मोहाली। कोरोना की चौथी लहर से निपटने के लिए सेहत विभाग तैयारियां पूरी होने का दावा करता है लेकिन गंभीर मरीजों की सांसों की दिक्कत से बचाने के लिए फेज-छह स्थित डॉ. बीआर आंबेडकर इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ साइंसेज में तीन पीएसए (प्रेशर स्विंग एब्सार्पशन यानी हवा से ही ऑक्सीजन बनाने वाले) प्लांट काम नहीं कर पा रहे हैं। प्रदेश में चल रहे बिजली संकट के कारण ऐसा हुआ है। मेडिकल कॉलेज के तीनों ऑक्सीजन प्लांट सफेद हाथी बनकर ही रह गए हैं जबकि प्रशासन द्वारा सिलिंडर वाले ऑक्सीजन प्रयोग किए जा रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज में बिजली की दिक्कत को दूर करने के लिए दो ट्रांसफार्मर की सुविधा थी। इनमें से एक ट्रांसफार्मर दो महीने पहले जल गया। अब सिर्फ एक ट्रांसफार्मर के साथ ही काम चलाया जा रहा है। ऐसे में अस्पताल का सारा सिस्टम ठप न हो जाए। इस संबंधी कोई रिस्क सेहत विभाग नहीं लेना चाहता है। इसके अलावा एलएमओ की सुविधा भी नहीं है। ऐसे में ऑक्सीजन सिलिंडरों के सहारे ही सारा काम चल रहा है। ऑक्सीजन कंट्रोल रूम में 90 सिलिंडर का बैकअप रखा गया है। इनमें 16-16 सिलिंडर आठ-आठ घंटे के लिए काम करते हैं। इसका कनेक्शन एमसीएच और इमरजेंसी के साथ जोड़ा गया है।
मेडिकल कॉलेज में लगाए गए तीन पीएसए प्लांटों में से डीआरडीओ वाले को ही प्रयोग में ला जा रहा है जो कि अत्याधुनिक है। इसके अलावा मेडिकल कॉलेज में 13 हजार की एक लिक्विड कॉयल है। वहीं मौजूद समय में 176 नेशनल डी टाइप सिलिंडर बैकअप के लिए काम कर रहे हैं।
कोरोना के आने से बने आईसीयू वार्ड और ऑक्सीजन प्लांट
याद रहे कि जब कोरोना ने दस्तक दी थी तो उस समय में मोहाली के किसी भी सरकारी अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट की सुविधा नहीं थी। यहां तक की सरकारी अस्पताल में आईसीयू वार्ड तक की सुविधा नहीं थी। इसके बाद गंभीर मरीजों को पटियाला के राजिंद्रा अस्पताल या पीजीआई रेफर किया जाता था। हालांकि बाद में सेहत विभाग ने इस दिशा में काम किया। साथ ही समाजसेवी संस्थाओं के सहयोग से ऑक्सीजन प्लांट से लेकर आईसीयू वार्ड तक स्थापित किए। इसके अलावा सेना की मदद से भी 100 बेड का मेक शिफ्ट अस्पताल स्थापित किया गया था।
क्या कहते हैं अधिकारी
मेडिकल कॉलेज में बिजली की सप्लाई पहले के मुकाबले बढ़ गई है। इसके चलते पीएसए प्लांट का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। वहीं इन प्लांट को चलाने के लिए जो सिस्टम चाहिए होता है, उसमें अभी काफी काम होना बाकी है। एक अलग ट्रांसफार्मर के साथ प्लांट को कंट्रोल करने वाले तंत्र तक का काम बाकी है जो धीरे-धीरे ही पूरा होगा। -भवनीत भारती, डायरेक्टर ऑफ प्रिंसिपल मेडिकल कॉलेज