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नींव पत्थर पर ही अटका नयागांव का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, कहां करवाएं इलाज

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नयागांव। मुख्यमंत्री आवास से चंद मिनटों की दूरी पर बसा नयागांव हमेशा से मूलभूत सुविधाओं के लिए जूझता रहा है। 2006 में नगर काउंसिल का दर्जा मिलने के बाद लोगों को उम्मीद जगी थी कि शायद इलाके का विकास हो जाए। जबकि पिछले 15 साल में इलाके की आबादी तीन गुना से ज्यादा बढ़ गई है, लेकिन मूलभूत सुविधाएं पुराने समय की ही हैं। उनमें कोई बढ़ोतरी नहीं हो पाई है, इलाके के लोगों को अब तक अच्छा स्वास्थ्य केंद्र, उच्च शिक्षण संस्थान, सामुदायिक केंद्र, एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड और पावर ग्रिड जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो पाई हैं।
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जानकारी के मुताबिक नयागांव को 2006 में नगर काउंसिल का दर्जा मिलने के बाद से इन पंद्रह साल में इलाके की आबादी तकरीबन तीन गुना से भी ज्यादा बढ़ गई है। चुनाव के समय नेताओं की ओर से मूलभूत सुविधाओं को लेकर बड़े-बड़े दावे और वादे किए जाते हैं। लेकिन चुनाव निकल जाने के बाद इलाके में कुछ भी नहीं होता है। पिछले नगर काउंसिल चुनाव से पहले इलाके के सांसद मनीष तिवारी की ओर से सामुदायिक केंद्र भवन का नींव पत्थर 13 अक्तूबर, 2020 को रखा गया था और एक करोड़ 41 लाख रुपये की लागत से यह सामुदायिक भवन बनना था। लेकिन एक साल से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी यहां पर काम शुरू नहीं हो पाया है। यहां हालात यह हैं कि अब तो सांसद की ओर से रखा गया नींव पत्थर तक ही गायब हो गया है।
वहीं, इलाके में कोई भी एंबुलेंस की सुविधा नहीं है। किसी भी आपात स्थिति में मोहाली से एंबुलेंस आने में करीब 40-45 मिनट का समय लग जाता है। इस कारण इलाके में पहले भी कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। यहां तक कि एंबुलेंस की देरी की वजह से कई मरीजों की जान भी जा चुकी है। ऐसा ही एक मामला 6 सितंबर को इलाके में घटित हुआ था। अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद 22 सितंबर को तत्कालीन सिविल सर्जन डॉ. मनजीत सिंह ने इलाके के लिए एक एंबुलेंस को हरी झंडी दिखाई थी। लेकिन यह एंबुलेंस हरी झंडी दिखाने के बाद से आगे नहीं बढ़ पाई है।
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इसके साथ ही इलाके में बढ़ती आबादी को देखते हुए यहां पर एक पॉवरग्रिड की सख्त जरूरत है। इलाके में पावरग्रिड न होने के कारण बिजली सप्लाई बाधित रहती है। गर्मी के दिनों में बार-बार बिजली की समस्या आती है। बीती 11 जून को हुई नगर काउंसिल की पहली बैठक में पावरग्रिड संबंधी एक प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन वह भी राजनीति की भेंट चढ़ गया। इस कारण अब तक इलाके में पावरग्रिड नहीं बन पाया है। लोगों की ओर से बार-बार फायर ब्रिगेड के लिए आवाज उठाई जाती है। इलाके में अगर कोई आग लग जाए तो चंडीगढ़ या मोहाली से फायर ब्रिगेड की गाड़ी बुलानी पड़ती है। लेकिन प्रशासन ने इसकी तरफ भी कोई ध्यान नहीं दिया है।
इलाके में विकास पर नहीं दिया ध्यान
नयागांव की आबादी दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है, लेकिन सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। लोग इलाके में जरूरत के हिसाब से अपना मकान तो बना लेते हैं। इसके बाद लोगों को बिजली पानी से लेकर अन्य मूलभूत सुविधाओं के लिए सरकारी दफ्तरों के धक्के खाने पड़ते हैं। प्रशासन को इलाके के विकास की तरफ ध्यान देना चाहिए।
-शत्रुघन सिंह, निवासी कुमाऊं कॉलोनी।
बुलानी पड़ती है निजी एंबुलेंस
शहर की आबादी डेढ़ लाख होने के बाद भी इलाके में आपात स्थिति में कोई एंबुलेंस की सुविधा नहीं है। न ही इलाके में कोई अच्छा सरकारी अस्पताल है। छोटी से छोटी बीमारी के लिए शहर से बाहर जाना पड़ता है। यह सुविधा नहीं होने से लोग निजी एंबुलेंस बुलाते हैं और प्राइवेट अस्पतालों पर ही निर्भर हैं। -कुलदीप भंडारी, निवासी आदर्श नगर।
बनाया जाए फायर ब्रिगेड स्टेशन
पिछले दिनों बाजार में एक होटल के टावर में आग लग गई थी। मोहाली से एंबुलेंस को आने में लगभग 45 मिनट तक का समय लगा था। इसलिए हमारी प्रशासन से मांग है कि इलाके की आबादी और बाजार में भीड़भाड़ को देखते हुए यहां एक स्थायी तौर पर फायर ब्रिगेड स्टेशन बने और तब तक एक गाड़ी खड़ी होनी चाहिए। - उमेश गुलियानी, सदस्य, मार्केट वेलफेयर एसोसिएशन नयागांव।
गर्मी के मौसम में बिजली की बहुत समस्या रहती है। बार-बार बिजली के लंबे कट लगते रहते हैं, जिससे लोगाें के पसीने छूट जाते हैं। बिजली विभाग के कर्मचारी कहते हैं कि इलाके में एक पावरग्रिड जरूर होना चाहिए। इसलिए प्रशासन से मांग है कि जल्द से जल्द इलाके में पावरग्रिड लगना चाहिए, जिससे लोगों को बिजली की समस्या से निजात मिल सके। -गुरदीप सिंह, निवासी दशमेश नगर।
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