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भुखमरी, खून की कमी और ठंड से हुई थी गायों की मौत

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मोहाली। लालडृू की मगरा गोशाला में गायों की मौत का कारण भूख, खून की कमी व तनाव था। यह खुलासा गायों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट से हुआ है। रिपोर्ट मिलते ही डीसी गिरीश दियालन के आदेश पर एसडीएम डेराबस्सी मेजर गुरजिंदर बेनीपाल ने गोशाला का प्रबंध देख रही संस्था को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। जवाब के लिए चार दिन का समय दिया है।
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डिप्टी कमिश्नर गिरीश दियालन ने बताया कि गोशाला में पिछले दिनों पचास से अधिक गायों की मौत हो चुकी है। इनमें से 22 गायों का पोस्टमार्टम सीनियर वेटरिनरी डॉ. विमल शर्मा की अगुवाई में तीन सदस्यीय टीम ने किया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण भुखमरी, खून की कमी, तनाव व ठंड आया है। उन्होंने बताया कि इससे पहले जिला प्रशासन की तरफ से कार्यकारी एसडीएम मेजर बेनीपाल के माध्यम से पशुओं की मौत के मामले की जांच शुरू की गई थी। एसडीएम ने अपने दौरे में पाया कि गोशाला में सफाई की कमी थी। साथ ही पशुओं के नीचे गोबर तक नहीं उठाया गया था। याद दिला दें कि अमर उजाला द्वारा लालडू गोशाला में लगातार मर रही गायों के मामले को गंभीरता से उठाया गया। इसके बाद प्रशासन की नींद खुली और अब मामले की पड़ताल शुरू की है।
पूरा चारा नहीं दिया जाता, इलाज का इंतजाम अधूरा
डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि एसडीएम की रिपोर्ट के मुताबिक पशुओं के लिए पूरे शेड नहीं बनाए गए हैं। साथ ही उन्हें न ही पूरा चारा दिया जाता है। गायों के इलाज के लिए भी प्रबंध पूरे नहीं हैं। उन्होंने बताया कि एसडीएम मेजर गुरजिंदर सिंह बेनीपाल ने शुक्रवार को ध्यान फाउंडेशन के प्रबंधकों को तलब करके कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
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प्रबंधों में बड़े स्तर पर हैं खामियां
डीसी ने बताया कि प्रारंभिक जांच में पता चला है कि 32 एकड़ जमीन में फैली इस गोशाला के प्रबंधों में बड़े स्तर पर खामियां हैं। उन्होंने नगर काउंसिल लालड़ू के ईओ को वहां बनाए जा रहे शेड के निर्माण में तेजी लाने के लिए कहा था। इस संबंधी तीन महीने पहले आदेश जारी किए गए थे। उन्होंने गोशाला प्रबंधकों को पशुओं के इलाज के लिए बेहतर इलाज को यकीनी बनाने के लिए कहा है। उन्होंने गोशाला में गोबर के निपटारे के लिए बायो गैस प्लांट लाने की संभावना तलाशने के निर्देश दिए हैं।
गोशाला में चौबीस घंटे तैनात रहेगा डॉक्टर
डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि बीमार गायों को बेहतर इलाज के लिए अलग शेड में तब्दील करने के निर्देश दिए गए हैं। गोशाला में बीमार पशुओं की देखभाल के लिए डॉक्टर चौबीस घंटे उपलब्ध रहेगा।
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