मोहाली। पंजाबी गायक परमीश वर्मा पर 2018 में हुई फायरिंग के मामले में अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। सुनवाई में लगातार देरी के कारण दो थाना प्रभारियों सहित तीन पुलिसकर्मियों के गैर-जमानती वारंट जारी किए गए हैं। अदालत ने अभियोजन पक्ष को सबूत पेश करने का अंतिम अवसर दिया है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने पुलिस और अभियोजन के ढीले रवैये पर नाराजगी जताई। अदालत ने पुलिस उपमहानिरीक्षक रूपनगर रेंज नानक सिंह को पत्र लिखकर गवाहों और साक्ष्यों को अदालत में पेश कराने के निर्देश दिए हैं।
गैर-जमानती वारंट गुरकीरत सिंह, सहायक उपनिरीक्षक सुखपाल सिंह और सहायक उपनिरीक्षक जसपाल सिंह के खिलाफ जारी हुए हैं। गैंगस्टर दिलप्रीत सिंह बाबा, सुखप्रीत उर्फ बुड्ढा, आशीष और हरजिंदर सिंह के लिए 20 जुलाई के प्रोडक्शन वारंट भी जारी किए गए हैं। अदालत ने कहा कि 18 जनवरी 2024 को आरोप तय होने के बाद भी अभियोजन को कई अवसर दिए गए। इसके बावजूद गवाह और सबूत प्रस्तुत नहीं किए गए, जिससे मुकदमे की सुनवाई अनावश्यक रूप से लंबी खिंचती रही। पुलिस ने इस मामले में हत्या के प्रयास, दंगा, आपराधिक साजिश और आर्म्स एक्ट समेत विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया था। हालांकि, अर्शदीप सिंह और अरुण कुमार को पर्याप्त साक्ष्य न मिलने पर पहले ही आरोपमुक्त कर दिया गया था।
2018 की घटना और जांच
13 अप्रैल 2018 की रात मोहाली के इंडस्ट्रियल एरिया के पास परमीश वर्मा और उनके दोस्त कुलवंत चाहल पर गोलियां चलाई गई थीं। इस हमले में दोनों घायल हो गए थे। घटना के अगले दिन गैंगस्टर दिलप्रीत सिंह बाबा ने सोशल मीडिया पर इसकी जिम्मेदारी ली थी। जांच में सामने आया कि फिरौती की मांग पूरी न होने पर आरोपियों ने चंडीगढ़ के एलांते मॉल से परमीश वर्मा का पीछा किया था। उन्होंने मोहाली के सेक्टर-91 के पास उनकी कार रोककर जान से मारने की नीयत से फायरिंग की थी।