मोहाली। सांसद मनीष तिवारी की कोशिशें रंग लाईं और डिफाल्टर बिल्डरों की जांच के लिए एसआईटी बन गई। एसएसपी सतिंदर सिंह ने यह एसआईटी बनाई है। अब पुलिस अवैध कॉलोनियों के मामलों की जांच करेगी। उधर, सांसद तिवारी ने ट्विट कर बड़े डिफाल्टर बिल्डर्स को असली शार्क बताते हुए, इनके खिलाफ शिकायतें मांगने के लिए सार्वजनिक नोटिस जारी करने की बात कही है।
एसआईटी बनने के बाद अब पुलिस अवैध कालोनियों की जांच करेगी। खरड़ और न्यू चंडीगढ़ में अवैध कॉलोनियों के सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं। एसआईटी की कमान एसपी (ग्रामीण) रवजोत कौर ग्रेवाल को सौंपी गई है। ग्रेवाल के अलावा एसआईटी में दो डीएसपी मंजीत सिंह और जोगिंदर पाल सिंह को भी सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।
बता दें कि लगभग दो सप्ताह पहले खरड़ में गैर कानूनी कॉलोनियों का निर्माण कर लोगों को फ्लैट्स और मकान बेचने के आरोप में 48 प्रॉपर्टी डीलर्स/बिल्डर्स पर मामला दर्ज किया गया था। दो साल में ये दूसरी कमेटी बनी है जो इस तरह के मामलों को देखेगी। पिछले साल अक्तूबर में मोहाली के डीसी गिरीश दियालन ने बुनियादी सुविधाओं के प्रावधान के लिए प्रोमोटर्स और बिल्डरों के खिलाफ जनता की शिकायतों के निवारण के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन किया था। समिति की अध्यक्षता मोहाली के अतिरिक्त उपायुक्त (सामान्य) ने की थी। कमेटी में एक पुलिस अधीक्षक (एसएसपी द्वारा नामित), गमाडा के अतिरिक्त मुख्य प्रशासक और नगर परिषदों और नगर निगम के ईओ थे। सहायक आयुक्त (शिकायत) सदस्य सचिव थे। लेकिन इस कमेटी की एक भी बैठक नहीं हुई। नतीजा ये रहा कि अवैध कॉलोनियां बनाने वालों के हौसले बुलंद हो गए और कोविड के बीच जमकर अवैध कब्जे कर डाले। उक्त कमेटी की कोई बैठक न होने के कारण भी कोविड महामारी ही बताया जा रहा है।
श्री आनंदपुर साहिब के सांसद मनीष तिवारी की ओर से जिले में रियल एस्टेट माफिया का मुद्दा उठाने के बाद एसआईटी का गठन हुआ है। सांसद तिवारी ने मुख्यमंत्री के सामने भी यह मुद्दा उठाया था। जिसके बाद से कमेटी गठित होने की बात कही जा रही थी। खरड़ क्षेत्र के झांमपुर, बड़माजरा और बहलोलपुर गांवों में अनधिकृत आवासीय कॉलोनियां विकसित हो रही हैं। करीब 15 अवैध कॉलोनियां ऐसी हैं जो बिना ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (गमाडा) की अनुमति के बनी हैं। यहां कोई चेंज ऑफ लैंड यूज (सीएलयू) नहीं किया गया है। सांसद मनीष तिवारी ने एक ट्विट कर बड़े बिल्डर्स को असली शार्क करार देते हुए इनकी जांच का मुद्दा उठाया है। सांसद ने एसआईटी से सार्वजनिक नोटिस जारी कर पीड़ितों, अपार्टमेंट्स और फ्लैट मालिकों से शिकायतें आमंत्रित करने का आह्वान किया है।