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बिजली-न ठंडा पानी, स्मार्ट स्कूल की यही कहानी

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मोहाली। सरकारी स्कूलों को स्मार्ट स्कूल का दर्जा हासिल है लेकिन हालत ऐसी है कि लाइट चली जाने पर कक्षाओं में लगे पंखे तक बंद हो जाते हैं। इस कारण बच्चों को पढ़ाई में दिक्कत होती है। बुधवार को अमर उजाला ने सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल का दौरा करके बुनियादी सुविधाओं की हकीकत जानी।
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सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल में 6वीं से 12वीं तक के करीब 450 विद्यार्थी पढ़ते हैं। स्कूल में बेंचों की पूरी व्यवस्था है और छात्रों को पढ़ाने वाले शिक्षक भी पूरे हैं। वहीं स्कूल में पढ़ने के लिए आने वाले छात्र और शिक्षक आजकल बिजली जाने के कारण गर्मी का सामना कर रहे हैं।
समाजसेवी संस्थाओं ने छात्रों की सुविधा को देखते हुए यहां ठंडे पानी का वॉटर कूलर लगवाया था लेकिन रखरखाव न होने से खराब होकर बंद पड़ा है। इस दौरान गर्मी में छात्रों को प्यास बुझाने के लिए सामान्य पानी का सहारा लेना पड़ रहा है। दूसरी ओर गांव की पंचायत ने इस संबंध में कार्रवाई शुरू कर दी है। संवाद
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नहीं कोई ट्रांसपोर्ट की सुविधा
अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के पास स्थित बाकरपुर का नाम महंगे गांवों की श्रेणी में आता है लेकिन प्रशासन की अनदेखी के चलते बस सुविधा तक नहीं। शिक्षकों को स्कूल तक पहुंचने के लिए खुद के वाहन या निजी कैब से आना-जाना पड़ता है। खास बात यह है कि गांव बाकरपुर को जाने वाली सड़क की चौड़ाई मात्र 8 फुट है। इस दौरान एक कार अगर आ जाए तो सामने से आने वाले व्यक्ति को कच्चे रास्ते पर उतरना पड़ता है।
जनरेटर की व्यवस्था हो जाए तो दिक्कत होगी दूर
नौवीं में बाकरपुर के स्कूल में दाखिला लिया। यहां शिक्षकों द्वारा कक्षाओं में जो पढ़ाया जाता है, वह अच्छी तरह से समझ आता है। गर्मी में बिजली जाने से पढ़ाई में जरूर दिक्कत आती है। यदि जनरेटर की व्यवस्था हो जाती है तो स्कूल में बिजली की दिक्कत खत्म हो जाएगी। हर्षवीर सिंह, छात्र
वॉटर कूलर का इंतजाम करे विभाग
वॉटर कूलर की कमी सर्दी के मौसम में तो नहीं खलती लेकिन गर्मी के सीजन में ठंडे पानी की जरूरत पड़ती है। जैसे-जैसे गर्मी बढ़ेगी तो पानी की मांग में वृद्धि होगी। विभाग को जल्द वॉटर कूलर लगवाकर पानी के उचित इंतजाम करने चाहिए। इरफान खान, छात्र
क्या कहते हैं अधिकारी
स्कूल में पढ़ाई को लेकर कोई समस्या नहीं लेकिन आजकल बिजली के कट ज्यादा लगने से मुश्किल होती है। विभाग को स्कूल में जनरेटर के इंतजाम को लेकर एक प्रस्ताव बनाकर भेजा हुआ है जिसे अभी मंजूरी नहीं मिली। इसके अलावा वॉटर कूलर न होने से छात्रों को सामान्य पानी पीकर काम चलाना पड़ता है। इसके लिए गांव की पंचायत से सहयोग मांगा गया है। -दमनजीत कौर, प्रिंसिपल, सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल, बाकरपुर
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