मोहाली निगम कमिश्नर उमा शंकर गुप्ता ने ऐलान कर दिया है कि, अब वह मेयर की अगुवाई में होने वाली किसी भी बैठक को अटेंड नहीं करूंगा। इस ऐलान के साथ शुक्रवार को हुई नगर निगम की बैठक के साइड इफेक्ट सामने आ रहे हैं। जाहिर है कि शुक्रवार को नगर निगम की बैठक में काफी तनातनी के साथ जमकर अपशब्दों का उपयोग हुआ था। कमिश्नर के समर्थन में शहर के कुछ एनजीओ भी खुलकर सामने आ चुके हैं। इनके प्रतिनिधियों का कहना है कि निगम की कार्यशैली का ही नतीजा है कि शहर में विकास कार्यों की गति मिली। बहरहाल हाउस की बैठक के दौरान जो कुछ हुआ, उससे निगम कमिश्नर उमा शंकर गुप्ता खासे खफा हैं। उन्होंने साफ कर दिया है कि भविष्य में होने वाली हाउस की किसी भी बैठक में शामिल नहीं होंगे। उनकी जगह मातहत स्टाफ ही बैठक में शामिल होगा।
उनके कार्यकाल में ही बेस्ट सेनीटेशन सिस्टम के लिए मोहाली निगम को देशभर में पहला पुरस्कार प्राप्त हुआ, इसके अलावा 416 करोड़ के प्रोजेक्ट पास हुए। प्रापर्टी टैक्स को लागू कराने के 94 करोड़ रुपये की वसूली मोहाली निगम ने की। ऐसे कई कार्य हैं, जो निगम कमिश्नर के लिए ढाल का काम करने के साथ उन लोगों की भूमिका को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं, जो हाउस की बैठक में निगम कमिश्नर पर जमकर भड़के थे।