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ऑडिटोरियम न होने की वजह से कलाकारों और लेखकों को करना पड़ता है चंडीगढ़ का रुख

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मोहाली। वीआईपी शहर को अपने देश ही नहीं, बल्कि विदेश में कलाकारों, साहित्यकारों, लेखक और गायकों की वजह से पहचान मिलती है। महीने में 40-50 किताबों का विमोचन होता है। इसके अलावा कला प्रदर्शनी और अन्य समागम भी आयोजित किए जाते हैं। लेकिन शहर में ऑडिटोयिम न होने के कारण इन लोगों को बड़ी दिक्कत उठानी पड़ती है। कलाकारों को या तो धार्मिक स्थलों के हाल या फिर प्राइवेट स्कूलों के ऑडिटोरियम में समागम करने पड़ते हैं। कई बार तो ऐसी हालत हो जाती है कि अच्छी लोकेशन न मिल पाने की वजह से मुख्य मेहमान तक बुलाने में दिक्कत आती है। जबकि कोरोना काल में यह समस्या और बढ़ गई है।
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कलाकारों की मानें तो ऑडिटोरियम बनाने के मामले को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। इससे उनके शहर को अलग पहचान मिलेगी। इतना ही नहीं अगर सरकारी संस्था ऑडिटोरियम बनाती है तो उसका खर्च भी आसानी से निकल जाएगा।
ऑडिटोरियम शहर की जरूरत, सरकार को देना होगा ध्यान
फेज-1 निवासी दिल्ली साहित्य अकादमी और पंजाब भाषा विभाग से सम्मानित
लेखक मनमोहन सिंह दाऊं ने बताया कि पंजाबी साहित्य को समर्पित लेखकों और पाठकों की गिनती चंडीगढ़ के मुकाबले मोहाली में अधिक है। इस संख्या को देखते हुए हम लोगों ने समय की हर सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों से लेखक मंडली के लिए जगह की मांग भी की है। उन्होंने कहा कि यहां ऑडिटोरियम न होना कलाकारों और साहित्यकारों के पास चंडीगढ़ ही एक विकल्प रह जाता है। उन्होंने कहा कि इस समय शहर में एक ऑडिटोरियम की बड़ी जरूरत है। प्रशासन को चाहिए कि इस दिशा में काम किया जाए।
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कला के लिए यह हमारा जरूरी हक
पंजाबी लेखिका दलजीत कौर दाऊं ने ऑडिटोरियम को लेखक और कलाकारों का जरूरी हक बताया है। उनका मानना है आज की तारीख में मोहाली में बड़े पार्क, कॉलेज, खेल स्टेडियम, बड़ी-बड़ी कारोबारी बिल्डिंग जैसी हर सुविधा है लेकिन कला और साहित्य के क्षेत्र में एक भी इमारत मोहाली में नजर नहीं आती। वहीं एक लेखक को किताब की प्रदर्शनी के लिए चंडीगढ़ के ऑडिटोरियम का सहारा लेना पड़ता है। उन्होंने बताया कि स्थानीय प्रशासन से मोहाली के लेखक समुदाय पिछले 15-16 साल से मांग कर रहा है कि लेखकों और कलाकारों के लिए चंडीगढ़ की तर्ज पर ऑडिटोरियम बनाया जाए। जिसे संभालने का जिम्मा लेखक समुदाय का ही होगा। वहीं इसमें बनने वाले पुस्तकालय की किताबें तक हमारी ओर से मुफ्त दी जाएंगी।
लेखक संजीवन सिंह मोहाली के फेज-10 के रहने वाले हैं। उन्होंने बताया कि हमारा समूह सरगी कला केंद्र मोहाली, लंबे समय से कला और साहित्य से जुड़ा हुआ है। हालांकि हमारे समूह को लगभग 20 साल पहले पंजाब सरकार और मोहाली में गमाडा द्वारा सेक्टर 67, में दो कनाल प्लॉट आवंटित किया गया था। लेकिन बाद में सरकार बदलने के साथ इसे रद्द कर दिया गया था। इस कारण मोहाली को अपना कला केंद्र नहीं मिल पाया। वहीं लेखकों को निजी स्कूलों के ऑडिटोरियम का भारी किराया चुकाने पड़ता है। जिसकी कुछ घंटों की कीमत 50 से 30 हजार होती है ऐसे में लेखकों के पास चंडीगढ़ के कला भवन का ही रास्ता बचता है।
सरकार जल्दी दे ऑडिटोरियम का तोहफा
साहित्य विज्ञान केंद्र के प्रधान रियात सिंह ने बताया कि उनकी संस्था के साथ कई लोग जुड़े हुए हैं। महीने के आखिरी रविवार को उनकी ओर से 3बी1 के खालसा कॉलेज में मीटिंग की जाती है। मोहाली में ऑडिटोरियम की मांग लंबे समय से चली आ रही है। लेकिन पंजाब सरकार ने कभी नहीं चाहा के पंजाब कला और साहित्य के क्षेत्र में आगे बढ़ें। आज के समय में पंजाब के शहरों में जो ऑडिटोरियम बनाए गए हैं, वे निजी तौर पर पैसा खर्च करके बनाए हैं। ऐसे में जहां अब मोहाली को नया मेयर मिल चुका है। तो उनसे हमारी एक ही मांग की है कि मोहाली को ऑडिटोरियम का तोहफा दिया जाए। ताकि साहित्य, कला प्रेमियों को फायदा मिल पाए।
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