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Mohali News: आईटी सिटी को दुबई-सिंगापुर की तर्ज पर बसाने का किया था दावा, बदहाल सड़कों से निकली हवा

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मोहाली। वीआईपी सिटी में दुबई और सिंगापुर की तर्ज पर आईटी सिटी बसाने के गमाडा के दावे की यहां की बदहाल सड़कों ने हवा निकाल दी है। क्योंकि गमाडा ने जो दावा करके यहां के लोगों को प्लॉट बेचे थे वह बुनियादी सुविधाएं लोगों को मिल ही नहीं रही हैं। लोगों की ओर से इसकी शिकायत करने पर गमाडा के अधिकारी कोई न कोई बहाना बना रहे हैं। जबकि यहां पर करोड़ों रुपये खर्च करके लोगों ने जो आशियाने बनाए थे, उनको बताई गई सुविधाएं मिल ही नहीं रही हैं।
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आईटी सिटी की अंदरूनी सड़कों की हालत बदतर हो गई है और इनमें जगह-जगह बड़े गड्ढे बन गए हैं। इस कारण यहां के निवासियों को इन पर अपने वाहन तक चलाना मुश्किल हो गया है। यहां की टूटी सड़कों के कारण वाहन चालक कभी भी हादसे का शिकार हो जाते हैं। दोपहिया वाहन वाले सबसे ज्यादा इस दुर्घटनाग्रस्त सड़कों के शिकार हो रहे हैं। लोग कई बार इन बदहाल सड़कों की शिकायत गमाडा के अधिकारियों को कर चुके हैं, लेकिन निजी बिल्डरों के हाथ में होने के कारण लोगों की फरियाद सुनने के लिए कोई नहीं है। इस स्थिति में राहगीरों को आए दिन आवाजाही में परेशानी हो रही है।

बारिश में गड्ढों में भरता है पानी, बीमारी फैलने का खतरा
बारिश में बदहाल सड़कों के गड्ढों में पानी भर जाता है और लोगों को इनकी गहराई का पता ही नहीं चलता। इस कारण उनको परेशानी का सामना करना पड़ता है। यहां की टूटी सड़कें राहगीरों के लिए आफत बन गई हैं। बारिश का पानी इन गड्ढों में बहुत दिनों तक भरा रहता है। इससे यहां मच्छर पैदा होने के कारण डेंगू जैसी गंभीर बीमारियों के फैलने का खतरा बना रहता है। वहीं, रास्ते सही नहीं होने के कारण लोग कच्चे रास्ते (पगडंडियों) पर चलने को मजबूर हैं।
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कहा था दुबई और सिंगापुर की तर्ज पर होगा विकास
बता दें कि सरकार ने लोगों से वायदा किया था कि मोहाली की सड़कों को सिंगापुर और दुबई की तर्ज पर संवारा जाएगा। कई साल बीत गए लेकिन सिंगापुर बनाना तो दूर की बात यहां की सड़कें तक नहीं बनाई गईं। लोगों की मांग है कि उन्हें कोई हाई क्लास सुविधाएं नहीं चाहिए। उन्हें सड़कें, स्ट्रीट लाइटें, पानी, बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं मिलनी चाहिए, जिसे सरकार और प्रशासन देने में नाकामयाब रहा है।


दो साल से नहीं मिलीं सुविधाएं

हमें यहां पर रहते हुए करीब दो साल हुए हैं। सोचा था कि नए सेक्टर में सुविधाएं भी अच्छी होंगी। इस पर महंगे दाम में प्लॉट खरीदकर घर बनाया, लेकिन अब बुनियादी सुविधाएं तक नहीं मिल रही हैं। स्ट्रीट लाइट्स कई शिकायतें करने बाद चली है। अब सड़कें टूट रही हैं। इतना टैक्स और पैसा किसलिए दे रहे हैं, समझ नहीं आ रहा। -अमित कुमार, स्थानीय निवासी

बनाई गई सड़कों की हो जांच

इन सड़कों से रात में तो दूर दिन में भी गुजरना मुश्किल हो रहा है। एक ओर पूरा सेक्टर सुनसान है तो दूसरी ओर लोगों की आवाजाही कम है। लोग यहां बसने अभी शुरू हुए हैं। अभी से सड़कों का यह हाल है तो जब लोग रहना शुरू करेंगे, तब क्या होगा। इन सड़कों को बनाने में खानापूर्ति की गई है, इसकी जांच की जानी चाहिए। - दविंदर आहलूवालिया, स्थानीय निवासी

सड़क के कारण स्कूटी हुई खराब
मैं इन टूटी सड़कों से अपनी स्कूटी से आती-जाती हूं। खराब सड़क होने के कारण स्कूटी को काफी नुकसान होता है। इससे बहुत मुश्किल होती है। यहां स्ट्रीट लाइट्स भी नहीं जलती हैं, इसलिए रात में यह गड्ढे दिखाई भी नहीं देते और बहुत धीमी गति से आवाजाही करनी पड़ती है, इससे समय बर्बाद होता है। -ममता शर्मा, स्थानीय निवासी
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