जीरकपुर के गांव सोनौली अवैध खनन करके खोदी गई जमीन - कर्मचंद
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जीरकपुर। कोरोना संक्रमण ने चलते सभी कामों पर लॉकडाउन है, लेकिन खनन माफिया पर इसका जरा भी असर नहीं पड़ रहा है। नतीजा जीरकपुर के सोनौली गांव और डेराबस्सी के मुबारिकपुर में खनन माफिया कृषि योग्य भूमि को बंजर बनाने में जुटा हुआ है।
अमर उजाला की पड़ताल में सामने आया है कि सोनौली गांव में तीन से चार खेतों से 25 से 30 फीट गहरे गड्ढे खोदकर सैकड़ों टिप्पर मिट्टी और रेत निकाल चुके हैं। बता दें कि रोजाना यहां से 50 से 70 टिप्पर रेत और मिट्टी से भरकर निकाल जा रहे हैं लेकिन स्थानीय पुलिस चुप बैठी है। एक ओर जहां कोरोना महामारी के बीच लॉकडाउन में लोगों को खाने-पीने और दवा लेने तक नियम हैं वहीं, खनन माफिया के लिए यह प्रतिबंध बेअसर हैं।
कृषि योग्य भूमि हो रही बंजर
पुलिस की मिलीभगत से लॉकडाउन का फायदा उठाते हुए खनन करने वाले लाखों रुपये की कमाई कर रहे हैं। लेकिन थाना क्षेत्र में हो रहे इस खनन को देखने वाला कोई नहीं है। इससे प्रदेश सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का चूना खनन माफिया लगा रहा है। आश्चर्य जनक बात तो यह है कि खनन को लेकर ना तो किसी ने प्रशासन से अनुमति ली है और ना ही ग्रामीणों की इसमें सहमति है। इस तरह खनन करके यहां की कृषि योग्य भूमि को बंजर बनाया जा रहा है।
अवैध खनन भूमिगत जल के लिए हानिकारक
खनन माफिया ने पीरमुछल्ला सनौली व घग्घर नदी से रेत चोरी कर जल स्तर कम करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। नतीजा इस क्षेत्र में पिछले पांच सालों से भूमिगत जल के श्रोत खत्म होते जा रहे हैं। माफिया रेत चोरी करने के लिए खुदाई करते हैं और रेत के साथ जमीन से पानी भी निकलता है। इससे यहां के स्थानीय लोग परेशान हैं और यह गंभीर चिंता का विषय भी है। लोगों के अनुसार 10 साल पहले लगे ट्यूबवेल भी नाकाम साबित हो रहे हैं।
कार्रवाई की जाएगी
इस संबंधी जिला खनन अधिकारी गुरप्रीत सिंह ने बताया कि मामला संज्ञान में आ गया है। जांच के बाद तुरंत काम बंद करवा दिया जाएगा। इसमें शामिल व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई भी होगी।