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शहर की डिस्पेंसरीज में सभी सेहत सुविधाएं नहीं मिलने से लोगों में निराशा

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मोहाली। चंडीगढ़ की तर्ज पर शहर के हर हिस्से में लोगों तक सेहत सुविधाएं मुहैया करवाने के लिए हर फेज में एक डिस्पेंसरी खोली गई है। वहीं, इनमें विशेषज्ञ डॉक्टरों के अलावा होम्योपैथी और आयुर्वेद के डॉक्टरों की व्यवस्था भी की गई है। लेकिन यह सब सुविधाएं सिर्फ नाम की ही होकर रह गई हैं। आलम यह है कि सेहत विभाग की ओर से बनाई गई डिस्पेंसरीज में डॉक्टर से लेकर दवाईयों के लिए बने कमरे तक खाली पड़े हैं।
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जानकारी के मुताबिक शहरवासियों को फेज-6 स्थित जिला सिविल अस्पताल न जाना पड़े, इसके लिए विभाग की ओर से चार अर्बन डिस्पेंसरीज बनाई गई हैं। यह डिस्पेंसरीज फेज-11, फेज-7 फेज-1 फेज-3बी1 में मौजूद हैं, लेकिन इनमें आने वाले मरीजों को सामान्य सुविधाएं ही दी जा रही हैं। जबकि गंभीर बीमारी से परेशान मरीजों को इलाज के लिए सिविल अस्पताल जाना पड़ता है। वहीं, लोगों को सेहत सुविधाओं को लेकर डिस्पेंसरीज में आ रही परेशानियों को देखते हुए अमर उजाला की ओर से डिस्पेंसरीज का निरीक्षण किया गया और सेहत सुविधाओं को लेकर डिस्पेंसरी में इलाज करवाने के लिए आने वाले लोगों से बातचीत भी की।
शहर के सभी फेज में स्थित डिस्पेंसरीज के दौरे में अधिकतर डॉक्टर छुट्टी पर ही मिले और जहां डॉक्टर मौजूद थे वह किसी ओर की जगह पर ड्यूटी दे रहे थे। इस संबंधी पूछने पर बताया गया कि कुछ डॉक्टर आज छुट्टी पर हैं, लेकिन रोज आने वाले मरीजों को एएनएम की ओर से दवा दी जा रही हैं। वहीं, फेज-7 स्थित डिस्पेंसरी में कुल 13 तरह के टेस्ट की सुविधा फाइलों तक सीमित है, लेकिन अभी मरीजों के 4-5 तरह के टेस्ट किए जाते हैं। आलम यह है कि टेस्ट के लिए सामान की भारी कमी है और टेस्ट के लिए लिए गए खून के सैंपल को रखने के उपकरण नहीं हैं, जिनको बाद में फेज-6 में भेजा जाता है।
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न सफाई न मरीज देखने की सुविधा
जनवरी में मैंने कोरोना की दूसरी डोज लगवानी थी, लेकिन डिस्पेंसरी में आई तो यहां पर न तो डोज लगी और न ही मुझे वहां कोई सुविधा मिली। जबकि यह डिस्पेंसरी मुख्य सड़क पर है और इसमें न सफाई है और न ही गंभीर मरीजों को देखने की सुविधा। कहने को यहां 9 से अधिक का स्टाफ मौजूद है, लेकिन वह प्राथमिक सेवाएं मुहैया करवाते हैं। जबकि अगर मरीज जगतपुरा या सेक्टर-82 से इलाज करवाने आ जाए तो उसे रैफर ही किया जाता है। -अदिति शर्मा, निवासी, फेज-11, मोहाली।
फेज-7 की डिस्पेंसरी में नहीं महिला डॉक्टर
मेरे घर से फेज-7 की डिस्पेंसरी पास पड़ती है और हालत ऐसी है कि फेज-7 की डिस्पेंसरी में कोई महिला डॉक्टर नहीं है। इसलिए मुझे फेज-3बी1 और फेज-6 जाने के लिए बोल दिया जाता है। जबकि स्थिति यह है कि 3बी1 में अभी अस्पताल बन रहा है और वहां मरीज नहीं आ रहे हैं। ऐसे में इलाज के लिए फेज-6 जाती हूं। लेकिन जब यहां पहुंची तो डॉक्टर ने दवाईयों की लंबी लिस्ट लिख दी, जो सेहत केंद्र की मुफ्त दवाओं में से एक मिली है। जबकि बाकी दवाइयां बाहर से खरीदनी पड़ी। -आशा कुमारी, निवासी मटौर।
मेरे अक्सर बीमार रहने के कारण इलाज लगातार चल रहा है। इससे पहले डिस्पेंसरी में मुफ्त दवाईयां और टेस्ट हो जाते थे। लेकिन अब डिस्पेंसरी बीते तीन साल से बंद पड़ी है। एक समय था जब शाम को भी डिस्पेंसरी में इलाज मिल जाता था, क्योंकि यहां टेस्ट के साथ-साथ दवाई मिल जाती है। लेकिन जब सेक्टर-74 से यहां दूर आना पड़ता है और महंगाई के इस दौर में हर कोई सरकारी सेहत केंद्रों की और भागता है। -नीना देवी, स्थानीय निवासी।
कुछ दिन पहले फेज-1 की डिस्पेंसरी में बच्चे को इंजेक्शन लगवाने आया था। मैं एक निजी कंपनी में कार्यरत हूं तो मुझे बच्चे को इंजेक्शन लगवाकर ऑफिस निकलना था। लेकिन यहां स्टाफ आने का दो घंटे तक इंतजार किया। इतने में स्टाफ के सदस्य ने बोल दिया कि इंजेक्शन खत्म हो गए हैं। ऐसे में तो आप समझ सकते हैं कि बच्चे को चोट लग जाए तो इलाज के लिए डिस्पेंसरी में सुविधा नहीं मिल सकती।
-कौशल जायसवाल, निवासी 3बी1, मोहाली।
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स्टाफ बढ़ाने का भेजा है प्रस्ताव
स्टाफ की कमी से ही ऐसी परेशानी आती है। जबकि इसके समाधान के लिए विभाग के बड़े अधिकारियों को पहले ही स्टाफ बढ़ाने के लिए एक प्रस्ताव बनाकर भेजा जा चुका है। अभी नई सरकार आई है और इस मामले को नई सरकार के पास दोबारा से उठाया जाएगा। इन डिस्पेंसरियों में स्टाफ बढ़ने के बाद से इस तरह की दिक्कत नहीं आएगी। -डॉ. आदर्शपाल कौर, सिविल सर्जन, मोहाली।
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