा गया है। हमने पुलिस को इन स्कूलों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के लिए भी कहा है। इन स्कूलों ने वैक्सीन की दोनों डोज न लेने वाले अध्यापकों और स्टाफ कर्मचारियों को बुलाया। जिससे बच्चों की सेहत को खतरा पैदा हुआ। कोरोना महामारी काल के दौरान स्कूल खोलने के निर्देश शर्तों के साथ जारी किए गए थे। इन स्कूलों ने नियमों का उल्लंघन किया है। - गिरीश दयालन, डीसी मोहाली।